परेशां बहुत है क़लम का सिपाही

2 अक्तूबर 2020 को आयोजित ऑनलाइन तरही मुशायरा की रुदाद

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बज़्मे-हफ़ीज़ बनारसी पटना के तत्वावधान में आयोजित तरही मुशायरा में पटना के अलावा बिहार से भागलपुर, जमुई, रोहतास, झारखण्ड से रांची – हज़ारीबाग और विभिन्न महानगरों यथा मुम्बई, कोलकाता ,दिल्ली, तथा लुधियाना, भटिंडा (पंजाब), राउरकेला (ओड़ीसा), भिलाई (छतीसगढ़) के 25 से ज़ियादा महिला(8) और पुरुष ग़ज़लकारों ने अपनी ग़ज़लें पेश कीं| ऑनलाइन मुशायरा आकर्षक और शानदार रहा | मुशायरे की एक झलक के तौर पर पेश है नुमाइंदा शाइरों के नुमाइंदा अशआर :

मुशायरा का आगाज़ शाम 7 बजे आराधना प्रसाद,पटना ने सरस्वती वंदना से किया |
उन्होंने अपनी ग़ज़ल पेश करते हुए युद्ध जैसे हालात में चीन और पाकिस्तान की सरह्दों पर लड़ते हुए जवानों की हौसला अफ़जाई की बात कही :
दुआ उसके हक़ में तो बनती है लोगों
जो सरहद पे लड़ता है अदना सिपाही

इक़बाल दानिश, तेलारी, रोहतास को फ़िक्र है कि वे कैसे ख़ुद को बेगुनाह साबित करें :

मेरी बात मुंसिफ भी सुनता नहीं अब
भला कैसे साबित करूँ बेगुनाही

भटिंडा ,पंजाब से करन कटारिया प्रशासन पर तंज कसते हुए कहते हैं :

न पोछे गए, मुफ़लिसों के जो आँसू,
तो किस काम आई तेरी बादशाही।

दिल्ली से फौज़ के एक जवान कलियुगी घनश्याम जवानों के हौसलों की बात करते हैं:

वतन के हसीं राह के हम सिपाही।
ये वर्दी हमारी वफ़ा की गवाही।

चले हम जिधर से उधर साफ मैदाँ,
जिधर देखिए दुश्मनों की तबाही।

पत्रकारिता से जुड़े पटना के कुमार पंकजेश ने यह शे’र पढ़ा :

ख़मोशी उजालों की कहने लगी है
बग़ावत पे उतरी है अब ये सियाही

डॉ नूतन सिंह ,जमुई को लोकतंत्र में आम अवाम के लिए कोई परिवर्तन दिखाई नहीं देता :

सिवा तर्ज़ के और कुछ भी न बदला,
अभी भी है क़ायम यहाँ बादशाही।

मुंबई में सेवारत भोजपुर के शाइर प्रेम रंजन अनिमेष रोमांस से लबरेज़ दीखते हैं :

यूँ ही रख दिये होंठ होंठों पर उसके
न मैंने कहा कुछ न उसने सुना ही

पूनम सिन्हा श्रेयसी, पटना प्रेम में बर्बादी की कहानी बयान करती है :

मुहब्बत मिरी दे रही है गवाही।
हुई है अभी तक गज़ब की तबाही।।

डॉ फ़रहत हुसैन ‘ख़ुशदिल’, हजारीबाग, झारखंड कहते है :

‘नज़र और कुछ दे रही है गवाही’
मेरे दिल के अंदर से आवाज़ आई

बज़्मे-हफ़ीज़ बनारसी के चेयरपर्सन और पटना में कई साल तक एडीएम लॉ एंड आर्डर रहे रमेश कँवल बॉलीवुड के ड्रग में फंसे लोगों, किसानों की आड़ में राजनीति करनेवालों और बड़े लोगों के बड़प्पन की बहुत सुन्दर चर्चा करते है :

गुनाहों की मस्ती में हलचल मची है
ये ड्रग क्या पता लाए कितनी तबाही

बड़े लोग झुकते हैं मिलने की ख़ातिर
भरे है गिलासों को जैसे सुराही

‘कँवल’ इन दिनों फ़िक्रे दहकाँ में गुम हैं
दलालों में है खौफे-ज़िल्ले इलाही

राजकांता राज, पटना ने मुहब्बत में नज़र का कमाल बताया :

