कभी पानी के लिए हाहाकार, अब पानी से त्राहिमाम

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सुपौल:- कुदरत का खेल कहे या प्रकृति का कोप। कभी पानी के लिए हाहाकार तो कभी पानी से हाहाकार। कुछ दिन पूर्व तक कोसी के इलाके में पानी के लिए हाहाकार मचा था और अब तटबंध के बीच बसे गांवों में पानी से त्राहिमाम मचा हुआ है। इस बार कोसी के इलाके में बारिश कुछ दिन पूर्व तक न के बराबर थी। खेतों में दरारें फट रही थी, फसल पीले पड़ रहे थे और सूख रहे थे। किसान बारिश को ले आसमान की ओर टकटकी लगाए हुए थे। शायद उपर वाले का दिल पसीजा, थोड़ी बारिश हुई। सूखती-मुरझाती फसलों में थोड़ी जान आई। किसानों के चेहरे खिले और उन्हें अपने फसल को ले थोड़ी उम्मीद बंधी। किन्तु विगत कुछ दिनों से नेपाल सहित तराई क्षेत्रों में हो रही बारिश ने कोसी के इलाके में एक बार फिर से हलचल पैदा कर दी है। कोसी नदी का जलस्त्राव व जलस्तर बढ़ा और तटबंध के बीच बसे गांवों में परेशानी बढ़ चली है। सुपौल,सरायगढ़, किशनपुर, निर्मली, मरौना के दर्जनों गांव में घर-घर पानी घुस आया है। फसल बाढ़ में डूब गई है। लोग घर छोड़ कर माल-मवेशी के साथ ऊंचे स्थानों पर पलायन कर गए हैं और शरण लिये हुए हैं। यू तो कोसी को उत्तर बिहार का शोक कहा जाता है। मदमस्त कोसी कब क्या कर दे कुछ कहा नहीं जा सकता। मानसून के शुरूआती दौर में ही चार लाख क्यूसेक का डिस्चार्ज कोसीवासियों के होश उड़ाने को काफी है। हालांकि डिस्चार्ज में कमी आई है। बावजूद कोसीवासी डरे सहमे हैं। कुछ दिन पहले तक जहां कोसी के इलाके में पानी के लिए हाहाकार था आज कोसी तटबंध के बीच बसे गांवों में पानी से हाहाकार मचा हुआ है।

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