नीतीश विरोधी लहर ने छुड़ाए भाजपा के पसीने

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-देवेंद्र गौतम

पुस्तकः विश्व की प्राचीनतम सभ्यता लेखकः पं. अनूप कुमार वाजपेयी,कई पुरस्कारों से पुरस्कृत समीक्षा प्रकाशन, दिल्ली, मुजफ्फरपुर, मूल्य-2000 रुपये लेखक ने राजमहल पहाड़ियों और चट्टानों पर संसार के प्राचीनतम आदिमानव के पदचिन्ह ढूंढ निकाले। पता-वाजपेयी निलयम, नया पारा, दुमका झारखंड

पुस्तकः विश्व की प्राचीनतम सभ्यता लेखकः पं. अनूप कुमार वाजपेयी,कई पुरस्कारों से पुरस्कृत समीक्षा प्रकाशन, दिल्ली, मुजफ्फरपुर, मूल्य-2000 रुपये लेखक ने राजमहल पहाड़ियों और चट्टानों पर संसार के प्राचीनतम आदिमानव के पदचिन्ह ढूंढ निकाले। पता-वाजपेयी निलयम, नया पारा, दुमका झारखंड

भाजपा जब चुनावी मैदान में उतरती है तो भारत-पाकिस्तान, हिंदू-मुसलमान, अनुच्छेद 370 और सैन्य राष्ट्रवाद के नाम पर वोट मांगती है। भावनाओं को भड़काती है। समाज को बांटती है और उन्माद की लहरों पर सवार होकर जीत हासिल करने की कोशिश करती है। लेकिन बिहार में चुनाव का मुख्य मुद्दा रोजगार बन गया है। इस मुद्दे पर भाजपा और उसके गठबंधन एनडीए के पास कहने के लिए कुछ भी नहीं है। इस मुद्दे पर उसने कुछ किया ही नहीं है। धार्मिक उन्माद पैदा करने के लिए योगी आदित्यनाथ को बुलाया गया तो उनका मुर्दावाद के नारे के साथ स्वागत किया गया। मां-बहन की गालियां दी गईं। बिचारे उल्टे पांव वापस लौटे। यूपी में इतनी फजीहत होती तो वे सामूहिक रूप से एनएसए लगा देते। लाठी और गोलियों की बरसात करा देते लेकिन यहां उनकी हुकूमत नहीं थी इसलिए मन मसोस कर रह गए। मोदी जी की सभाओं में कुर्सियां खाली रह जा रही हैं। भाजपा और जदयू के दर्जनों नेताओं को जनता के विरोध के कारण गालियां सुनकर भागना पड़ा है। जनता नीतीश और मोदी की सरकारों के खिलाफ आक्रोश व्यक्त कर रही है। नीतीश जी बौखला रहे हैं। जनता का रुख साफ एनडीए के खिलाफ नज़र आ रहा है लेकिन भाजपा अपने गोदी मीडिया के जरिए फर्जी ओपिनियन पोल कराकर हर जगह अपनी बढ़त दिखा रही है। इनका ज़मीनी हकीकत से कोई वास्ता नहीं। पिछले छह वर्षों के अंदर गोदी मीडिया की सत्ता परस्ती के कारण पत्रकारिता की साख पर भारी नकारात्मक असर पड़ा है। लेकिन अधिकांश चैनलों में मुकेश अंबानी और अडानी का पैसा लगा है। इसलिए यह तय है कि उनके पत्रकारों को नौकरी करनी है तो भाजपा को जिताने के लिए अंतिम दम तक लुंगी डांस करना होगा।

बिहार में भाजपा का अंतिम दांव ईवीएम रह गया है। लेकिन इसके लिए हवा बनानी जरूरी होती है। ईवीएम में किसी तरह की हेराफेरी जन समर्थन के बिना नहीं की जा सकती। ऐसी कोशिशें भयानक जनाक्रोश को जन्म देती हैं। बिहार के ग्रामीण इलाकों में प्रवासी मजदूरों का मुद्दा गरम है और शहरी इलाकों में रोजगार का। भाजपा अभी तक बिहार के मिजाज को नहीं समझ सकी है।

पिछले चुनाव में भी उसने सांप्रदायिक ध्रुवीकरण की पूरी कोशिश की थी। उस समय मोदी मैजिक भी बरकरार था लेकिन भाजपा तीसरे नंबर पर आई थी। बिहार का मिजाज समाजवादी रहा है। उसे सांप्रदायिक रंग देना संभव नहीं है। भाजपा के पक्ष में जनादेश मिला भी नहीं था। जनादेश महागठबंधन के पक्ष में था। नीतीश के पलटी मारने के बाद वहां एनडीए की सरकार बनी थी। यदि नीतीश के 15 वर्षों के कार्यकाल पर नज़ डालें तो पहले पांच वर्ष में उन्होंने सही में सराहनीय काम किया था। लेकिन इसके बाद वे जातीय समीकरण साधने में लगे रहे। पिछले पांच वर्ष के दौरान तो वे एक थके हुए बूढ़े नेता के रूप में दिखी पड़े जिसे आम जनता के दुःख-दर्द से कोई वास्ता ही नहीं रहा। नीतीश सरकार ने इस कार्यकाल में ऐसा कुछ किया नहीं जिससे जनता उन्हें चौथी बार मौका दे। उन्होंने बिहार के लोगों को पूरी तरह निराश किया है। अभी वे भाजपा के साथ हैं। उनका समाजवादी चरित्र खत्म हो चुका है। इधर भाजपा का सांप्रदायिकता का कार्ड बेअसर हो चुका है। झारखंड के चुनाव में भी भाजपा ने आक्रामक प्रचार किया था लेकिन सरकार से हाथ धोना पड़ा था। दिल्ली विधानसभा के चुनाव में शाहीन बाग ने नाम पर हिंदू-मुसलिम और भारत पाकिस्तान करने में कोई कसर नहीं छोड़ी। प्रधानमंत्री मोदी ने धुआंधार रैलियां की। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह कॉलोनी-कॉलोनी घूमे लेकिन नतीज़ा क्या हुआ। मात्र आठ सीटों पर संतोष करना पड़ा। अरविंद केजरीवाल पूर्ण बहुमत के साथ सत्ता में वापस लौटे। भाजपा यदि जनता को मूर्ख बनाने, झूठे वादे करने और भावनात्मक मुद्दों को उछालने की राजनीति छोड़कर जनता के मूल मुद्दों पर ध्यान नहीं देगी तो केंद्र में भी उसका टिके रहना मुश्किल हो जाएगा। आइटी सेल और गोदी मीडिया भी उनकी नैया को पार नहीं लगा सकेंगे।

भाजपा और जदयू के गठबंधन पर भी सवाल उठ रहे हैं। एलजेपी के चिराग पासवान एनडीए से अलग होकर चुनाव लड़ रहे हैं। वे जदयू के खिलाफ हैं लेकिन स्वयं को मोदी का हनुमान घोषित कर रहे हैं। संदेश यह जा रहा है कि भाजपा ने नीतीश का कद छोटा करने के ले गेम प्लान किया है। आम जनता के बीच इसका नकारात्मक असर पड़ रहा है।

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