इतिहास पर नई रौशनी डालती पुस्तक विश्व की प्राचीनतम सभ्यता

गहन शोध के बाद इतिहासकार प. अनुप कुमार बाजपेयी ने किए हैं नए खुलासे

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समीक्षा प्रकाशन, दिल्ली/मुजफ्फरपुर से प्रकाशित पं. अनूप कुमार बाजपेयी की यह पुस्तक गंभीर शोध के बाद लिखी गई है। श्री बाजपेयी ने इस पुस्तक में तथ्यों और तर्कों के आधार पर यह साबित कर दिया है कि विश्व की प्राचीनतम सभ्यता झारखंड की राजमहल मपाड़ियों के आसपास विकसित हुई थी और उसके अवशेष अभी तक मौजूद हैं। इतिहास और पुरातत्व में दिलचस्पी रखने वाले हर व्यक्ति के लिए यह एक अनिवार्य पुस्तक हो सकती है। इसके एक-एक अध्याय पर मनन करने की आवश्यकता है। यह पुस्तक मानव सभ्यता के विकास की अबतक की तमाम अवधारमाओं पर प्रश्न चिन्ह खड़ा करती है।

पुस्तकः विश्व की प्राचीनतम सभ्यता लेखकः पं. अनूप कुमार वाजपेयी,कई पुरस्कारों से पुरस्कृत समीक्षा प्रकाशन, दिल्ली, मुजफ्फरपुर, मूल्य-2000 रुपये लेखक ने राजमहल पहाड़ियों और चट्टानों पर संसार के प्राचीनतम आदिमानव के पदचिन्ह ढूंढ निकाले। पता-वाजपेयी निलयम, नया पारा, दुमका झारखंड

पुस्तकः विश्व की प्राचीनतम सभ्यता लेखकः पं. अनूप कुमार वाजपेयी,कई पुरस्कारों से पुरस्कृत समीक्षा प्रकाशन, दिल्ली, मुजफ्फरपुर, मूल्य-2000 रुपये लेखक ने राजमहल पहाड़ियों और चट्टानों पर संसार के प्राचीनतम आदिमानव के पदचिन्ह ढूंढ निकाले। पता-वाजपेयी निलयम, नया पारा, दुमका झारखंड

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