पहली बार बिल में ट्रैफिकिंग को एक संगठित अपराध के रूप में चिन्हित किया गया है : स्मृति ईरानी

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ट्रैफिकिंग विरोधी विश्व दिवस

कैलाश सत्यार्थी चिल्‍ड्रेंस फाउंडेशन और बचपन बचाओ आंदोलन ने ह्यूमन ट्रैफिकिंग के उन्मूलन पर एक राष्ट्रीय संगोष्‍ठी का किया आयोजन
 

 महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती स्मृति ईरानी ने प्रस्तावित एंटी ट्रैफिकिंग बिल की गिनाई खूबियां

नई दिल्ली। ट्रैफिकिंग विरोधी विश्व दिवस के अवसर पर कैलाश सत्यार्थी चिल्‍ड्रेन्स फाउंडेशन (केएससीएफ) और बचपन बचाओ आंदोलन (बीबीए) ने संयुक्‍त रूप से ‘ह्यूमन ट्रैफिकिंग के उन्‍मूलन’ पर एक राष्‍ट्रीय संगोष्‍ठी का आयोजन किया। संगोष्‍ठी में कोरोना महामारी के कारण ट्रैफिकिंग के उभरते नए रूपों को एक ओर जहां उजागर किया गया, वहीं दूसरी ओर केंद्र सरकार द्वारा प्रस्तावित ट्रैफिकिंग ऑफ पर्सन्‍स (प्रीवेंशन, प्रोटेक्‍शन एंड रीहैबिलिटेशन) बिल-2021 का पुरजोर समर्थन किया गया। यह बिल संसद के मौजूदा मानसून सत्र में पेश होना है। सत्र का उद्घाटन नोबेल शांति पुरस्कार से सम्‍मानित श्री कैलाश सत्यार्थी और केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती स्मृति ईरानी ने किया। संगोष्‍ठी का उद्देश्य ट्रैफिकिंग की रोकथाम और नियंत्रण के साथ-साथ पीड़ितों के संरक्षण और पुनर्वास के लिए जिम्मेदार विभिन्न हितधारकों को एक साथ लाना है।

नोबेल शांति पुरस्‍कार से सम्‍मानित श्री कैलाश सत्‍यार्थी ने कहा, ‘‘मुझे गर्व है कि भारत ह्यूमन ट्रैफिकिंग के खिलाफ प्रस्तावित कानून के साथ इस अपराध से निपटने की वैश्विक लड़ाई में एक ऐतिहासिक कदम उठाने के लिए तैयार है। एक संवेदनशील और सतर्क समाज द्वारा समर्थित एक मजबूत एंटी ट्रैफिकिंग कानून हमारी नैतिक और संवैधानिक जिम्‍मेदारी है। यह राष्ट्र-निर्माण और आर्थिक प्रगति की दिशा में एक आवश्यक कदम है। हजारों महिलाएं और बच्चे न्याय और स्वतंत्रता की प्रतीक्षा कर रहे हैं। हमें इस कानून को तुरंत पारित करना चाहिए और बाकी दुनिया के लिए एक मिसाल कायम करना चाहिए।”

इस अवसर पर महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती स्मृति ईरानी ने श्री कैलाश सत्यार्थी से अपने दो दशक पुराने रिश्ते को याद करते हुए उन्हें बच्चों की सुरक्षा और इस दिशा में उनके द्वारा किए गए अथक कार्यों के लिए बधाई दी। श्रीमती ईरानी ने प्रस्तावित एंटी ट्रैफिकिंग बिल की चर्चा करते हुए कहा, “हम देश में पहली बार ट्रैफिकिंग को एक संगठित अपराध के रूप में चिन्हित कर रहे हैं। यह बिल ट्रैफिकिंग के विभिन्न रूपों की, जो अपनी प्रकृति में गंभीर है, एक व्यापक सूची का प्रस्ताव तैयार करेगा और उसी अनुसार उसकी सजा को बढ़ाने का काम करेगा। यह बिल अपराध की रिपोर्टिंग करने को भी अनिवार्य बनाता है और जो अपराध को रिपोर्ट नहीं करेंगे वे सजा के दायरे में आएंगे।’’ केंद्रीय मंत्री ने अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए कहा कि बिल के पारित होने के साथ ही हम अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी उस सहयोग को बढ़ाएंगे, जिसके तहत महिलाओं एवं बच्‍चों की सीमापार से ट्रैफिकिंग होती है और जो हमारी चिंता का एक प्रमुख कारण है। अंत में श्रीमती स्मृति इरानी ने कहा, मैं एक बार फिर से उम्‍मीद करती हूं कि आज की यह संगोष्‍ठी नए विचारों को सामने लाएगी ताकि हमारा कार्यान्‍वयन न केवल प्रशासनिक स्‍तर पर सुचारू हो बल्कि वह उपयोगी और प्रभावी भी हो।

