अपनी जिम्मेवारियों से कबतक भागते रहेंगे नीतीश कुमार

0 261

-देवेंद्र गौतम

पुस्तकः विश्व की प्राचीनतम सभ्यता लेखकः पं. अनूप कुमार वाजपेयी,कई पुरस्कारों से पुरस्कृत समीक्षा प्रकाशन, दिल्ली, मुजफ्फरपुर, मूल्य-2000 रुपये लेखक ने राजमहल पहाड़ियों और चट्टानों पर संसार के प्राचीनतम आदिमानव के पदचिन्ह ढूंढ निकाले। पता-वाजपेयी निलयम, नया पारा, दुमका झारखंड

पुस्तकः विश्व की प्राचीनतम सभ्यता लेखकः पं. अनूप कुमार वाजपेयी,कई पुरस्कारों से पुरस्कृत समीक्षा प्रकाशन, दिल्ली, मुजफ्फरपुर, मूल्य-2000 रुपये लेखक ने राजमहल पहाड़ियों और चट्टानों पर संसार के प्राचीनतम आदिमानव के पदचिन्ह ढूंढ निकाले। पता-वाजपेयी निलयम, नया पारा, दुमका झारखंड

राजस्थान के कोटा में फंसे छात्रों की वापसी को लेकर तीन राज्यों की सरकारों के मतभेद सामने आ रहे हैं। उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने अपने राज्य के 5 हजार छात्रों को वापस लाने के लिए 300 बसें भेज दी हैं। मध्य प्रदेश की सरकार भी अपने छात्रों के लिए बसें भेज रही है। लेकिन बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार इसे लॉकडाउन का उल्लंघन मानते हैं। उन्होंने बिहार के छात्रों को वापस बुलाने से तो इनकार किया ही है राजस्थान की अशोक गहलोत सरकार से यह आग्रह भी किया है कि इस मकसद से भेजे गए उत्तर प्रदेश की बसों का परमिट रद्द करें। वहां फंसे छात्रों के लिए वहीं व्यवस्था करें।

यह अंतर्विरोध 24 मार्च को लॉकडाउन की घोषणा होने के बाद भी उभरा था जब त्तर प्रदेश सरकार ने 1000 बसें भेजकर प्रवासी मजदूरों को वापस बुला लिया था। उस समय स्थिति ऐसी थी कि दिल्ली की केजरीवाल सरकार ने आनंद बिहार में जमा मजदूरों की भीड़ को डीटीसी की बसों पर बिठाकर दिल्ली यूपी बार्डर पर भेज दिया था जबकि इससे पहले हजारों मजदूर पैदल अपने घरों के लिए रवाना हो चुके थे। नीतीश कुमार का ऐसे समय बिहारी मजदूरों को वापस बुलाने से इनकार करना अपनी जिम्मेवारियों से भागने के समान था। उनकी वापसी की व्यवस्था होती तो दो दिनों में पूरी भीड़ छंट जाती। यह व्यवस्था नहीं होने के कारण दो सप्ताह तक हाइवे पर पैदल चलते मजदूरों का रेला लगा रहा। लॉकडाउन का ज्यादा उल्लंघन तो उनकी वापसी की समुचित व्यवस्था नहीं होने के कारण हुआ। फर्क सिर्फ यह पड़ा कि योगी सरकार ने खर्च की परवाह नहीं की जबकि नीतीश सरकार ने पैसे बचा लिए। उस समय तक कोरोना का संक्रमण बहुत ज्यादा नहीं फैला था। उन्हें वापस लाया जा सकता था। उत्तर प्रदेश और अन्य राज्यों ने अपने मजदूरों को वापस बुला लिया तो इससे कोरोना वायरस के नियंत्रण में कोई बाधा नहीं आई। वैसे भी भारत में कोरोना वायरस विमान पर बैठकर आया है। प्रवासी मजदूरों का वर्ग विदेश से आनेवाले अभिजात्य तबके के संपर्क में नहीं आ सकता था। उनके बीच बहुत बड़ी वर्गीय विभाजन रेखा पहले से मौजूद थी।

अब जहां तक कोटा के छात्रों का सवाल है। योगी सरकार ने तब भी साहसिक निर्णय लिया था अभी भी ले रहे हैं। यदि छात्रों को कोटा में परेशानी के हाल में पड़े रहने देने की जगह वापस लाकर उनकी पूरी जांच कराकर स्वस्थ होने की गारंटी के साथ उनके घरों पर पहुंचा दिया जाए तो घरवालों की चिंता भी दूर होगी और बच्चे भी स्वयं को सुरक्षित महसूस करेंगे। यूपी के बाद मध्य प्रदेश की सरकार भी अपने छात्रों को वापस लाने के लिए बसें भेज रही है। नीतीश कुमार को अपने निर्णय पर पुनर्विचार करना चाहिए। प्रवासी मजदूरों के संबंध में उन्होंने जो भूल की उसे छात्रों के मामले में दुहराने से बचना चाहिए।

 

Leave A Reply

Your email address will not be published.

%d bloggers like this: