केदारनाथ में तीर्थयात्रियों से मनमानी वसूली

आपदा में अवसर तलाश रहे व्यापारी

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केदारनाथ। उत्तराखंड में दो दिनों तक लगातार बारिश के कारण जान-माल का नुकसान तो हुआ है लेकिन व्यापारी वर्ग को आपदा में अवसर तलाशने का पूरा मौका मिल गया है। चारधाम यात्रा को निकले श्रद्धालुओं को मौसम की मार के साथ स्थानीय व्यापारियों के दोहन और प्रशासन की बेरुखी की मार झेलनी पड़ रही है। कभी ई-पास की बाध्यता के कारण उन्हें बैरंग लौटने को विवश होना पड़ रहा है तो अब प्राकृतिक आपदा के बीच कमरे के किराए से लेकर भोजन और टैक्सी के नाम पर मनमानी वसूली के मामले सामने आ रहे हैं।

पुस्तकः विश्व की प्राचीनतम सभ्यता लेखकः पं. अनूप कुमार वाजपेयी,कई पुरस्कारों से पुरस्कृत समीक्षा प्रकाशन, दिल्ली, मुजफ्फरपुर, मूल्य-2000 रुपये लेखक ने राजमहल पहाड़ियों और चट्टानों पर संसार के प्राचीनतम आदिमानव के पदचिन्ह ढूंढ निकाले। पता-वाजपेयी निलयम, नया पारा, दुमका झारखंड

पुस्तकः विश्व की प्राचीनतम सभ्यता लेखकः पं. अनूप कुमार वाजपेयी,कई पुरस्कारों से पुरस्कृत समीक्षा प्रकाशन, दिल्ली, मुजफ्फरपुर, मूल्य-2000 रुपये लेखक ने राजमहल पहाड़ियों और चट्टानों पर संसार के प्राचीनतम आदिमानव के पदचिन्ह ढूंढ निकाले। पता-वाजपेयी निलयम, नया पारा, दुमका झारखंड

श्रद्धालुओं से एक कमरे के 6 से 9 हजार रुपये तक वसूले गए। पानी की बोतल 200 रुपये, कोल्डड्रिंक 80 रुपये और हाफ प्लेट मैगी के 50 रुपये देने पड़े। यहां तक कि यात्रा के मुख्य पड़ाव सोनप्रयाग से गुप्तकाशी तक कई टैक्सी-मैक्सी चालकों द्वारा 250 से 300 रुपये प्रति व्यक्ति किराया लिया जा रहा है। इस संबंध में डीएम ने एआरटीओ को पहले भी कार्रवाई के निर्देश दिए थे। बाबा केदार के दर्शन कर लौटे एक यात्री ने बताया कि उनके परिवार के छह लोग यात्रा पर आए थे।

केदारनाथ में उनसे एक कमरे के 9 हजार रुपये लिए गए। टॉफी, पानी, बिस्कुट से लेकर नाश्ता व भोजन की जो कीमत वसूली जा रही है उससे आम यात्री का पानी पीना भी मुश्किल हो गया है।

खराब मौसम के कारण रविवार सुबह 11 बजे केदारनाथ यात्रा रोक दी गई थी। धाम से कई यात्रियों, जिन्होंने दर्शन कर लिए थे, उन्हें सोमवार व मंगलवार को गौरीकुंड, सोनप्रयाग भेज दिया गया था। सोमवार को जिला मुख्यालय में देर शाम तक बड़ी संख्या में यात्री पहुंच गए। उन्हें कमरों के लिए परेशानी झेलनी पड़ी। कई यात्रियों को खुले आसमान के नीचे रात काटनी पड़ी। एसडीएम सदर का कहना है कि यात्रियों के लिए सुमेरपुर, नगरासू, तिलवाड़ा व अगस्त्यमुनि के होटल में व्यवस्था की गई है। तेज बारिश में और भूस्खलन में यात्री जान हथेली पर लेकर वहां तक पहुंचे थे।

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