वैश्विक महामारी कोरोना से बचाव के लिए सावधानी बरतना जरूरी : आरके राजू

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पटना : बिहार के लोकप्रिय वरिष्ठ पत्रकार आरके राजू ने वैश्विक महामारी कोरोना (कोविड-19) के बढ़ते संक्रमण पर गंभीर चिंता जताई है। उन्होंने कहा है कि कोरोनावायरस से बचाव के लिए सावधानी बरतना जरूरी है। यह बीमारी संपूर्ण मानवता के लिए एक बड़ी चुनौती बन गई है। देश-विदेश में कोरोनावायरस से पीड़ित मरीजों की संख्या में लगातार हो रही वृद्धि को देखते हुए यह अनिवार्य प्रतीत होने लगा है कि संक्रमण फैलने के कारणों का पता लगाकर इसके निवारण हेतु अविलंब ठोस कदम उठाए जाएं। इस संबंध में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से की गई पहल सराहनीय है। गौरतलब है कि प्रधानमंत्री ने कोरोनावायरस महामारी की स्थिति की गहन समीक्षा की है और इस रोग की तह तक जाने व इसे जड़ से समाप्त करने की दिशा में आवश्यक कदम उठाने की राज्य सरकारों से भी अपील की गई है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने इस ओर जो गंभीरता दिखाई है, उसके बाद भी राज्य सरकारें नए सिरे से कोरोना वायरस के संक्रमण को रोकने के लिए सक्रियता से नहीं लगे, तो स्थिति भयावह हो सकती है। इसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। यह सामान्य बात नहीं है कि बीते कुछ समय से कोरोना मरीजों की संख्या में अप्रत्याशित वृद्धि हो रही है। हालांकि भारत में कोरोना वायरस की चपेट में आए लोगों की मृत्यु दर अन्य देशों की तुलना में कम है, लेकिन मौत का शिकार हो रहे लोगों की संख्या भी कम नहीं है। यह चिंतनीय है कि कोरोना वायरस के संक्रमण को काबू करने के लिए लोगों को जैसी सावधानियां बरतनी चाहिए, वह नहीं हो पा रहा है। लोगों की लापरवाही के कारण संक्रमण तेजी से बढ़ रहा है। शायद इसी स्थिति को देखकर प्रधानमंत्री को यह कहना पड़ गया कि कोरोना के खिलाफ जागरूकता बढ़ाए जाने की अत्यंत आवश्यकता है। निसंदेह इस दिशा में जागरूकता तभी बढ़ेगी, जब प्रशासन लापरवाह लोगों के खिलाफ सख्ती बढ़ाएगी। लाॅकडाउन से बाहर निकलने का यह अर्थ लगाना कि सब कुछ पहले जैसा सामान्य हो गया है, ऐसा बिल्कुल नहीं समझना चाहिए। कई राज्य सरकारों को लाॅकडाउन नए सिरे से लागू करना पड़ रहा है। लाॅकडाउन की यह वापसी गंभीर स्थिति की सूचक है।
कोरोना संक्रमण की जद में नेता, अभिनेता, खिलाड़ी, जनप्रतिनिधि भी आ रहे हैं। एक तरफ कोरोना के खिलाफ जंग जीतने में शासन ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी है। वहीं, जनता का असहयोगात्मक रवैया कोरोना संक्रमण से जंग जीतने में बाधक बन रहा है। इसमें कोई शक नहीं कि कुछ लोगों की लापरवाही के कारण संक्रमण फैल रहा है। सरकारी स्तर पर वैश्विक आपदा से निपटने के लिए किए जा रहे तमाम प्रयासों के बावजूद कोरोनावायरस के फैलते संक्रमण पर अंकुश नहीं लग पा रहा है। ऐसे में किसी तरह की अव्यवस्था और लापरवाही सरकार के उद्देश्यों पर पानी फेर देगी। कोरोना वायरस के संक्रमण को रोकने के लिए सरकार और प्रशासन को सख्ती बरतने की जरूरत है। लोगों को बिना मास्क घर के बाहर निकलने पर रोक लगानी होगी। यह स्पष्ट हो चुका है कि लोगों की लापरवाही के कारण देश के विभिन्न राज्यों में कोरोना का संक्रमण तेजी से फैल रहा है। हालात इस कदर बेकाबू होते दिख रहे हैं कि कुछ दिनों के बाद अस्पतालों में बेड की भी कमी हो सकती है। कोरोना संक्रमण से बचाव के लिए सबसे बेहतर तरीका जागरूकता और सावधानी है। केंद्र और राज्य सरकार से लाॅकडाउन में छूट मिलने के बाद जागरुकता में कमी आई और इसी कारण मामले भी बढ़े हैं। कोरोना के प्रति जागरूकता का अभाव देखने को मिला है। इसके लिए लोगों को जागरूक करना आवश्यक है। खरीदारी उन्हीं वस्तुओं की करें, जिसकी आवश्यकता तत्काल हो, अन्यथा घर में रहकर कोरोना वायरस के संक्रमण को रोकने में सहायक बनें। इसके लिए सरकार और प्रशासन को भी सख्ती बरतनी होगी। देश में पिछले तीन दिनों से कोरोना संक्रमित मरीजों की संख्या में लगातार वृद्धि हो रही है। हर दिन पिछले दिन की तुलना में अधिक मरीज मिल रहे हैं। संक्रमित मरीजों का बढ़ता आंकड़ा खतरे की घंटी बजा रहा है। लोगों को बिना मास्क के बाहर निकलने पर रोक लगाने के लिए और अधिक सख्ती बरतना जरूरी है। तभी हम कोरोना के खिलाफ जारी जंग जीतने में सफल हो सकते हैं। इसमें सरकारी स्तर से जारी दिशा-निर्देशों का शत-प्रतिशत अनुपालन सुनिश्चित कराने के अलावा व्यापक जन जागरूकता की आवश्यकता है।

पुस्तकः विश्व की प्राचीनतम सभ्यता लेखकः पं. अनूप कुमार वाजपेयी,कई पुरस्कारों से पुरस्कृत समीक्षा प्रकाशन, दिल्ली, मुजफ्फरपुर, मूल्य-2000 रुपये लेखक ने राजमहल पहाड़ियों और चट्टानों पर संसार के प्राचीनतम आदिमानव के पदचिन्ह ढूंढ निकाले। पता-वाजपेयी निलयम, नया पारा, दुमका झारखंड

पुस्तकः विश्व की प्राचीनतम सभ्यता लेखकः पं. अनूप कुमार वाजपेयी,कई पुरस्कारों से पुरस्कृत समीक्षा प्रकाशन, दिल्ली, मुजफ्फरपुर, मूल्य-2000 रुपये लेखक ने राजमहल पहाड़ियों और चट्टानों पर संसार के प्राचीनतम आदिमानव के पदचिन्ह ढूंढ निकाले। पता-वाजपेयी निलयम, नया पारा, दुमका झारखंड

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