बारिश व आंधी ने मचायी तबाही, कहीं पेड़ धराशायी, तो कहीं उड़ गये छप्पर

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पूर्णिया :- सोमवार की देर रात आंधी के साथ हुई मूसलाधार बारिश ने पूर्णिया और आस पास के इलाकों में तबाही मचा दी। इस दौरान जगह-जगह कई पेड़ धराशायी हो गये जबकि कई कच्चे घरों के छप्पर भी उड़ गये। हालांकि जिले के ग्रामीण इलाकों में इसका असर अधिक दिखा पर शहरी क्षेत्र के सीमावर्ती इलाकों में कहीं गोदाम तो कहीं टीन के मकानों को नुकसान पहुंचा।

पुस्तकः विश्व की प्राचीनतम सभ्यता लेखकः पं. अनूप कुमार वाजपेयी,कई पुरस्कारों से पुरस्कृत समीक्षा प्रकाशन, दिल्ली, मुजफ्फरपुर, मूल्य-2000 रुपये लेखक ने राजमहल पहाड़ियों और चट्टानों पर संसार के प्राचीनतम आदिमानव के पदचिन्ह ढूंढ निकाले। पता-वाजपेयी निलयम, नया पारा, दुमका झारखंड

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सोमवार की रात 11 बजे के बाद अचानक तेज हवा के साथ बारिश शुरू हो गयी। तेज हवा ने देखते-देखते आंधी का रुप ले लिया और तबाही शुरू कर दी। इस आंधी ने अलग-अलग प्रखंडों से सटे शहरी इलाकों में ज्यादा तबाही मचायी। पूर्वी छोर पर बरसौनी और पश्चिमी छोर पर मरंगा से सटे इलाकों में कई कच्चे घरों व गोदामों के छप्पर उड़ गये। गनीमत यह रही कि गर्मी के कारण लोग इस समय गहरी नींद में नहीं थे।
यही वजह है कि कहीं से किसी के घायल होने की सूचना नहीं है। इधर, शहर के ध्रुव उद्यान में कई पुराने पेड़ तेज आंधी में धराशायी हो गये जबकि गुलाबबाग जीरो माइल से मरंगा के बीच बायपास रोड और पूर्णिया सिटी से कसबा के बीच सड़क के किनारे लगे कई पेड़ भी गिर गये। उधर, इस आंधी-पानी से खेती किसानी पर भी असर पड़ा. इस बारिश के कारण एक तरफ गर्मा धान तो दूसरी तरफ दलहनी फसलों में मूंग को काफी नुकसान हुआ।
गुलाबबाग में कई गोदामों के छप्पर उड़ गए हैं भारी नुकसान हुआ है। आंधी और बारिश के दौरान सोमवार की रात गुलाबबाग के इलाके में कई गोदामों के छप्पर उड़ गये। हवा की रफ्तार इतनी तेज थी कि बांस और टीन के बने मकान व गोदामों को काफी नुकसान पहुंचा। इस दौरा कई झोंपड़ियां भी धराशायी हो गईं।
तेज हवा और बारिश का झोंका इतना तेज था कि घरों में सोये हुए लोगो की नींद उड़ गई और बच्चे डरे सहमे दुबके रहे। गुलाबबाग स्थित शास्त्री नगर के जितेंद्र गुप्ता के नवनिर्मित छत की दीवार चटक कर गिर गयी जबकि बागेश्वरी में पाट गोदाम, सिसोवाड़ी,दमका , अब्दुल्लानगर के इलाकों में दो दर्जन से अधिक टीना से बने शेड एवं घरों के छप्पर उड़ गये। मंगलवार की सुबह लोगों को मजदूरों की किल्लत भी झेलनी पड़ी। नतीजतन, लोगों ने किसी तरह प्लास्टिक तिरपाल से काम निकाला।

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