यूरिया के साथ जिंक लेने को विवश किसान

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बगहा। कोरोनाकाल के लॉकडाउन में भारतीय अर्थव्यवस्था अगर किसी ने संभालकर रखा था तो वे थे देश के अन्नदाता अर्थात हमारे किसान। लेकिन भाजपा सरकार उन्हें कृषि संबंधी उनकी बुनियादी आवश्यकताएं भी पूरी करने को तैयार नहीं है। बिहार में जहां भाजपा और जदयू की संयुक्त सरकार चल रही है। नीतीश सरकार मुख्यमंत्री हैं वहां किसानों का हाल बेहाल है। बिहार का एक जिला है बगहा। वहां सब्जी और धान की खेती का समय चल रहा है। इसके लिए यूरिया खाद की जरूरत पड़ती है। लेकिन बाजार में यह उपलब्ध नहीं है।

किसी किसी दुकान पर है भी तो वह उसके साथ जिंक व अन्य उर्वरक भी लेने की शर्त रख रहा है। बगहा के वरीय भाजपा नेता रवींद्र कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि अधिकारियों से इस संबंध में शिकायत करने पर भी कोई कार्रवाई नहीं हो रही है। उन्होंने प्रखंड कृषि पदाधिकारी से दूरभाष पर बातचीत की तो वे गोल-मटोल जवाब देकर कन्नी कटा गए। पैक्स अध्यक्ष विष्णु प्रकाश गुप्ता का कहना है कि बहुत दिनों से इफको का रैक नहीं लगने के कारण यूरिया की कमी हो गई है। दुकानदार इसका लाभ उठाकर अन्य उर्वरक लेने पर दबाव डाल रहे हैं।

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार स्वयं कृषक परिवार से आते हैं। लेकिन इन समस्याओं पर ध्यान देने की उनके पास फुर्सत नहीं है। सवाल है कि जब जरूरत के समय बीज, खाद और कीटनाशक नहीं मिलेंगे तो किसान फसल कैसे उगाएंगे। सरकार अपनी जिम्मेदारी के प्रति इतनी लापरवाह कैसे हो सकती है। इफको का रैक आखिर बगहा क्यों नहीं पहुंच पा रहा है। इस समस्या का निदान आखिर कौन करेगा?

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