अचानक भयानक हुई कोसी तो जान बचा भागे लोग, खोल दिए गए बराज के सभी 56 फाटक

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पूर्णिया :-  एक सप्ताह से लगातार हो रही बारिश के कारण बिहार में कोसी नदी अपने विकराल रूप में आती दिख रही है। पूर्वी बिहर में कोसी-सीमांचल की नदियां उफान पर हैं। शनिवार रात तक कोसी नदी का डिस्चार्ज चार लाख क्यूसेक के करीब पहुंच गया था। इसके बाद कोसी बराज के सभी 56 फाटक खोल दिए गए हैं। कोसी सहित अन्‍य नदियों में उफान के कारण पूर्वी बिहार के अन्‍य इलाकों में भी जल-प्रलय के हालात होते दिख रहे हैं। 
रौद्र रूप में कोसी 
बिहार व नेपाल में कोसी के जल-ग्रहण क्षेत्र में लगातार बारिश के कारण नदी अपना रौद्र रूप दिखाने लगी है। डेढ़ दशक बाद इसका डिस्‍चार्ज चार लाख क्‍यूसेक पार गया है। इससे पूर्व 2004 में यहां का डिस्चार्ज चार लाख के करीब पहुंचा था। 
तटबंध के अंदर घरों में घुसा पानी 
रविवार घरों में पानी घुस जाने से तटबंध के अंदर के गांवों में अफरा-तफरी मच गई है। लोग सुरक्षित ठिकानों की तलाश में निकलने लगे हैं। देर रात से ही अफरा-तफरी का माहौल है। किसी के घर बह गए हैं तो किसी के मवेशी। 
सुपौल में सुरक्षा बांध टूटा 
सुपौल के सरायगढ भपटियाही प्रखंड अंतर्गत गढ़िया सुरक्षा बांध टूट जाने से वहां बसी एक हजार आबादी के लिए विकट समस्या खड़ी हो गई है । पूर्वी तटबंध के 33.90 किमी स्परों के उपर से पानी बह रहा है। ये स्पर एनएच 57 से बिलकुल सटे हैं। वहीं मरौना निर्मली मुख्य सड़क मरौना चौक के समक्ष टूट गई है, जिससे मरौना थाना और स्‍वास्‍थ्‍य केंद्र से लोगों का संपर्क टूट गया है। 
बांध पर खतरा मंडराया 
कोसी में अचानक भयानक जल-प्रवाह से बांध पर खतरा मंडराने लगा है। अगर यह टूटा तो जल-प्रलय आना तय है। खतरे को देखते हुए कोसी बराज के सभी 56 फाटक खोल दिए गए हैं। इसके साथ पानी भयानक प्रवाह के साथ निचले रिहायशी इलाकों व खेतों की ओर चल पड़ा है। इस कारण सुपौल, सहरसा और मधेपुरा समेत आसपास के जिलों में तटबंध के आसपास बसी पांच लाख की आबादी खतरे में है। 
चार लाख क्यूसेक डिस्चार्ज 
सुपौल में शनिवार संध्या चार बजे कोसी बराज से 3,07,655 क्यूसेक जलस्राव रिकॉर्ड किया गया। देर रात 10 बजे तक यह डिस्चार्ज चार लाख क्यूसेक के करीब हो गया था। रविवार सुबह तक यह चार लाख क्‍यूसेक पार कर गया था। इससे सुपौल, बसंतपुर, सरायगढ़-भपटियाही, किसनपुर, मरौना और निर्मली प्रखंड के दर्जनों गांवों में बाढ़ का पानी प्रवेश कर गया है। सिकरहट्टा मझारी लो बांध के 6.40 एवं 9.40 बिंदुओं पर नदी का दबाव बढ़ गया है। पुल्टेगौड़ा स्थित स्पर संख्या 11 पर रेनकट के कारण कोसी का दबाव बढ़ गया है। 
मरौना-निर्मली मुख्य सड़क पर दबाव
