बाजार की मनमानी पर अंकुश लगाए सरकार

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-देवेंद्र गौतम

पुस्तकः विश्व की प्राचीनतम सभ्यता लेखकः पं. अनूप कुमार वाजपेयी,कई पुरस्कारों से पुरस्कृत समीक्षा प्रकाशन, दिल्ली, मुजफ्फरपुर, मूल्य-2000 रुपये लेखक ने राजमहल पहाड़ियों और चट्टानों पर संसार के प्राचीनतम आदिमानव के पदचिन्ह ढूंढ निकाले। पता-वाजपेयी निलयम, नया पारा, दुमका झारखंड

पुस्तकः विश्व की प्राचीनतम सभ्यता लेखकः पं. अनूप कुमार वाजपेयी,कई पुरस्कारों से पुरस्कृत समीक्षा प्रकाशन, दिल्ली, मुजफ्फरपुर, मूल्य-2000 रुपये लेखक ने राजमहल पहाड़ियों और चट्टानों पर संसार के प्राचीनतम आदिमानव के पदचिन्ह ढूंढ निकाले। पता-वाजपेयी निलयम, नया पारा, दुमका झारखंड

बाजार पर सरकार का नियंत्रण कितना जरूरी है यह कोरोना वायरस के खिलाफ जंग के दौरान समझ में आ रहा है। सरकार ने मास्क और हैंड सेनिटाइजर को आवश्यक वस्तुओं की सूची में शामिल किया है। इनकी अधिकतम विक्रय मूल्य भी निर्धारित कर दी है। लेकिन खुले बाजार से यह गायब हैं। इनकी खुलेआम कालाबाजारी हो रही है। मानव जीवन के अस्तित्व पर सबसे बड़े खतरे के उपस्थित होने पर भी बाजार मांग और पूर्ति के नियम पर ही चल रहा है। व्यापारियों के लिए यह अधिकतम लाभ कमाने का अवसर बन गया है। इसका सीधा कारण बाजार का सरकार के नियंत्रण से बाहर होना है।

नियमतः आवश्यक वस्तुओं की सूची में शामिल उत्पादों की निर्धारित मूल्य पर उपलब्धता सुनिश्चित कराने की जिम्मेवारी राज्य सरकारों की होती है। लेकिन देश के अन्य राज्यों की कौन पूछे राजधानी दिल्ली और एनसीआर में भी यह लागू नहीं हो पाया है। किसी दवा दुकान या स्टोर में कोई ग्राहक इनकी मांग करता है तो उसे दो-तीन घंटे बाद आने को कहा जाता है और कीमत कई गुना बताई जाती है। अपनी जान बचाने के लिए लोग किसी भी कीमत पर इन चीजों को हासिल करने को तैयार हो जा रहे हैं। पैसेवाले लोग तो कालाबाजार से इन्हें उठा ले रहे हैं लेकिन गरीबों के लिए इन्हें प्राप्त कर पाना कठिन हो गया है। आर्थिक गतिविधियां मंद होने के कारण उनकी आय के स्रोत भी ठप्प हो गए हैं। जिसके कारण वे पैसों की किल्लत झेल रहे हैं। ऊपर से कालाबाजारी। केंद्रीय उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय की पहल और विधिक माप विज्ञान अधिनियम के तहत एडवाइजरी का बाजार पर कोई प्रभाव दिख नहीं रहा है। राज्य सरकारों को तात्कालिक प्रभाव से इन वस्तुओं के स्टॉकिस्ट और खुदरा विक्रेताओं पर दबाव बनाकर कालाबाजारी के चक्रव्यूह को तोड़ना चाहिए। बाजार की मनमानी और व्यापारियों की लोलुपता पर अंकुश लगाने का कानूनी अधिकार राज्य सरकारों के पास है। इका उपयोग सख्ती के साथ करना चाहिए और साथ ही सरकारी अस्पतालों के जरिए इनका वितरण कराने की व्यवस्था कर आपूर्ति की समानांतर व्यवस्था करनी चाहिए। इससे जमाखोरी और कालाबाजारी पर रोक लगेगी।

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