गोल्ड फील्ड मेडिकल कॉलेज विवाद में खट्टर सरकार बैक फुट पर

0 323

पलवल। पृथला विधानसभा के छांयसा ग्राम में गोल्ड फील्ड मेडिकल कॉलेज के कर्मचारियों के धरने से खट्टर सरकार दबाव में दिख रही है. प्राइवेट संस्था गोल्ड फील्ड मेडिकल कॉलेज को शासकीय संस्थान अटल बिहारी मेडिकल कॉलेज किये जाने के बाद से करीब एक हजार कर्मचारियों को एक झटके में निकाल दिया गया था, कोरोना काल की तकलीफ झेल रहे इन कर्मचारियों ने धरना देते हुए करीब एक महीना बिता दिया लेकिन प्रदेश की खट्टर सरकार ने अभी तक कोई संज्ञान नही लिया.

पुस्तकः विश्व की प्राचीनतम सभ्यता लेखकः पं. अनूप कुमार वाजपेयी,कई पुरस्कारों से पुरस्कृत समीक्षा प्रकाशन, दिल्ली, मुजफ्फरपुर, मूल्य-2000 रुपये लेखक ने राजमहल पहाड़ियों और चट्टानों पर संसार के प्राचीनतम आदिमानव के पदचिन्ह ढूंढ निकाले। पता-वाजपेयी निलयम, नया पारा, दुमका झारखंड

पुस्तकः विश्व की प्राचीनतम सभ्यता लेखकः पं. अनूप कुमार वाजपेयी,कई पुरस्कारों से पुरस्कृत समीक्षा प्रकाशन, दिल्ली, मुजफ्फरपुर, मूल्य-2000 रुपये लेखक ने राजमहल पहाड़ियों और चट्टानों पर संसार के प्राचीनतम आदिमानव के पदचिन्ह ढूंढ निकाले। पता-वाजपेयी निलयम, नया पारा, दुमका झारखंड

पिछले कुछ दिन पहले मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने गोल्ड फील्ड मेडिकल कॉलेज (अब अटल बिहारी मेडिकल कॉलेज) का दौरा किया था, लेकिन उनके आने के पहले ही धरने पर बैठे सभी 222 लोगों सहित क्षेत्र के कद्दावर कांग्रेस नेता राकेश तंवर को भी गिरफ्तार कर लिया गया था. सभी कर्मचारियों को राकेश तंवर सहित दिन भर खुले मैदान में बिठाया रखा गया और शाम को 25-25 हजार के मुचलके भरवाए गए. अब सवाल यह उठता है कि आखिर इन कर्मचारियों से खट्टर सरकार बचती हुई क्यों दिख रही है?

कर्मचारी क्या कहते हैं – नौकरी से निकाले गए इन कर्मचारियों का कहना है कि हमें बिना किसी नोटिस और जानकारी के नौकरी से निकाल दिया गया, हम सभी गोल्ड फील्ड मेडिकल कॉलेज के शुरू होने के टाइम से कार्यरत है, कॉलेज के प्राइवेट से सरकारी होने में हमारा कोई दोष नही है फिर हमें सजा क्यों दी गई? हम सब में एम्बुलेंस ड्राईवर, सफाई स्टाफ, सुरक्षाकर्मी सहित सभी विभागों के कर्मचारी शामिल है, हम सभी अपने काम में वर्षों से सेवा दे रहे हैं और स्किल्ड हैं, हमारे काम को लेकर आज तक कोई शिकायत नही रही तो फिर हमें किस आधार पर नौकरी से निकाला गया ?

कर्मचारियों का दावा

प्रदर्शन कर रहे कर्मचारी कहते हैं कि नलहड़ सरकारी अस्पताल नूह मेवात से नई भर्ती करके इन कर्मचारियों के स्थान पर नया स्टाफ लाया जा रहा है, जिनसे लाखों रूपए कि रिश्वत भी ली जा रही है. नलहड़ अस्पताल के अधिकारी हमारे अधिकार छीनकर भ्रष्टाचार कर रहे हैं, हम रोड़ पर बैठे हैं और हमारी नौकरी लाखों रुपयों में बेचीं जा रही है, हमारा परिवार रोटी को मोहताज हो गया और पैसो वाले हमारे बच्चों के हक़ का निवाला खरीद रहे हैं. इससे भी बड़ी तकलीफ ये है कि हमारे विधायक, सांसद और खुद मुख्यमंत्री इस अन्याय में शामिल हैं और अब हम अपनी लड़ाई संविधान कके आखरी पन्ने तक लड़ेगे.

