अजीत पवारः न इधर के रहे न उधर के रहे

कहीं हीरो से जोकर न बन जाएं फडनवीस

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देवेंद्र गौतम

अजीत पवार ने अपने चाचा की पीठ पर छुरा तो घोंपा लेकिन यह भूल गए कि उनके हाथ में चाकू नहीं बच्चों का खिलौना है जो प्लास्टिक का बना है और हमला करने पर अपनी ही मूठ के अंदर समा जाता है। जिन विधायकों के भरोसे उन्होंने भाजपा के साथ पावर गेम खेला था उन्होंने साथ छोड़ दिया। अब वे एनसीपी का विश्वास खो बैठे और भाजपा के भी किसी काम के नहीं रहे। उन्होंने एनसीपी में टूट का भरोसा दिलाकर देवेंद्र फडनवीस के साथ शपथ ग्रहण तो कर लिया लेकिन जब ज़मीन खिसकती नज़र आई तो चारो खाने चित्त हो गए। फडनवीस की महत्वपूर्ण बैठक में उनकी कुर्सी खाली रह गई। अब फडनवीस को यह समझ लेना चाहिए कि भाजपा के नेता सोशल मीडिया में जितनी भी डींग हांकें उनके लिए बहुमत साबित करना लगभग असंभव हो गया है। अब ईश्वर भी कोई चमत्कार नहीं कर सकते। पाशा पलट चुका है। वे हीरो बनते-बनते जोकर बन गए हैं। उनके साथ पीएम मोदी और अमित शाह तक की साख को गहरा धक्का लग चुका है।

अजीत पवार की सत्तालोलुपता ने उन्हें न घर का रहने दिया न घाट का। बकौल एक पाकिस्तानी शायर-

जुनूं में उठे विश्व तक दौड़ आएं

मगर कद में पहले से कम हो गए.

 

उन्होंने अपने चाचा शरद पवार को कमतर आंक लिया। इसके कारण वे एनसीपी में दूसरा स्थान खो बैठे। गलत रास्ते पर चलने वाला हमेशा कोई न कोई भूल कर बैठता है। अजीत पवार भी सत्ताप्राप्ति के मद में बड़ी भूल कर बैठे। उन्होंने विधायक दल के नेता के रूप में अपने चयन का पत्र राज्यपाल को तो दिया लेकिन विधानसभा अध्यक्ष को देना भूल गए। इस बीच एनसीपी विधायकों ने उन्हें नेता पद से हटाकर जयंत पाटिल को विधायक दल का नेता बना दिया। यह पत्र विधानसभा में पहुंच गए। अब दिल्ली लाल डंडा पटके विधानसभा अध्यक्ष अजीत पवार को व्हिप का अधिकार नहीं दे सकते। भाजपा के गेम प्लान का यही एक ट्रंप कार्ड था। अजीत पवार अब यदि अपने दोगलेपन पर अड़े रहते हैं तो यह उनके राजनीतिक जीवन के अंत का सूचक होगा। उनका अस्तित्व शरद पवार की छत्रछाया पर कायम है। उनके पास न जनाधार है न समर्थन। ऐसे में वे भाजपा में चले भर गए तो उन्हें कौन भाव देगाष जयंत पाटिल को व्हिप का अधिकार मिल गया तो विश्वास मत के खिलाफ वोट देना उनकी मजबूरी हो जाएगी। चाचा ने दल-बदल का मामला चला दिया तो उप मुख्यमंत्री का पद तो गया ही विधायकी भी हाथ से निकल जाएगी। अब हार्स ट्रेडिंग की भी कोई गुंजाइश नहीं बची है। कांग्रेस, एनसीपी और शिवसेना ने विधायकों का परेड कराकर देशवासियों को यह संदेश दे दिया है कि बहुमत उनके साथ है। सुप्रीम कोर्ट ने भी प्रोटेम स्पीकर बहाल कर बुधवार की शाम तक फ्लोर टेस्ट का आदेश दे दिया है। अब यदि राज्यपाल या दिल्ली दरबार सत्ता लोलुपता में संविधान के साथ खिलवाड़ जारी रखता है तो देशवासियों की नज़रों से पूरी तरह गिर जाएंगे।

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