उधर, तिलयुगा व बिहुल नदी भी उफान पर है। बिहुल नदी में पानी बढऩे से बेलही से ललमिनिया जाने वाली सड़क दो भागों में विभक्त हो गई। वहीं, तिलयुगा नदी ने बसखेरा गांव के समीप मरौना-निर्मली मुख्य सड़क पर दबाव बना रखा है। किसनपुर प्रखंड क्षेत्र के नौआबाखर में ग्रामीणों द्वारा बनाए गए सुरक्षा बांध के टूटने से कई गांव जलमग्न हो गए। 
तटबंध के भीतर स्थिति भयावह
पूर्णिया में महानंदा, कनकई, परमान, बकरा आदि नदियों का जलस्तर खतरे के निशान से लगभग एक मीटर ऊपर है। महानंदा एवं कनकई का पानी बैसा एवं अमौर प्रखंड के करीब आधा दर्जन गांवों में घुस गया है। सहरसा में तटबंध के अंदर बसे गांवों में बाढ़ का पानी फैलने लगा है। वहां स्थिति भयावह है। 
नवहट्टा, महिषी, सलखुआ आदि प्रखंडों के तटबंध के अंदर बसे गांवों के निचले इलाकों में पानी फैल गया है। मधेपुरा में भी नदियां उफान पर हैं। कोसी और उसकी उपनदियों में शुक्रवार रात से तेजी से पानी बढ़ रहा है। आलमनगर और चौसा प्रखंड के निचले इलाकों में पानी भर आया है। वहीं, कुमारखंड प्रखंड में सुरसर नदी उफान पर है। 
अररिया शहरी क्षेत्र में चल रही नावअररिया शहर में देर शाम परमान नदी का पानी प्रवेश कर गया है। वार्ड 29 व 11 के लोग ऊंचे स्थान पर शरण लेने को मजबूर हो गए हैं। आदर्श मध्य विद्यालय ककुरवा के निकट स्थित बस्ती में नाव चल रही है। तरौना भोजपुर ग्राम पंचायत में बकरा नदी का पानी वार्ड आठ से 13 तक में पहुंच गया है। नरपतगंज प्रखंड के फुलकाहा-लक्ष्मीपुर गांव भी बाढ़ की चपेट में आ गया है। जोगबनी के भी कई वार्डों में पानी प्रवेश कर गया है। बकरा, रतुआ, परमान सहित छोटी नदियां खरहा के जलस्तर में भी लगातार वृद्धि जारी है। डीएम ने सभी सीओ को राहत कैंप लगाने का निर्देश दिए हैं। 
महानंदा खतरे का निशान पार 
किशनगंज में महानंदा के जलस्तर में लगातार वृद्धि हो रही है। नदी खतरे के निशान से 63 सेमी उपर बह रही है। नदी से सटे इलाकों में तेजी से फैल रहा बाढ़ का पानी।

पुस्तकः विश्व की प्राचीनतम सभ्यता लेखकः पं. अनूप कुमार वाजपेयी,कई पुरस्कारों से पुरस्कृत समीक्षा प्रकाशन, दिल्ली, मुजफ्फरपुर, मूल्य-2000 रुपये लेखक ने राजमहल पहाड़ियों और चट्टानों पर संसार के प्राचीनतम आदिमानव के पदचिन्ह ढूंढ निकाले। पता-वाजपेयी निलयम, नया पारा, दुमका झारखंड

पुस्तकः विश्व की प्राचीनतम सभ्यता लेखकः पं. अनूप कुमार वाजपेयी,कई पुरस्कारों से पुरस्कृत समीक्षा प्रकाशन, दिल्ली, मुजफ्फरपुर, मूल्य-2000 रुपये लेखक ने राजमहल पहाड़ियों और चट्टानों पर संसार के प्राचीनतम आदिमानव के पदचिन्ह ढूंढ निकाले। पता-वाजपेयी निलयम, नया पारा, दुमका झारखंड

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