मुहब्बत में जब दी नज़र ने गवाही
वफ़ा की डगर पर चला दिल का राही

राजेश कुमारी राज, मुंबई ने गवाहों की बेबसी का ज़िक्र करते हुए कहा :

तुम्हारी अदालत,तुम्हारा है मुंसिफ़,
कहाँ अब चलेगी ये हर्फ़-ए-गवाही।

सागर सियालकोटी , साहिर लुधियानवी के शहर लुधियाना पंजाब से अदालत की असलियत और शरीफों की मज़बूरी का बयाँ कुछ इस तरह करते हैं :

अदालत सबूतों पे मबनी है ‘सागर’ (मबनी -आश्रित)
वो साबित नहीं कर सका बेगुनाही

प्रो. (डॉ) सुधा सिन्हा’ सावी’, पटना अपना सपर्पण बयाँ करती हैं

सजन मैं हमेशा रहूंगी तुम्हारी
जमाना करे चाहे कितनी मनाही

फतुहा के उच्च विद्यालय में अध्यापनरत कुमारी स्मृति कुमकुम सुशांत कुमार राजपूत को यादों के आकाश में निहारती हैं :

फरेबी जहाँ ,मतलबी यार सारे,
कि फंदे से लटकी गले की सुराही।

पटना सिटी के घनश्याम जी
दीर्घ काल तक अदालतों में इन्साफ के लिए चक्कर लग़ाते रहने से जनमानस में शासन-प्रशासन का धूमिल और भयावह चेहरा दिखाते हैं :

अदालत में इंसाफ होने से पहले
निपट लेते हैं खुद दरोग़ा – सिपाही

वे कोरोना से बचाव के लिए बिना मास्क घर से बाहर निकलने की मनाही को बुलंदी से आवाज़ देते हैं :

बिना मास्क पहने हुए मत निकलना
सभी शख्स पर है ये लागू मनाही

वे भोजपुरी भाषा से अपना प्यार छुपा नहीं पाते हैं :

यहां भोजपुर की जुबां गूंजती है
हो आरा या बक्सर या बिहिया-बनाही

प्रणय कुमार सिन्हा ने मिसरा-ए-तरह को ही मतला बना दिया :

नज़र और कुछ दे रही है गवाही
मगर दिल के अंदर मची है तबाही

शुभ चन्द्र सिन्हा ने

नशे में भुलायी न जाये कभी भी
ख़याले – बदन , रात की बादशाही

शे’र सुना कर खूब वाह वाही लुटी

डॉ अन्नपूर्णा श्रीवास्तव ने शिकवा का लहजा अख्तियार किया

रहे रात दिन आप से दूर जब हम
वफ़ा आप ने हम से कैसी निबाही

ग़ज़ल के हुस्न से मुतास्सिर होकर शे’रो-सुखन की दुनिया के सैर पर निकले अवसर साहित्य मंच के संयोजक सिद्धेश्वर जी की परेशानी का अंदाज़ा लगाइए :

ग़ज़ल- गीत को अपनी सांसों में भरकर
परेशां बहुत है क़लम का सिपाही

चैतन्य चंदन विभिन्न महानगरों में उन नौजवानों को जिनकी नोकरी कोरोना काल में छूट गयी है दिलासा देते हुए कहते हैं :

गई नौकरी तो भी ग़म क्या है “चंदन”
उठा लूंगा करछी, भगोना, कड़ाही

अब नेट की लुक्का-छिप्पी का खेल देखिये |

श्री अनिल कुमार सिंह (डी आई जी पुलिस से.नि.) को अपनी ग़ज़ल मोबाइल पर तरन्नुम में पढने का लुत्फ़ उठाना पड़ा :

न तर्क ए सुखन हो कभी भी हमारा
भले बंद कर दो मियाँ आवाजाही

डॉ कृष्ण कुमार प्रजापति, राउरकेला (ओड़ीसा) में होटल व्यवसाय में क़िस्मत आजमा रहे हस्सास शाइर ऑनलाइन शिरकत नहीं कर सके लेकिन उन्होंने आज के समाज की सच्चाई उजागर करते हुए अपनी व्यथा भेजी गयी ग़ज़ल में अभिव्यक्त की :

