मोदी की लुटिया डुबोकर ही मानेंगे मोटाभाई

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  • देवेंद्र गौतम
    आज पूरे देश में नागरिकता कानून को लेकर बवाल मचा हुआ है। लोग सड़कों पर हैं। इस माहौल को तैयार करने में सिर्फ अमित शाह की भूमिका है। एक समुदाय विशेष को घुसपैठियों को खदेड़ना उनका पुराना लक्ष्य रहा है। मोदी ने घुसपैठ पर चिंता जताई लेकिन भारत के लोगों की नागरिकता पर कभी सवाल नहीं खड़ा किया। उन्होंने हमेशा जन भावनाओं का आदर किया। भारत में शरणार्थियों को नागरिकता प्रदान करने का प्रावधान पहले से मौजूद है। कइयों को दिया जा चुका है। उसमें पाकिस्तानी मुस्लिम भी शामिल हैं। लेकिन न इसपर कभी शोर हुआ न हंगामा। समस्या यह है कि यदि अमित शाह नया कानून नहीं बनाते तो इतिहास में उनका नाम कैसे दर्ज होता। इसका श्रेय पूर्व सरकारों के बनाए कानूनों को मिल जाता। बांग्लादेश तो भारत में रह रहे अपने नागरिकों को वापस लेने को तैयार है। लेकिन भारत के पास ऐसी कोई सूची है ही नहीं। अमित शाह को हिंदू-मुस्लिम करके भाजपा को वोट बैंक बनाना है। जनता के अंदर अपना खौफ पैदा करना है।
    अभी अमित शाह गृहमंत्री हैं। सारी खुफिया एजेंसियां उनके अधीन हैं। वे चाहते तो गुप्त अभियान चलाकर घुसपैठियों की पड़ताल करा सकते थे और उनकी सूची तैयार कर संबंधित देशों से उसपर वार्ता कर सकते थे। लेकिन अनावश्यक हड़कंप नहीं पैदा किया तो अमित शाह क्या। वही जनता जो नोटबंदी के समय दो-दो हजार रुपये के लिए घंटों कतार में खड़ी रहती थी लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के फैसले के खिलाफ एक शब्द नहीं बोलती थी, आज सड़कों पर है। उसके शांतिपूर्ण प्रदर्शनों को हिंसक बनाने का षडयंत्र कहां से रचा जा रहा है लोग अच्छी तरह समझ रहे हैं। नरेंद्र मोदी जो अपने कई गलत फैसलों के बावजूद जनता के नायक थे, शाह के बड़बोलेपन और मूर्खतापूर्ण जिद के कारण खलनायक बनते जा रहे हैं। मोदी हिंदूवादी नेता अवश्य हैं लेकिन उनके अंदर फिर भी संवेदनशीलता है। लेकिन शाह बिल्कुल संवेदनहीन और उजड्ड किस्म के इंसान हैं। वह अपनी अंहंकारपूर्ण वाणी से लोगों को यह अहसास दिला रहे हैं कि भारत के लोगों ने मोदी सरकार पर विश्वास कर बड़ी भारी गल्ती कर दी सो उसे इसका खमियाजा भुगतना पड़ेगा।
    संयोग से वे नरेंद्र मोदी के सबसे करीबी और सबसे विश्वासपात्र रहे हैं। नरेंद्र मोदी उन्हें जनविरोधी आचरण से भाजपा की कब्र खोदने से रोक भी नहीं सकते। उन्हें सही ठहराने का ही प्रयास करना उनकी विवशता है।

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