विश्व स्वास्थ्य संगठन का चेयरमैन बनेगा भारत

22 मई को मिलेगा पदभार, चीन की उल्टी गिनती

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विश्व स्वास्थ्य संगठन के डायरेक्टर जनरल टेड्रोस एधानोम घेब्रेयसस संगठन के लिए अब चीन का बचाव करना मुश्किल हो जाएगा। 22 मई को जापान की जगह भारत विश्व स्वास्थ्य संगठन का अध्यक्ष बनने जा रहा है। भारत कोरोना के प्रसार के मामले में चीन की भूमिका की जांच के पक्ष में रहा है और वह सदस्य देशों की जांच की मांग को मंजूरी दे सकता है। अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, फ्रांस और जर्मनी कोरोना महामारी की सही जानकारी नहीं देने और इससे निपटने में चीन की अक्षमता को लेकर जांच की मांग करते रहे हैं। वर्ल्‍ड हेल्‍थ असेंबली में यूरोपियन यूनियन की ओर से यह प्रस्‍ताव पेश किया जाएगा। इसमें मांग की गई है कि कोविड-19 को लेकर विश्व स्वास्थ्य संगठन के नेतृत्‍व में इंटरनेशनल हेल्‍थ रेस्‍पांस की निष्‍पक्ष, स्‍वतंत्र और विस्‍तृत जांच हो।

पुस्तकः विश्व की प्राचीनतम सभ्यता लेखकः पं. अनूप कुमार वाजपेयी,कई पुरस्कारों से पुरस्कृत समीक्षा प्रकाशन, दिल्ली, मुजफ्फरपुर, मूल्य-2000 रुपये लेखक ने राजमहल पहाड़ियों और चट्टानों पर संसार के प्राचीनतम आदिमानव के पदचिन्ह ढूंढ निकाले। पता-वाजपेयी निलयम, नया पारा, दुमका झारखंड

पुस्तकः विश्व की प्राचीनतम सभ्यता लेखकः पं. अनूप कुमार वाजपेयी,कई पुरस्कारों से पुरस्कृत समीक्षा प्रकाशन, दिल्ली, मुजफ्फरपुर, मूल्य-2000 रुपये लेखक ने राजमहल पहाड़ियों और चट्टानों पर संसार के प्राचीनतम आदिमानव के पदचिन्ह ढूंढ निकाले। पता-वाजपेयी निलयम, नया पारा, दुमका झारखंड

चीन कोरोना के मामले में शर्मिंदा होने की जगह आक्रामक रुख अख्तियार किए हुए है। उसने दक्षिण चीन सागर पर जबरन कब्जे की मुहिम चला रखी है। परमाणु हथियार भी तैयार कर रहा है। दुनिया कोरोना से लड़ रही है और चीन तीसरे विश्वयुद्ध की तैयारी में लगा है। वह कोरोना के प्रसार में अपनी भूमिका की स्वतंत्र जांच से भी इनकार करता रहा है।

अब चीन इस वैश्विक संस्था में बुरी तरह से घिर रहा है। भारत के पास यह संयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तानी आतंकवादी मसूद अजहर के मामले में चीन के अडंगेबाजी का हिसाब चुकता करने का भी मौका होगा। पाकिस्तान के पक्ष में चीन ने मसूद अजहर को संयुक्त राष्ट्र से ग्लोबल आतंकी घोषित कराने में कई बार वीटो का इस्तेमाल कर चुका था। हर बार वह कोई न कोई नया बहाना बनाकर प्रस्ताव पर वीटो कर देता था। तकनीकी बाधाओं का जिक्र कर मसूद को ग्लोबल आतंकी घोषित होने से बचा लेता था।

2019  में जम्मू-कश्मीर के पुलवामा में सीआरपीएफ के जवानों के काफिले पर हुए आतंकी हमले में भी जैश सरगना का हाथ सामने आया था। इस हमले में सीआरपीएफ के 40 जवान शहीद हो गए थे। दुनियाभर में इस हमले की निंदा की गई थी। इस सबसे भयानक हमले के बाद भी चीन ने मसूद अजहर को ग्लोबल आतंकी घोषित करने के संयुक्त राष्ट्र के प्रस्ताव से बचा लिया था। लेकिन फिर भारत ने अपने कूटनीतिक प्रयासों में तेजी लाई और अमेरिका, ब्रिटेन और फ्रांस ने चीन पर दबाव बनाया।