ग़लत लोगों का साफ़ रहता है दामन
शरीफ़ों पे ही फेंकते हैं सियाही

बहुत रो रहे हैं जो करते हैं मेहनत
बहुत ख़ुश हैं जो कर रहे हैं उगाही

दिल्ली के घुमक्कड़ पत्रकार देवेन्द्र गौतम को जब नेट मिला तो वक़्त गुज़र गया था | उनकी निराशा देखिये :

न फूलों की ख़ुशबू बची है सलामत
न गुलशन में बाकी है ताज़ा हवा ही

नसर आलम नसर ,पटना ने ऑनलाइन ज्वाइन तो किया लेकिन नेट के जाल में फंसे रह गए |
उन्होंने विडियो भेजकर मुहब्बत में सिर्फ तबाही का ही एहसास करने का ज़िक्र कर डाला :

मोहब्बत से दिल कांपता है हमारा
सुना है मोहब्बत में है बस तबाही

एकराम हुसैन शाद , भागलपुर ने फ़ोन कर के माज़रत चाही | उनकी भेजी गयी ग़ज़लों के आईने में उनके मिज़ाज का तसव्वुर कीजिये :

बिहार की शराबबंदी की कामयाबी के पीछे के राज़ का बयान करते हुए एक रोमांटिक शे’र सुनिए :

निग़ाहों से पीने का अपना मज़ा है
नहीं चाहिए जाम-ओ-मीना सुराही

लेकिन वे चोर-गुंडों की उत्पात पर भी चुप नहीं बैठे :

अजब हौसला भी हुकूमत ने बख़्शी
डरे चोर गुंडों से ख़ुद अब सिपाही

डॉ मेहता नगेन्द्र, विख्यात पर्यावरणविद अपने प्रकृति प्रेम के लिए देश में मशहूर है | उनके एक एक शे’र ने यथोचित प्रशंसा के फूल समेटे लेकिन तकनीकी कौशल के अभाव में उनकी छवि दिखी लेकिन हम ध्वनि का ओज नहीं प्राप्त कर सके |
पेश है पर्यावरण पर उनके 4 अशआर :

★ नहीं कर सकेगा प्रदूषण तबाही
शज़र हैं हमारे हितैषी सिपाही

★ शज़र की बदौलत नगर है सुरक्षित
शज़र हैं तो है मौज में बादशाही

★ प्रदूषित हवा का असर भी बुरा है
भरी ज़हर से है सेहत की सुराही

★ खड़ा हर तरफ़ ज़हर का है हिमालय
उसे ढाहने में ही है वाहवाही

ग़ाज़ियाबाद के 80 वर्षीय नौजवान शाइर
डॉ ब्रम्ह्जीत गौतम ने पहले ही फ़ोन करके ऑनलाइन आने में अपनी असमर्थता ज़ाहिर कर दी |
कोरोना के प्रति वे काफ़ी चिंतित हैं :

नहीं जा रही ये वबा या इलाही
मचायी है हर ओर जिसने तबाही

उन्हें समाज में झूठ के परस्तारों की निर्लज्जता पर ऐतराज़ और अफ़सोस है:

अदालत में सच ‘जीत’ पायेगा कैसे
सभी झूठ की दे रहे हैं गवाही

बज़्मे-हफ़ीज़ बनारसी, पटना का ऑनलाइन तरही मुशायरा में 8-10 राज्यों के महिला और पुरुष ग़ज़लकारों ने शिरकत की | मुशायरा शानदार रहा |

‘नज़र और कुछ दे रही है गवाही’ शीर्षक से एक ग़ज़ल का संकलन प्रकाशित करने पर सहमति बनी |

रमेश कँवल चेयर पर्सन के दोस्त श्री सागर सियालकोटी, लुधियाना ने ऑनलाइन तरही मुशायरा में शिरकत करने वाले सभी ग़ज़लकारों का शुक्रिया अदा किया | और मुशायरा संपन्न हुआ |

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