प. बंगाल में शह और मात का खेल

हिंदूवाद बनाम बंगाली अस्मिता की जंग

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-देवेंद्र गौतम

पुस्तकः विश्व की प्राचीनतम सभ्यता लेखकः पं. अनूप कुमार वाजपेयी,कई पुरस्कारों से पुरस्कृत समीक्षा प्रकाशन, दिल्ली, मुजफ्फरपुर, मूल्य-2000 रुपये लेखक ने राजमहल पहाड़ियों और चट्टानों पर संसार के प्राचीनतम आदिमानव के पदचिन्ह ढूंढ निकाले। पता-वाजपेयी निलयम, नया पारा, दुमका झारखंड

पुस्तकः विश्व की प्राचीनतम सभ्यता लेखकः पं. अनूप कुमार वाजपेयी,कई पुरस्कारों से पुरस्कृत समीक्षा प्रकाशन, दिल्ली, मुजफ्फरपुर, मूल्य-2000 रुपये लेखक ने राजमहल पहाड़ियों और चट्टानों पर संसार के प्राचीनतम आदिमानव के पदचिन्ह ढूंढ निकाले। पता-वाजपेयी निलयम, नया पारा, दुमका झारखंड

नई दिल्ली। प. बंगाल में चुनाव की पूर्व बेला तृणमूल कांग्रेस और भाजपा के बीच की जंग हिंसक झड़पों से कानूनी जंग की तरफ बढ़ रही है। केंद्र का सत्ता पर काबिज होने के नाते भाजपा के पास सीबीआई, ईडी, इन्कम टैक्स आदि की शक्तियां हैं जबकि राज्य की तृणमूल सरकार के पास राज्य पुलिस और सीआइडी है। प. बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के इशारे पर भाजपा के कुछ नेताओं को ड्रग के मामले में लपेटा जा रहा है तो केंद्र सरकार ने कोयला घोटाले में सीएम की बहु को कटघरे में खड़ा कर दिया है। ममता बनर्जी के भतीजे सह सांसद अभिषेक बनर्जी की पत्नी रुजिरा बनर्जी से सीबीआई ने कोयला तस्करी के मामले में दो घंटे तक पूछताछ की है जबकि राज्य पुलिस ने कोकिन बरामदगी के मामले में भाजपा नेत्री पामेला गोस्वामी और राकेश सिंह को गिरफ्तार कर लिया है। यह इस मामले में दूसरी गिरफ्तारी है। अभी और कई गिरफ्तारियां हो सकती हैं। वे अपराध में कितना शामिल अथवा कितना निर्दोष हैं यह सवाल महत्वपूर्ण नहीं है। महत्वपूर्ण यह है कि इन मामलों को इस समय उठाने का मतलब है चुनाव को प्रभावित करने की राजनीतिक कोशिश। कोयला तस्करी का और मनी लाउंडरिंग का मामला 2014 से ही चल रहा है। सीबीआई के हाथ पहले भी रुजिरा बनर्जी की गर्दन तक पहुंच सकते थे। लेकिन राजनीतिक लाभ उठाने के लिए सही समय का इंतजार किया जाता रहा।

भाजपा युवा मोर्चा की पर्यवेक्षक और हुगली जिले की संगठन महासचिव पामेला गोस्वामी और उनके मित्र प्रोबिर कुमार डे को कुछ ही दिन पहले 100 ग्राम कोकिन के साथ गिरफ्तार किया गया था जिसकी कीमत लाखों में थी। उनकी निशानदेही पर राकेश सिंह हिरासत में लिए गए। अगर ये लोग ड्रग सेवन अथवा तस्करी में लिप्त रहे भी होंगे तो निश्चित रूप से यह काम विधानसभा चुनाव के समय नहीं शुरू किया होगा।  प. बंगाल की तेज़ तर्रार पुलिस की नज़र से वे छुपे नहीं होंगे।

ममता बनर्जी की बहु रुजिरा बनर्जी दोषी हैं अथवा नहीं यह अनुसंधान और न्यायिक सुनवाई का मामला है लेकिन इसमें संदेह नहीं कि उन्होंने न छुपने की कोशिश की न भागने की। सीबीआई की जांच टीम को पूरा सहयोग दिया और बाजाप्ता बताया कि घर पर कब उपलब्ध रहेंगी। पूछताछ के लिए समय दिया लेकिन भाजपा नेता राकेश सिंह दिल्ली जाने की बात कहकर फरार होने का प्रयास कर रहे थे। बंगाल पुलिस ने फोन लोकेशन के आधार पर उन्हें धर दबोचा। इससे पूर्व जब पुलिस उनके घर तलाशी के लिए गई थी तो उनके दो बेटों ने पुलिस को रोकने की कोशिश की पुलिस ने उन्हें हिरासत में लिया था। बहरहाल ये मामले चुनाव के समय खुलने के कारण आपराधिक कम राजनीतिक ज्यादा दिखाई दे रहे हैं।

ममता बनर्जी को सत्ता से बेदखल कर भाजपा की सरकार बनाने के लिए भाजपा के रणनीतिकार केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह और पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा समेत तमाम बड़े नेताओं ने अपनी पूरी ताकत झोंक रखी है। ममता बनर्जी के खिलाफ भरपूर कीचड़ उछाला गया। उन्हें हिंदू विरोधी के रूप में चित्रित करने में कोई कोर कसर बाकी नहीं रखी गई। राज्य के भगवाकरण की पूरी कोशिश की गई। दोनों तरफ से हिंसक झड़पों और राजनीतिक हत्याओं का सिलसिला चलता रहा। एक समय तो ऐसा लगा कि पूरी तृणमूल टूट जाएगी और ममता बनर्जी उसमें अकेली रह जाएंगी। लेकिन ममता बनर्जी ने पार्टी की टूट को रोक लिया और भाजपा को हर मोर्चे पर करारा जवाब दिया। उन्होंने भाजपा के हिंदूवाद के जवाब मे बंगाली अस्मिता की लहर पैदा कर दी हैं। चुनाव पूर्व सर्वेक्षण के नतीज़े भी यही बताते हैं कि मुख्यमंत्री के रूप में ममता बनर्जी ही जनता की पहली पसंद हैं और भाजपा चाहे जितना जोर लगा ले रहेगी दूसरे स्थान पर ही। सत्ता पर कब्जा मुश्किल है। अमित शाह के 200 से अधिक सीटों पर जीत के दावे पूरे होने की संभावना कम दिखाई पड़ रही है।

 

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