अजहर मसूद को वैश्विक आतंकवादी घोषित करने की पिछले 10 साल में चार बार कोशिश हो चुकी थी। सबसे पहले 2009 में भारत ने प्रस्ताव रखा था। फिर 2016 में भारत ने अमेरिका, ब्रिटेन और फ्रांस के साथ मिलकर संयुक्त राष्ट्र की 1267 प्रतिबंध परिषद के समक्ष दूसरी बार प्रस्ताव रखा। इन्हीं देशों के समर्थन के साथ भारत ने 2017 में तीसरी बार यह प्रस्ताव रखा। इन सभी मौकों पर चीन ने वीटो का इस्तेमाल कर ऐसा होने से रोक दिया था। अमेरिका, ब्रिटेन और फ्रांस की ओर से जैश सरगना अजहर पर प्रतिबंध लगाने के प्रस्ताव पर चीन ने मार्च में भी वीटो लगा दिया था।

बाद में सुरक्षा परिषद के तीन  स्थायी देशों अमेरिका, फ्रांस और ब्रिटेन के अलावा अंतरराष्ट्रीय दबाव के आगे चीन को घुटने टेकने पर मजबूर होना पड़ा था और संयुक्त राष्ट्र ने मसूद अजहर को अंतरराष्ट्रीय आतंकी घोषित कर दिया था। सुरक्षा परिषद की प्रतिबंध समिति के तहत मसूद को ब्लैकलिस्ट करने के प्रस्ताव पर चीन कोई अडंगा नहीं लगा पाया था।

हाल ही में केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने कहा था कि कोरोना वायरस प्राकृतिक नहीं है। इसे प्रयोगशाला में बनाया गया है। भारत की कोरोना वायरस पर यह पहली आधिकारिक प्रतिक्रिया थी। भारत ने विश्व स्वास्थ्य संगठन में भी सुधार की मांग भी की थी।

194 सदस्यीय देशों वाले विश्व स्वास्थ्य संगठन का चेयरमैन बनने के बाद भारत के पास निर्णय लेने की ताकत होगी। संगठन के नियमों, फैसलों में भारत को निर्णय लेने का अधिकार होगा। डायरेक्टर जनरल को भी किसी प्रकार के फैसले के लिए चैयरमैन की सहमति लेनी होगी। भारत कोविड-19 महामारी पर एक जिम्मेदार और पारदर्शी जांच के पक्ष में रहा है। जाहिर है कि वह जांच की मांग पर सहमति व्यक्त करेगा।

अगर विश्व स्वास्थ्य संगठन के सदस्य देश कोरोना महामारी पर जांच के लिए चीन के खिलाफ इस वायरस की उत्पत्ति को लेकर जांच की मांग कर रहे हैं। दुनिया के तमाम देश यह जानने चाहते हैं कि क्या चीन ने शुरू में इस बीमारी के बारे में दुनिया को सच नहीं बताया? क्या उसने दुनिया को यह भी बताने में देर कर दी कि यह बीमारी एक से दूसरे मनुष्य में फैलती है? इसके कारण दुनिया के अन्य देश बचाव की तैयारी नहीं कर सके?

कोरोना महामारी पर विश्व स्वास्थ्य संगठन के डायरेक्टर जनरल टेड्रोस एधानोम घेब्रेयसस की भूमिका भी सवालों के घेरे में रही है। उन पर आरोप लगते रहे हैं कि वह तब तक मामले को हल्‍का बताते रहे जबतक कि कोरोना संक्रमण तमाम देशों में नहीं फैल गया। अमेरिका के राष्ट्रपति डोलाल्ड ट्रंप ने इसी कारण विश्व स्वास्थ्य संगठन को अमेरिका की आर्थिक मदद पर रोक लगा दी थी। दरअसल टेड्रोस एधानोम को डायरेक्टर जेनरल बनाने में चीन की अहम भूमिका रही है। इसी कारण उनका चीन के प्रति झुकाव रहा है। इसके कारण विश्व स्वास्थ्य संगठन की विश्वसनीयता भी संदिग्ध हो गई थी। अब उनके लिए चीन का बचाव करना कठिन होगा।

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