भोजपुरी उपन्यास गंगा रतन विदेसी के हिंदी संस्करण का लोकार्पण

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कोलकाता।आइपीएस अधिकारी मृत्युंजय कुमार सिंह के भारतीय ज्ञानपीठ द्वारा प्रकाशित भोजपुरी उपन्यास गंगा रतन विदेसी का हिंदी संस्करण प्रकाशित हो चुका है। उसका विधिवत लोकार्पण कोलकाता पुस्तक मेला में हुआ। उपन्यास का अनुवाद स्वयं मृत्युंजय कुमार सिंह ने किया है और ज्ञानपीठ प्रकाशन ने ही प्रकाशित किया है। यह उपन्यास एतिहासिक पृष्ठभूमि पर आधारित एक काल्पनिक कथा है। खासतौर पर गिरमिटिया मजदूरों की त्रासदी को रेखांकित किया गया है।

पुस्तकः विश्व की प्राचीनतम सभ्यता लेखकः पं. अनूप कुमार वाजपेयी,कई पुरस्कारों से पुरस्कृत समीक्षा प्रकाशन, दिल्ली, मुजफ्फरपुर, मूल्य-2000 रुपये लेखक ने राजमहल पहाड़ियों और चट्टानों पर संसार के प्राचीनतम आदिमानव के पदचिन्ह ढूंढ निकाले। पता-वाजपेयी निलयम, नया पारा, दुमका झारखंड

पुस्तकः विश्व की प्राचीनतम सभ्यता लेखकः पं. अनूप कुमार वाजपेयी,कई पुरस्कारों से पुरस्कृत समीक्षा प्रकाशन, दिल्ली, मुजफ्फरपुर, मूल्य-2000 रुपये लेखक ने राजमहल पहाड़ियों और चट्टानों पर संसार के प्राचीनतम आदिमानव के पदचिन्ह ढूंढ निकाले। पता-वाजपेयी निलयम, नया पारा, दुमका झारखंड

पुस्तक का लोकार्पण भारतीय भाषा परिषद के शंभुनाथ वरिष्ठ पत्रकार और लेखक गीतेश, दैनिक सन्मार्ग के संपादक हरिराम पांडेय, ब्रेथवेट एंड कंपनी के सीएमडी यतीश कुमार और दैनिक जागरण के स्थानीय संपादक जय कृष्ण वाजपेयी ने संयुक्त रूप से किया। कार्यक्रम का संचालन रंगकर्मी एवं नायिका कल्पना झा ने किया। इस मौके पर भारतीय ज्ञानपीठ के प्रतिनिधि उत्तम बनर्जी समेत मेले में जुटे साहित्यकार और साहित्य प्रेमी काफी संख्या में मौजूद थे।

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