गंगा सप्तमी 2019 : वाराणसी में केसर जल से गंगा का अभिषेक, उमड़े श्रद्धालु

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वाराणसी:- भगवान शिव की नगरी वाराणसी में आज गंगा सप्तमी की छटा निराली है। मां गंगा के अवतरण के इस पर्व पर आज वाराणसी के घाटों पर श्रद्धालु की भारी भीड़ उमड़ पड़ी हैं।

पुस्तकः विश्व की प्राचीनतम सभ्यता लेखकः पं. अनूप कुमार वाजपेयी,कई पुरस्कारों से पुरस्कृत समीक्षा प्रकाशन, दिल्ली, मुजफ्फरपुर, मूल्य-2000 रुपये लेखक ने राजमहल पहाड़ियों और चट्टानों पर संसार के प्राचीनतम आदिमानव के पदचिन्ह ढूंढ निकाले। पता-वाजपेयी निलयम, नया पारा, दुमका झारखंड

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हिंदू पंचांग के अनुसार इस बार गंगा सप्तमी आज यानी 11 मई 2019 रोज शनिवार को पड़ा है। शास्त्रों के अनुसार वैशाख मास की शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि को मां गंगा का अवतरण हुआ था। वैशाख शुक्ल सप्तमी के दिन ब्रह्मा के कमंडल से मां गंगा की उत्पत्ति हुई थी। इसे गंगा जन्मोत्सव भी कहा जाता है। इसी दिन भागीरथ के तप से प्रसन्न होकर गंगा स्वर्ग से उतर शिव की जटाओं में समाई थी। तभी से गंगा सप्तमी का पर्व चला रहा है।

सुबह दशाश्वमेध घाट पर गंगा सप्तमी के पावन पर्व पर सर्वोदय सेवा समिति के तत्वावधान में मां गंगा का अभिषेक किया गया। प्रारंभ में गायक अमलेश शुक्ला एवं ममता शर्मा ने मां गंगा पर सुमधुर भजनों की प्रस्तुति की। इसके बाद संस्था के अध्यक्ष सुशील कुमार पांडेय ने उपस्थित अतिथियों को अंगवस्त्र एवं रुद्राक्ष की माला प्रदान कर उनका स्वागत किया। कार्यक्रम संयोजक श्री काशी विश्वनाथ मंदिर के अर्चक पंडित श्रीकांत मिश्र ने बताया कि आज के ही दिन ब्रह्म के कमंडलु से गंगा जी की उत्पत्ति मानी जाती है। गंगा की अविरलता और निर्मलता एवं राष्ट्र कल्याण का संकल्प लेते हुए यह कार्यक्रम प्रतिवर्ष आयोजित किया जा रहा है। इस दौरान पंडित श्रीकांत मिश्र के आचार्यत्व में 51 वैदिक ब्राह्मणों ने सविधि पूजन व केसर से माँ गंगा का अभिषेक कराया। 31 विशिष्ट अतिथियों ने गंगाभिषेक किया।

जिनमें प्रो.राजाराम शुक्ल (कुलपति, संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय) प्रो. टीएन सिंह (कुलपति, काशी विद्यापीठ), वीके मीणा (आईजी रेंज,वाराणसी), नीलू मिश्रा(एथलीट), संतोष यादव (पर्वतारोही), के.एन चौबे (डीएफएम भारतीय रेलवे), एन. पी. सिंह (कमांडेंट,सीआरपीएफ), पद्मश्री राजेश्वर आचार्य, भावना मिश्रा, सुमन सिंधी, पवन शुक्ला, प्रधानमंत्री के सहयोगी काकू भाई, संजय राय,धर्मेंद्र सिंह, रामगोपाल मोहले, शशिकांत मिश्रा चल्ला शास्त्री, लूसी गेस्ट, बृजेश चंद्र पाठक सहित कई समाज सेवी एवं सांस्कृतिक क्षेत्र के प्रमुख लोग भी शामिल थे। कार्यक्रम संयोजन में पवन शुक्ला, उदित नारायण मिश्रा, सतीश शास्त्री,विभू मिश्रा एवं मुनेश शास्त्री आदि ने अपना महती योगदान दिया ।

मान्यता है कि ऋषि भगीरथ की कठोर तपस्या से प्रसन्न होकर गंगा धरती पर आईं थीं। इस दिन गंगा में डुबकी लगाने से भक्तों के पाप कर्मों का नाश होता है। इस दिन दान-पुण्य का विशेष महत्व माना जाता है।वाराणसी के सभी प्रख्यात घाट पर सुबह से ही लोग गंगा नदी में स्नान कर रहे हैं। गंगा नदी के तटों पर गंगा नदी की पूजा के साथ आरती भी हो रही है। हर घाट का दृश्य काफी मनोरम है। यहां पर सिर्फ वाराणसी से ही नहीं बल्कि दूर-दराज के भी लोग गंगा नदी में पुण्य की डुबकी लगाने आये हैं।

गुणकारी माना जाता है आज का गंगा स्नान

हमारे शास्त्रों में यह मान्यता है कि इस तिथि पर गंगा स्नान, तप ध्यान करने से मोक्ष की प्राप्ति होती है। इस दिन गंगा में स्नान करने से रोगों से मुक्ति मिलती है। गंगाजल में तमाम औषधियां और वनस्पतियों के गुण मौजूद होने के कारण यह अमृतकारी माना जाता है।

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