क्या महाराष्ट्र के नुकसान की झारखंड में होगी भरपाई!

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-देवेंद्र गौतम

महाराष्ट्र में भाजपा की राजनीतिक सर्जिकल स्ट्राइक का जनाजा निकल गया। रात के अंधेरे में बनी फडणवीस सरकार दिन के उजाले में चारो खाने चित्त हो गई। एनसीपी के पारिवारिक विवाद का राजनीतिक लाभ उठाने का प्रयास उसके लिए भारी घाटे का सौदा साबित हुआ। जिस अजीत पवार पर भाजपा ने दांव खेला था उन्होंने शपथ ग्रहण तो कर लिया लेकिन विधायकों को तोड़ने में नाकाम रहे। अंततः इस्तीफा देकर चचा की शरम में वापस आ गए। उन्होंने बगावत की थी या चचा की रणनीति का हिस्सा थे, कहना कठिन है। कुल मिलाकर शरद पवार के चक्रव्यूह में मोदी मैजिक भी स्वाहा हो गया और अमित शाह की चाणक्य नीति भी हवा हो गई। भाजपा के विजय रथ का चक्का हरियाणा में कुछ बचा भी तो महाराष्ट्र में पूरी तरह पंक्चर हो गया। नेताओं का अहंकार मिट्टी में मिल गया और पार्टी की साख को गहरा धक्का लगा।

 

अब इस नुकसान की भरपाई झारखंड विधानसभा चुनाव में नहीं हुई तो यह सिलसिला अगले वर्ष बिहार और उसके बाद प. बंगाल में भी जारी रहेगा और मोदी सरकार के लिए 2024 का रण मुश्किल हो जाएगा। लिहाजा झारखंड में बेहतर प्रदर्शन करना मोदी-शाह की जोड़ी के लिए गंभीर चुनौती है। चुनाव की घोषणा के पूर्व तक भाजपा की जीत और मुख्यमंत्री रघुवर दास की सरकार की वापसी सुनिश्चित लग रही थी लेकिन भाजपा नेतृत्व अपने ही पैरों में कुल्हाड़ी मारता चला गया। पहली गलती सरयू राय का टिकट काटना रही। झारखंड की जनता को अभी तक इसका कोई संतोषजनक कारण नहीं समझ में आया। सरयू राय एक जुझारू नेता रहे हैं। उनपर किसी तरह का दाग़ नहीं है। वे भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ते रहे हैं। कांग्रेस पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाने वाली और पार्टी विथ डिफरेंस का दावा करने वाली भाजपा ने ऐसे नेता को टिकट से वंचित कर अपनी कथनी और करनी के भेद को उजागर कर दिया। इसका जनता के बीच इसका अच्छा संदेश नहीं गया। अब सरयू राय मुख्यमंत्री रघुवर दास के खिलाफ बाग़ी उम्मीदवार के रूप में खड़े हैं। उन्हें न सिर्फ जनता बल्कि विपक्ष की भी सहानुभूति मिल रही है। वे रघुवर दास को चुनाव हराएं न हराएं लेकिन उन्हें नाकों चने तो चबवा ही देंगे। इस प्रकरण का असर झारखंड की सभी 81 सीटों पर पड़ना तय है।

दूसरी गलती चुनावी अभियान का शंखनाद करने के दौरान केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह से हुई। उन्होंने झारखंड को नक्सल मुक्त करने का दावा कर दिया। इससे नक्सली भड़क उठे और अपनी मौजूदगी का अहसास दिलाने के लिए ताबड़तोड़ तीन हिंसक घटनाओं को अंजाम दे डाला। इसमें चार सुरक्षाकर्मी, एक भाजपा नेता शहीद हुए और दो जेसीबी मशीनें जला दी गईं। यह दावा यदि सीएम रघुवर दास ने भी किया होता तो चल जाता लेकिन केंद्रीय गृहमंत्री ऐसा हवाई दावा करें तो आग भड़केगी ही। अब नक्सली एक्शन मोड में आ चुके हैं। चुनाव के दौरान वे गड़बड़ी कर सकते हैं। इसमें संदेह नहीं कि पांच वर्षों के अंदर नक्सल समस्या नियंत्रित हुई है लेकिन झारखंड अभी नक्सलमुक्त नहीं हुआ है। प्रशासनिक रिपोर्ट बताती है कि राज्य के 18 जिले अभी भी नक्सल प्रभावित हैं। इसके बाद पीएम मोदी की दो जनसभाएं हुईं जिसमें वे अपना रटा-रटाया भाषण देकर चले गए। उनका मुख्य फोकस राम मंदिर और अनुच्छेद 370 पर रहा। झारखंड के लोगों के लिए यह मुद्दे ज्यादा अहमियत नहीं रखते। रोजी-रोजगार के सवाल पर लोग सुनना चाहते थे।

इसके बाद महाराष्ट्र का हाई वोल्टेज ड्रामा हुआ जिसमें भाजपा की भद्द पिट गई। इसके कारण झारखंड के अवाम के बीच भी उसके अजेय होने का भ्रम टूट गया। इधर विपक्षी महागठबंधन के हमले तेज़ हो गए। भाजपा कई सवालो का माकूल जवाब नहीं दे पा रही। दरअसल सरयू राय की बगावत के कारण सीएम रघुवर दास स्वयं सुरक्षात्मक स्थिति में आ चुके हैं। ऊपर से कांग्रेस ने उनके चुनाव क्षेत्र जमशेदपुर पूर्वी से प्रो. गौरव वल्लभ जैसे तेज़ तर्रार राष्ट्रीय प्रवक्ता को मैदान में उतार दिया है। उनके सवालों का संविद पात्रा जवाब नहीं दे पाते तो झारखंड के भाजपा नेता क्या चीज़ हैं।

ऐसे में भाजपा के लिए अनुकूल परिस्थितियां जटिल होती जा रही हैं। विपक्षी गठबंधन के अंदर नई जान आ गई है। ऐसे में भाजपा महाराष्ट्र के नुकसान की कहां तक भरपाई कर पाएगी, कहना कठिन है। इतना तय है कि झारखंड में अगर उसे विजय रथ का चक्का फंसा तो आगे का रास्ता बेहद मुश्किल हो जाएगा।    

   

पुस्तकः विश्व की प्राचीनतम सभ्यता लेखकः पं. अनूप कुमार वाजपेयी,कई पुरस्कारों से पुरस्कृत समीक्षा प्रकाशन, दिल्ली, मुजफ्फरपुर, मूल्य-2000 रुपये लेखक ने राजमहल पहाड़ियों और चट्टानों पर संसार के प्राचीनतम आदिमानव के पदचिन्ह ढूंढ निकाले। पता-वाजपेयी निलयम, नया पारा, दुमका झारखंड

पुस्तकः विश्व की प्राचीनतम सभ्यता लेखकः पं. अनूप कुमार वाजपेयी,कई पुरस्कारों से पुरस्कृत समीक्षा प्रकाशन, दिल्ली, मुजफ्फरपुर, मूल्य-2000 रुपये लेखक ने राजमहल पहाड़ियों और चट्टानों पर संसार के प्राचीनतम आदिमानव के पदचिन्ह ढूंढ निकाले। पता-वाजपेयी निलयम, नया पारा, दुमका झारखंड

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