अथ श्री कलयुगे प्याज पुराण कथा

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देवेंद्र गौतम

प्याज की कीमतों को लेकर हाहाकार मचा हुआ है। लेकिन इसके संकेत को समझने की कोशिश नहीं हो रही है। दरअसल यह तामसी भोजन त्यागने और सात्विक भोजन अपनाने की प्रेरणा दे रहा है। वैष्णव धर्म अपनाने की प्रेरणा दे रहा है। अपनी संस्कृति की ओर वापस लौटने की प्रेरणा दे रहा है।

प्याज संकट का सीधा कारण यह है कि हमारी सरकार ने कोई खाद्य नीति नहीं बनाई है। उसने देशवासियों के किचेन तक को तो प्रभावित किया लेकिन भोजन के प्लेट पर ध्यान नहीं दिया। सरकार ने सिर्फ गोमांस पर प्रतिबंध लगाया। भैंस, मुर्गे और बकरे के मांस पर नहीं। प्याज और लहसुन की सबसे ज्यादा खपत मांसाहार में होती है। सरकार पूरी तरह मांसाहार पर प्रतिबंध लगा दे और शाकाहार को प्रोत्साहित करे तो इसके बेहतर नतीजे आएंगे। प्याज संकट ने इसके लिए अनुकूल माहौल बना दिया है। सरकार भारत में सिर्फ वैष्णवी भोजन को कानूनन वैध कर दे तो तो प्याज चाहे हजार रुपये किलो हो जाए क्या फर्क पड़ता है।

प्याज खाने पर प्रतिबंध हो, उगाने पर नहीं। किसान प्याज उगाएं और नेफेड उसे अंतर्राष्ट्रीय बाजार की दरों के अनुरूप समर्थन मूल्य पर खरीद कर निर्यात कर दे। फिर देखिए किसानों की आय कैसे दुगनी-चौगुनी नहीं होती। सरकार को भी विदेशी मुद्रा का एक अच्छा स्रोत मिल जाएगा। सबसे बड़ी बात यह होगी कि तामसी भोजन करके विदेशियों की बुद्धि भ्रष्ट होगी। अपने देश के लोग सुरक्षित रहेंगे। भ्रष्ट बुद्धि होने पर कोई भी देश भारत के मुकाबले कभी खड़ा नहीं हो पाएंगा। अभीतक हम भ्रष्टन के भ्रष्ट हमारे की नीति चलती रही है। अब नहीं चलनी चाहिए। सरकार प्रचंड बहुमत में है वह आराम से ऐसा कर सकती है। तामसी भोजन की आदत को खत्म करना पूरी तरह राष्ट्रहित में है। प्याज की कीमतें तो पहले भी कई बार बढ़ चुकी हैं। लेकिन तब पाकिस्तान परस्त देशद्रोहियों की सरकारें थी। उन्होंने कीमतों पर काबू पाने के अकारण प्रयास किए। प्रयास तो वर्तमान राष्ट्रवादी सरकार भी कर रही है। तुर्की से उसका आयात किया जा रहा है। लेकिन इसकी कोई जरूरत ही नहीं। इस संकट का लोगों को तामसी भोजन की आदत से छुटकारा दिलाने के सुनहरे समय के रूप से इसका उपयोग किया जाना चाहिए। हमारी केंद्रीय वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने सदन को बताया है कि उनके परिवार में प्याज का उपयोग बहुत कम होता है इसलिए बढ़ती कीमतों से उन्हें फर्क नहीं पड़ता। उन्हें प्याज लहसुन का इस्तेमाल बिल्कुल बंद कर देना चाहिए। दूसरों को भी इसकी प्रेरणा देनी चाहिए। यदि मोदी जी, उनके मंत्रिमंडल के सहयोगी और उनके भक्तगण प्याज लहसुन छोड़ दें और देशवासियों को इसके लिए प्रेरित करें तो यह समस्या जड़ से ही खत्म हो जाएगी। फिर भी लोग न मानें तो प्याज लहसुन पर रोक के लिए नये मोटर व्हेकिल एक्ट की तरह सख्त कानून बना देने की जरूरत है। प्याज रखते या खाते पकड़े जाने पर इतना भारी जुर्माना तय हो कि लोग इसके बारे में सोचने से भी डरें।

भारत यदि प्याज, लहसुनमुक्त हो जाएगा तो इसके और भी लाभ बोनस में मिलेंगे। ऋषि मुनि कह गए हैं और शास्त्रों में भी लिखा है कि तामसी भोजन राक्षसी प्रवृतियों को जन्म देता है। अपराध बढ़ने का यह भी बड़ा कारण होता है। लोग सात्विक भोजन करेंगे तो अपराधिक प्रवृति का खात्मा होगा। आध्यात्मिक प्रवृति बढ़ेगी। लोग प्रभु के गुण गाएंगे। राम मंदिर बन ही रहा है। रामराज्य भी आ जाएगा।

प्याज और लहसुन का भारतवासियों को कैसे स्वाद लग गया यह भी एक शोध का विषय है। जरूर यह कोई विदेशी साजिश है जो किसी कालखंड में रची गई है। इस साजिश को निर्मूल किए जाने का यही सही समय है।

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