संगोष्‍ठी भारत में ट्रैफिकिंग को जमीनी स्‍तर पर कैसे रोका जाए, ट्रैफिकिंग के नए उभरते रूपों और उसको रोकने में सिविल सोसायटी की क्‍या भूमिका हो, उसके इर्द-गिर्द घूमती रही। संगोष्‍ठी में कानून निर्माताओं के अलावा, संस्थानों और एजेंसियों के प्रमुखों, बाल अधिकार विशेषज्ञों और गैर सरकारी संगठनों ने भी हिस्‍सा लिया। गौरतलब है कि ट्रैफिकिंग जैसे संगठित अपराध से प्रभावी ढंग से निपटने को एक विशेष कानून की दरकार काफी समय से महसूस की जा रही थी।
नए कानून की विशेषता है कि यह वर्तमान कानूनी व्यवस्था में मौजूद सभी खामियों को दूर करता है और ट्रैफिकिंग के हर पहलू, जैसे कि इसकी रोकथाम, जांच के लिए विशेष एजेंसियों की स्‍थापना, परीक्षण के लिए विशेष अदालतें और पुनर्वास की जरूरत पर बल देता है। ट्रैफिकिंग इन पर्संन्स (प्रीवेंशन, केयर एंड रीहैबिलिटेशन) बिल, 2021 में ट्रैफिकिंग से संबंधित विभिन्न अपराधों को शामिल करते हुए उसके विभिन्न पहलुओं पर भी रोशनी डालता है। इसमें ट्रैफिकिंग के गंभीर रूप भी शामिल हैं। यह ट्रैफिकिंग को रोकने, उससे निपटने और पीडि़तों के संरक्षण और पुनर्वास के लिए जिला, राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर एक त्रिस्‍तरीय संस्‍था बनाने की जरूरत पर बल देता है।

संगोष्‍ठी काफी महत्‍वपूर्ण और सार्थक रही। प्रतिष्ठित वक्ताओं ने कई महत्वपूर्ण सुझाव दिए और सर्वसम्मति से श्री सत्यार्थी द्वारा ट्रैफिकिंग इन पर्संन्स (प्रीवेंशन, केयर एंड रीहैबिलिटेशन) बिल, 2021 को तत्‍काल पारित करने का समर्थन किया। उन्‍होंने राष्‍ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्‍यूरो (एनसीआरबी) की 2019 की रिपोर्ट का हवाला देते हुए ट्रैफिकिंग के खतरनाक तरीके से बढ़ने पर गंभीर चिंता व्यक्त की।

कार्यक्रम में प्रयास के संस्थापक श्री आमोद कंठ, ग्लोबल सस्टेनेबिलिटी नेटवर्क की सुश्री अस्मिता सत्यार्थी, अमर उजाला डिजिटल के संपादक श्री जयदीप कार्णिक, सीआरएएफ, आंध्र प्रदेश के श्री फ्रांसिस थंबी, गोल्‍ड-असम के श्री राजीब शर्मा, आरपीएफ, रेलवे महानिरीक्षक मुख्यालय श्री सुमति शांडिल्य  उपस्थित थीं। कार्यक्रम में शक्ति वाहिनी के संस्‍थापक श्री रवि कांत, बिहार के एडीजी श्री अनिल किशोर यादव, महानिदेशक और पुलिस आयुक्त, तेलंगाना श्री महेश भागवत,  राष्ट्रीय संस्थान सामाजिक रक्षा के निदेशक श्री वीरेंद्र मिश्रा और डब्ल्यूसीडी, दिल्ली (टीबीसी) की निदेशक सुश्री रश्मि सिंह भी मौजूद रहीं।

कोरोनाकाल में ट्रैफिकिंग बढ रही है, बचपन बचाओ आंदोलन (बीबीए) के आंक़डे भी इसकी तस्दीक करते हैं। बीबीए ने कोरोना महामारी के दौरान ट्रैफिकिंग के शिकार 9000 से अधिक बच्चों को मुक्‍त किया है। पिछले दो महीनों में ही उसने पूरे देश से 806 बच्चों को आजाद कराया है। इस हफ्ते में ही बीबीए ने झारखंड के गिरिडीह में छह नाबालिग लड़कियों को छुड़ाने के साथ ही रांची से दिल्‍ली लाए जा रहे चार नाबालिग बच्चों को भी छुड़ाया है। इसके अलावा तेलंगाना से चार किशोर बच्चों को छुड़ाया गया। एंटी ट्रैफिकिंग डे की पूर्व संध्या पर अंबाला स्टेशन से अमृतसर जाने वाली ट्रेन से 25 बच्चों को बचाया गया। वहीं, दिल्ली के सीलमपुर इलाके की गारमेंट इकाईयों से बाल मजदूरी कर रहे 20 बच्चों को छुड़ाया गया।

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