नाम तक नहीं बताया और बांट दिए 75 लाख रुपये

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-देवेंद्र गौतम

पुस्तकः विश्व की प्राचीनतम सभ्यता लेखकः पं. अनूप कुमार वाजपेयी,कई पुरस्कारों से पुरस्कृत समीक्षा प्रकाशन, दिल्ली, मुजफ्फरपुर, मूल्य-2000 रुपये लेखक ने राजमहल पहाड़ियों और चट्टानों पर संसार के प्राचीनतम आदिमानव के पदचिन्ह ढूंढ निकाले। पता-वाजपेयी निलयम, नया पारा, दुमका झारखंड

पुस्तकः विश्व की प्राचीनतम सभ्यता लेखकः पं. अनूप कुमार वाजपेयी,कई पुरस्कारों से पुरस्कृत समीक्षा प्रकाशन, दिल्ली, मुजफ्फरपुर, मूल्य-2000 रुपये लेखक ने राजमहल पहाड़ियों और चट्टानों पर संसार के प्राचीनतम आदिमानव के पदचिन्ह ढूंढ निकाले। पता-वाजपेयी निलयम, नया पारा, दुमका झारखंड

सूरत के गोराट से दानशीलता की एक दिलचस्प घटना सामने आई है। गुजरात के इस इलाके में एक ट्रक पर बैठे एक व्यक्ति ने गरीबों के बीच एक-एक किलो आटे के पैकेट ले जाने की घोषणा की। बहुत से लोगों ने मात्र एक किलो आटा लेने के लिए ट्रक के पास आना स्वीकार नहीं किया। यह एक परिवार के एक शाम के भोजन के लिए भी पर्याप्त नहीं था। सिर्फ बेहद गरीब, भूखे और जरूरतमंद लोग ही उसके हाथ से आटा के पैकेट ले गए। उन्होंने घर जाकर जब पैकेट खोला तो उस पैकेट में 15 हजार रुपये नकद मिले।

उनके आश्चर्य और खुशी का ठिकाना नहीं रहा। उनके लिए यह बड़ी रकम थी जिसके सहारे वे लॉकडाउन के बाद भी अपनी जरूरतें पूरी कर सकते थे। इस तरह वास्तविक जरूरतमंदों तक अच्छी-खासी मदद पहुंच गई। इससे तीन दिन पहले भी इसी तरह ट्रक पर बैठे शख्स ने एक-एक किलो आटे के पैकेट में 15-15 हजार रुपये बांटे थे। उस व्यक्ति ने अपना नाम बताया, न पहचान बताई। कौन था, किधर से आया, किधर गया। कोई नहीं जानता। कुछ लोगों ने उसकी पहचान मजीद पठान के रूप में की। लेकिन वह कौन है…क्या करता है किसी को पता नहीं।

आज के समय में ल़ॉकडाउन के दौरान कोई व्यक्ति 10 लोगों को भी खाना खिलाता है तो सोशल मीडिया पर उसका फोटो, वीडियो आदि पोस्ट कर अपनी पूरी पब्लिसिटी करता है। वाहवाही लूटता है। लेकिन वह गुमनाम फरिश्ता गुप्तदान की तर्ज पर चुपचाप 500 लोगों के बीच 15-15 हजार रुपये बांटकर चला गया और ऐसी तरकीब अपनाई कि असली जरूरतमंदों तक ही राशि पहुंचे।

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