सरकार का रुख –निकाले गए कर्मचारियों ने उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला ने कहा है कि यह प्रकरण मेरी जानकारी में नही है, पर मैं सरकार से बात करूँगा, यशपाल यादव, मूलचंद शर्मा, कृष्णपाल सिंह और विधायक पृथला सभी से मिल चुके हैं, पर कोई कार्यवाही नही हुई. गुलशन अरोड़ा एडिशनल डायरेक्टर अटल बिहारी मेडिकल कॉलेज, पवन कुमार गोयल डायरेक्टर अटल बिहारी मेडिकल कॉलेज आदि से गुहार लगाने पर भी कोई कार्यवाही नही हुई, इससे ज़ाहिर होता है कि सरकार की मंशा इन कर्मचारियों को वापिस लेने की नही है.

राकेश तंवर के जुड़ने से क्या फर्क पड़ा

लगभग एक महीने से धरने पर बैठे सेकड़ों कर्मचारियों की तरफ से हर कोशिश करने के बाद जब कोई नतीजा नही निकला, तब पृथला से कांग्रेस नेता जो अखिल भारतीय असंगठित श्रमिक कांग्रेस के हरियाणा प्रदेश अध्यक्ष राकेश तंवर से मुलाकात की तो उन्हौने न केवल कर्मचारियों की समस्या सुनी बल्कि मुलाकात के अगले ही दिन धरने में शामिल भी हो गए और उनके आते ही धरने को बड़ा रूप मिल गया. चूँकि राकेश तंवर पृथला क्षेत्र के बड़े नेता है, कांग्रेस की राजनीति के मजबूत पीलर कहे जाने वाले नेता ने कई बार हाईवे जाम करके क्षेत्रिय समस्याओं को लेकर सरकार से दो दो हाथ किये हैं, किसान आन्दोलन में भी बड़ी भूमिका निभाने वाले राकेश तंवर ने पहले ही दिन इन कर्मचारियों को वचन देते हुए कहा कि हरियाणा असंगठित कांग्रेस आपको आपकी नौकरी दिला कर रहेगी और जब तक आपकी जीत नही होती खट्टर सरकार की नाक में दम करके रखेंगे. चूँकि राकेश तंवर इसी तेवर के नेता है इसलिए सरकार भी उनके बयान को गंभीरता से ले रही होगी.

अब क्या

मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने 24 घंटे में मेडिकल कॉलेज शुरू करने की घोषणा की थी जिसकी धज्जियाँ उड़े हुए भी 3 दिन हो गए, सरकार अपनी ही संस्था को अपने ही हाथों में अपने ही दिए समय में शुरू नही कर पा रही तो सरकार की कार्यकुशलता और जिम्मेदारी पर बड़ा प्रश्नचिन्ह लग गया है. चूँकि खट्टर सरकार पहले किसान आन्दोलन और फिर कोरोना को लेकर ढीले रवैये के कारण कटघरे में खडी थी अब क्षेत्र के लोगों की लगी लगाईं नौकरी छीन लेने के मुद्दे पर गोल्ड फील्ड के कर्मचारियों के साथ राकेश तंवर के आने से सरकार दबाव में दिख रही है. इस नजरिये से देखे तो कोरोना महामारी, फिर बेरोजगारी के कारण कांग्रेस पार्टी भी कर्मचारियों के पक्ष में उतरती दिख रही है, जल्दी ही सैलजा कुमारी इस मुद्दे पर कोई बड़ा दाव खेल सकती हैं और चारों तरफ से घिरी हुई खट्टर सरकार को बड़ा झटका दे सकती हैं. लेकिन फ़िलहाल खट्टर सरकार का रुझान कम से कम कर्मचारियों के लिए सकारात्मक नही दिख रहा.

Leave A Reply

Your email address will not be published.

%d bloggers like this: