कोरोनाकालः बच्चों के शोषण में बढ़ोत्तरी की आशंका

कैलाश सत्यार्थी चिल्ड्रेन्स फाउंडेशन की स्टडी रिपोर्ट जारी

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नई दिल्ली। कैलाश सत्‍यार्थी चिल्‍ड्रेन्‍स फाउंडेशन (केएससीएफ) की एक स्‍टडी रिपोर्ट में इस बात की सिफारिश की गई है कि कोरोना महामारी की वजह से लागू लॉकडाउन के दौरान कुछ राज्यों में श्रम कानूनों के कमजोर पड़ने की समीक्षा की जानी चाहिए और उन्हें तत्काल रद्द कर दिया जाना चाहिए। रिपोर्ट में तर्क पेश किया गया है कि श्रम कानूनों के कमजोर पड़ने से बच्‍चों की सुरक्षा प्रभावित होगी, जिससे बाल श्रम में वृद्धि हो सकती है। साथ ही रिपोर्ट में इस बात का भी खुलासा किया गया है कि कोरोना महामारी की वजह से उपजे आर्थिक संकट की वजह से 21 प्रतिशत परिवार आर्थिक तंगी में आकर अपने बच्चों को बाल श्रम करवाने को मजबूर हैं। लॉकडाउन के बाद बच्चों के दुर्व्यापार (ट्रैफिकिंग) बढ़ने की भी आशंका जाहिर की गई है। गौरतलब है कि केएससीएफ की यह स्टड़ी रिपोर्ट भारत के कुछ ग्रामीण क्षेत्रों में कोरोना महामारी से उपजे आर्थिक संकट और मजदूरों के पलायन आदि से बच्चों पर पड़ने वाले प्रभाव का अध्ययन कर तैयार की गई है।

पुस्तकः विश्व की प्राचीनतम सभ्यता लेखकः पं. अनूप कुमार वाजपेयी,कई पुरस्कारों से पुरस्कृत समीक्षा प्रकाशन, दिल्ली, मुजफ्फरपुर, मूल्य-2000 रुपये लेखक ने राजमहल पहाड़ियों और चट्टानों पर संसार के प्राचीनतम आदिमानव के पदचिन्ह ढूंढ निकाले। पता-वाजपेयी निलयम, नया पारा, दुमका झारखंड

पुस्तकः विश्व की प्राचीनतम सभ्यता लेखकः पं. अनूप कुमार वाजपेयी,कई पुरस्कारों से पुरस्कृत समीक्षा प्रकाशन, दिल्ली, मुजफ्फरपुर, मूल्य-2000 रुपये लेखक ने राजमहल पहाड़ियों और चट्टानों पर संसार के प्राचीनतम आदिमानव के पदचिन्ह ढूंढ निकाले। पता-वाजपेयी निलयम, नया पारा, दुमका झारखंड

‘’ए स्टडी ऑन इम्पैक्ट ऑफ लॉकडाउन एंड इकोनॉमिक डिस्‍रप्‍शन ऑन लो-इनकम हाउसहोल्‍डस् विद स्पेशल रेफरेंस टू चिल्ड्रेन’’ के नाम से केएससीएफ की यह स्‍टडी रिपोर्ट दुर्व्‍यापार (ट्रैफिकिंग) प्रभावित राज्‍यों के 50 से अधिक स्‍वयंसेवी संस्‍थाओं और 250 परिवारों से बातचीत के आधार पर तैयार की है। रिपोर्ट में 89 प्रतिशत से अधिक स्‍वयंसेवी संस्‍थाओं ने सर्वे में यह आशंका जाहिर की है कि लॉकडाउन के बाद श्रम के उद्देश्‍य से वयस्कों और बच्चों, दोनों के दुर्व्‍यापार की अधिक संभावना है। जबकि 76 प्रतिशत से अधिक स्‍वयंसेवी संस्‍थाओं ने लॉकडाउन के बाद वेश्यावृत्ति आदि की आशंका से मानव दुर्व्‍यापार के बढ़ने की आशंका जाहिर की है और यौन शोषण की आशंका से बाल दुर्व्‍यापार बढ़ने की। इसलिए रिपोर्ट में इस बावत ग्रामीण स्तर पर एक ओर जहां अधिक निगरानी और सतर्कता बरतने की जरूरत पर बल दिया गया है, वहीं दूसरी ओर कानून प्रवर्तन एजेंसियों को और अधिक चौकस करने की सिफारिश की गई है। स्‍वयंसेवी संस्‍थाओं ने लॉकडाउन के बाद बाल विवाह के बढ़ने की भी आशंका जाहिर की है।

स्‍टडी रिपोर्ट के एक हिस्से के रूप में किए गए घरेलू सर्वेक्षण के दौरान पाया गया कि लॉकडाउन की वजह से 21 प्रतिशत परिवार आर्थिक तंगी में आकर अपने बच्चों को बाल श्रम करवाने को मजबूर हैं। रिपोर्ट में सिफारिश की गई है कि ऐसी स्थिति उत्‍पन्‍न नहीं होने पाए, इसलिए आसपास के गांवों में लगातार निगरानी तंत्र को विकसित करने की जरूरत है, ताकि लॉकडाउन से प्रभावित परिवारों के बच्‍चों को बाल श्रम के दलदल में फंसने से रोका जा सके। स्‍टडी रिपोर्ट यह भी कहती है कि पंचायतों, ग्रामीण स्तर के अन्‍य अधिकारियों और ब्लॉक अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने में प्रमुख भूमिका निभानी चाहिए कि बच्चे काम पर जाने की बजाए स्‍कूल जाएं।

स्‍टडी रिपोर्ट में इस बात पर जोर दिया गया है कि व्यापार संचालन और विनिर्माण प्रक्रिया के फिर से शुरू होने के बाद संबंधित अधिकारियों को ऐसे प्रतिष्ठानों का औचक निरीक्षण करना होगा, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि कोई भी बाल श्रमिक या दुर्व्‍यापार करके लाए गए बच्‍चे वहां कार्यरत नहीं हैं। रिपोर्ट में राज्य सरकारों से बाल श्रमिकों, बंधुआ मजदूरों और दुर्व्‍यापार से पीडि़त बच्‍चों की सभी क्षतिपूर्ति राशि के तत्‍काल भुगतान की भी सिफारिश की गई है। बच्‍चों को क्षतिपूर्ति राशि का तत्काल भुगतान करने से फायदा यह होगा कि जिन बच्‍चों को बाल शोषण से मुक्‍त कराया गया है, आर्थिक संकट से उबार कर उनको फिर से बाल श्रम और दुर्व्‍यापार के दलदल में…

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