…और पैदल निकल पड़ा 30 मजदूरों का काफिला

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नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश की योगी सरकार अपने राज्य के प्रवासी मजदूरों की वापसी के प्रति संवेदनशील है। लेकिन संवादहीनता के कारण उसकी संवेदना मुसीबत में फंसे सभी मजदूरों तक नहीं पहुंच पा रही है। इसका उदाहरण हरियाणा के एक गांव में देखने को मिला जब वहां के सरपंच ने शरण लिए मजदूरों को यह कहकर निकाल दिया कि उन्हें घर पहुंचाने के लिए सरकार ने बसों का इंतजाम कर दिया है। इसके बाद छोटे-छोटे बच्चों को लेकर और महिलाओं सहित 30 लोगों का काफिला पैदल ही निकल पड़ा। उनमें से अधिकांश के पैरों में चप्पल भी नहीं थी। लॉकडाउन के दौरान उन्होंने एक गांव के सरपंच के यहां शरण ली थी। पैदल चले रहे श्रमिकों को देखकर कुछ लोगों ने प्रशासन को अवगत करवाया और श्रमिक परिवारों के लिए शेल्टर होम में व्यवस्था करवाने की मांग की। स्थानीय प्रशासन ने उन्हें शेल्टर होम में भिजवाया।

पुस्तकः विश्व की प्राचीनतम सभ्यता लेखकः पं. अनूप कुमार वाजपेयी,कई पुरस्कारों से पुरस्कृत समीक्षा प्रकाशन, दिल्ली, मुजफ्फरपुर, मूल्य-2000 रुपये लेखक ने राजमहल पहाड़ियों और चट्टानों पर संसार के प्राचीनतम आदिमानव के पदचिन्ह ढूंढ निकाले। पता-वाजपेयी निलयम, नया पारा, दुमका झारखंड

पुस्तकः विश्व की प्राचीनतम सभ्यता लेखकः पं. अनूप कुमार वाजपेयी,कई पुरस्कारों से पुरस्कृत समीक्षा प्रकाशन, दिल्ली, मुजफ्फरपुर, मूल्य-2000 रुपये लेखक ने राजमहल पहाड़ियों और चट्टानों पर संसार के प्राचीनतम आदिमानव के पदचिन्ह ढूंढ निकाले। पता-वाजपेयी निलयम, नया पारा, दुमका झारखंड

ऐसे कई खेतिहर मजदूर परिवार रोजी-रोटी के लिए उत्तर प्रदेश से हरियाणा आए थे। कोरोना वायरस के संक्रमण को लेकर लागू लॉकडाउन में फंसने पर वे एक गांव में रुके थे। राशन-पानी समाप्त होने पर सरपंच से न्याय की गुहार लगाई। कुछ दिन तो राशन-पानी मिला। बाद में उन्हें यह कहकर निकाल दिया गया कि श्रमिक परिवारों के लिए प्रशासन द्वारा वाहनों का प्रबंध करके भेजा जा रहा है। ऐसे में श्रमिक परिवारों के करीब दो दर्जन सदस्य सामान सिर पर लादकर पैदल ही निकल पड़े। चरखी दादरी के समीप करीब 15 किलोमीटर का सफर तय करने के बाद सड़क पर ही रुके  तो जितेंद्र जटासरा नामक समाजसेवी की उनपर नज़र पड़ी। उन्होंने  स्थानीय प्रशासन को पैदल चल रहे मजदूरों के संबंध में जानकारी दी। प्रशासन ने उन्हें सेल्टर होम में भेजा। अब मजदूरों को योगी जी की भेजी हुआ बस का इंतजार है। उन्हें पता नहीं कि कब घर जाने का साधन मिलेगा। वे कब अपने घर पहुंचेंगे।

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