यूपी में कांग्रेस की नाव पार लगाएंगी प्रियंका!

पीएल पुनिया ने की आधिकारिक घोषणा

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 भाजपा और सपा को देंगी चुनौती

पुस्तकः विश्व की प्राचीनतम सभ्यता लेखकः पं. अनूप कुमार वाजपेयी,कई पुरस्कारों से पुरस्कृत समीक्षा प्रकाशन, दिल्ली, मुजफ्फरपुर, मूल्य-2000 रुपये लेखक ने राजमहल पहाड़ियों और चट्टानों पर संसार के प्राचीनतम आदिमानव के पदचिन्ह ढूंढ निकाले। पता-वाजपेयी निलयम, नया पारा, दुमका झारखंड

पुस्तकः विश्व की प्राचीनतम सभ्यता लेखकः पं. अनूप कुमार वाजपेयी,कई पुरस्कारों से पुरस्कृत समीक्षा प्रकाशन, दिल्ली, मुजफ्फरपुर, मूल्य-2000 रुपये लेखक ने राजमहल पहाड़ियों और चट्टानों पर संसार के प्राचीनतम आदिमानव के पदचिन्ह ढूंढ निकाले। पता-वाजपेयी निलयम, नया पारा, दुमका झारखंड

त्रिकोणात्मक संघर्ष के आसार

नई दिल्ली। कुछ ही महीने बाद संभावित उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने प्रियंका गांधी वाड्रा को सीएम उम्मीदवार के रूप में उतारने का फैसला किया है। उनका मुकाबला सत्तारुढ़ भाजपा और सपा से होगा। कांग्रेस के 20 सदस्यीय चुनाव प्रचार अभियान समिति के नवनियुक्त प्रमुख पीएल पुनिया ने रविवार को यह एलान क‍िया। उन्‍होंने कहा क‍ि प्र‍ियंका अभी राज्य में सबसे लोकप्रिय राजनीतिक शख्सियत हैं।

आमतौर पर कांग्रेस मुख्यमंत्री पद के प्रत्याशी के नाम की घोषणा नहीं करती। उसके उम्मीदवारों का निर्णय भी अंतिम समय तक लंबित रहता है। लेकिन लंबे अंतराल के बाद उसने चुनाव की घोषणा से पूर्व अपने सीएम प्रत्याशी की घोषणा करने की रणनीति अपनाई है। प्रियंका गांधी ने 1919 के लोकसभा चुनाव में भी पूर्वी उत्तर प्रदेश की कमान संभाली थी। उनकी जनसभाओं में भीड़ भी उमड़ती थी लेकिन पीएम मोदी के करिश्मे के सामने वे कोई चमत्कार नहीं कर पाई थीं। फिर भी वे यूपी के मुद्दों पर मुखर हस्तक्षेप करती रही हैं। हाल में लखीमपुर-खीरी नरसंहार के बाद सरकारी तंत्र के प्रतिबंधों को धत्ता बताते हुए वे पीड़ित परिवारों से मिलने में सफल रही थीं। राज्य सरकार ने मामले में कार्रवाई तो चुनाव को देखते हुए की लेकिन इसका सीधा श्रेय प्रियंका को मिला। इसमें कोई संदेह नहीं कि कांग्रेस में अभी सबसे लोकप्रिय चेहरा प्रियंका का ही है। उनके अंदर परिस्थितियों से जूझने का साहस है। अच्छी वक्ता हैं। उनका चेहरा इंदिरा गांधी से मिलता-जुलता है। हालांकि उस पीढ़ी के कम ही लोग बचे हैं जिन्होंने इंदिरा गांधी के चमत्कारी नेतृत्व को देखा था। फिर भी उनके अंदर अपनी दादी की तरह जनता की नब्ज़ टटोलने की क्षमता है। कांग्रेस के अन्य किसी भी नेता के मुकाबले उनका व्यक्तित्व ज्यादा प्रभावशाली हैं। अभियान समिति के अध्यक्ष पुनिया का मानना है कि उत्तर प्रदेश में कांग्रेस का सीधा मुकाबला भाजपा से होगा। मगर यह एक चुनावी बयान मात्र है। ऐसा दावा करते समय वे सपा को पूरी तरह नज़र-अंदाज़ कर गए।

कांग्रेस नेता पुनिया का कहना है कि चाहे सोनभद्र की घटना हो, उन्नाव की घटना हो या हाथरस की प्रियंका गांधी ने न्याय के लिए लड़ाई लड़ी है। इसलिए अभी पूरा राज्य उनसे प्रभावित है।

 पुनिया का कहना है कि अन्य राज्यों से भी मांग रहती है कि प्रचार अभियान के लिए प्रियंका गांधी आएं और एक-दो सभाएं करें, लेकिन उत्तर प्रदेश में वह 24 घंटे उपलब्ध रहती हैं। उन्होंने कहा क‍ि प्रियंका गांधी ही हमारा एक चेहरा होंगी जिनके ईर्द-गिर्द पूरा चुनाव प्रचार अभियान चलेगा। उन्होंने यह भी कहा कि चुनावों में लखीमपुर खीरी घटना और किसानों के लिए न्याय महत्वपूर्ण मुद्दे होंगे। उन्होंने कहा कि जिस तरीके से किसानों को ‘कुचला गया’ वह निंदनीय घटना है। उन्होंने कहा क‍ि इससे घटिया बात क्या होगी कि जो लोग सत्ता में हैं उन्होंने दोषियों को संरक्षण दिया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि बिना सबूत के किसी को गिरफ्तार नहीं किया जाएगा, जो एक संकेत था कि केंद्रीय मंत्री के बेटे की गिरफ्तारी की मांग करना गलत है।

 

टूट चला है विपक्षी एकता का मिथक

 

भाजपा को पराजित करने के लिए 2014 के बाद के सभी चुनावों में विपक्षी दलों को एक मंच पर लाने के प्रयास हुए लेकिन सफलता नहीं मिली। उनके बीच की प्लेटफार्म बन गए। विपक्षी दलों में एकमात्र राष्ट्रीय दल कांग्रेस है। लेकिन अपने ढुलमुलेपन के कारण वह लगातार कमजोर होती गई है। क्षेत्रीय दल उसे ज्यादा महत्व नहीं देते। हालांकि उनके बीच से कोई राष्ट्रीय नेता नहीं उभर पाया। संभवतः यही कारण है कि तालमेल का प्रयास करने की जगह कांग्रेस ने सीधे मैदान में उतरने का फैसला किया है। यदि उत्तर प्रदेश में प्रियंका कोई चमत्कार दिखा पाईं तो संभव है 2024 के आम चुनाव में क्षेत्रीय दल कांग्रेस के ईर्द-गिर्द इकट्ठा हो जाएं। मौजूदा समय में विपक्षी एकता की कोई संभावना नहीं है। कांग्रेस अथवा क्षेत्रीय दलों के बीच से कोई ऐसा चेहरा नहीं उभरा जिसे उत्तर और दक्षिण भारत के सभी क्षत्रप एक साथ स्वीकार कर लें। उत्तर प्रदेश चुनाव के बाद संभव है राजनीतिक परिदृश्य में कुछ बदलाव आए।

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