हाथरस कांडः राजनीति नहीं तो क्या भजन-कीर्तन करे विपक्ष

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-देवेंद्र गौतम

पुस्तकः विश्व की प्राचीनतम सभ्यता लेखकः पं. अनूप कुमार वाजपेयी,कई पुरस्कारों से पुरस्कृत समीक्षा प्रकाशन, दिल्ली, मुजफ्फरपुर, मूल्य-2000 रुपये लेखक ने राजमहल पहाड़ियों और चट्टानों पर संसार के प्राचीनतम आदिमानव के पदचिन्ह ढूंढ निकाले। पता-वाजपेयी निलयम, नया पारा, दुमका झारखंड

पुस्तकः विश्व की प्राचीनतम सभ्यता लेखकः पं. अनूप कुमार वाजपेयी,कई पुरस्कारों से पुरस्कृत समीक्षा प्रकाशन, दिल्ली, मुजफ्फरपुर, मूल्य-2000 रुपये लेखक ने राजमहल पहाड़ियों और चट्टानों पर संसार के प्राचीनतम आदिमानव के पदचिन्ह ढूंढ निकाले। पता-वाजपेयी निलयम, नया पारा, दुमका झारखंड

हाथरस कांड में एसपी और डीएसपी सहित पांच पुलिसकर्मी निलंबित कर दिए गए। लेकिन ज़मीनी हालत में कोई बदलाव नहीं आया है। पीड़िता के परिजनों समेत पूरे गांव के पहले की तरह सील करके रखा गया है। आवागमन के सारे रास्तों पर पुलिस तैनात है। जन प्रतिनिधियों और मीडियाकर्मियों को भी अंदर नहीं जाने दिया जा रहा है। सरकार और उसके भक्तों का आरोप है कि विपक्ष राजनीति कर रहा है। सवाल है कि राजनीतिक दल राजनीति नहीं करेंगे तो क्या भजन गाएंगे। भाजपा जब विपक्ष में थी तो राजनीति नहीं करती थी। कीर्तन-भजन करती थी। सरकार अपना काम करे। विपक्ष अपना। यही लोकतंत्र का सौंदर्य है।

उत्तर प्रदेश में जो कुछ हो रहा है वह कहीं से भी लोकतंत्र के दायरे में नहीं आता। एक सरकार पूरी बेशर्मी के साथ सीना ठोककर जातिवादी आचरण पर उतर आई है। ठोको की सरकार अब रोको की सरकार बन चुकी है। यह अन्याय को नहीं रोकती न्याय की मांग को लेकर उठने वाली आवाज़ों को रोकना चाहती है। जिनकी बेटी के साथ दरिंदगी हुई उन्हें घर से बाहर नहीं निकलने दिया जा रहा है। किसी से मिलने नहीं दिया जा रहा है। उनपर अपना बयान बदलने के लिए डराया-धमकाया जा रहा है। विपक्ष को बोलने नहीं दिया जा रहा और सत्तापक्ष मौन है। केंद्र की सत्ता तमाशबीन बनी हुई है अथवा डैमेज कंट्रोल में लगी है। योगी बाबा भले स बात को नहीं समझ रहे लेकिन पीएम मोदी को पता है कि हाथरस की आग राजधानी दिल्ली सहित पूरे देश को अपनी चपेट में ले रही है। बिहार चुनाव पर तो इसका तत्काल असर पड़ जाएगा। भाजपा सत्ता के लिए कुछ भी कर सकती है। जरूरत पड़ी तो योगी आदित्यनाथ की बलि भी ले सकती है। पीएम मोदी भी अभी किसान आंदोलन के लेकर परेशान हैं। यदि वे योगी से इस्तीफा मांग लें तो उनकी नकारात्मक होती छवि बच सकती है। योगी आदित्यनाथ को इसका अंदेशा है इसीलिए उन्होंने पांच पुलिस अधिकारियों को निलंबित कर अपना बचाव करने की कोशिश की। लेकिन पुलिस पर गाज गिराने से क्या लाभ। पुलिस तो हुक्म का गुलाम है। एक जिला स्तरीय अधिकारी किसी पीड़िता के शव को रात के अंधेरे में चुपचाप चलाने का साहस नहीं कर सकता। यह ऊपर के आदेश से ही संभव है। आदेश किसने दिया था। इसकी जांच होनी चाहिए। बिहार में कांग्रेस के शासनकाल में भी नक्सल आंदोलन के दौरान दर्जनों नरसंहार हुए थे। लेकिन कभी मीडिया को घटनास्थल तक जाने से नहीं रोका गया। राजनीतिक दलों को भी जाने पर रोक नहीं थी। अब रोका जा रहा है। यह भाजपा का रामराज्य है। ठोको और रोको का रामराज्य।

राजपूतों का सर्वमान्य नेता बनने के चक्कर में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सूबे को जातीय युद्ध की ओर धकेल रहे हैं। बिहार में फारवर्ड-बैकवर्ड के नाम पर जातियुद्ध हो चुका है। इसी क्रम में वहां नरसंहारों का दौर आया था। उत्तर प्रदेश में जो सामूहिक बलात्कार और हत्याएं हो रही हैं उनमें सिर्फ हवस की भूख मिटाने का प्रयास नहीं बल्कि एक समुदाय को सबक सिखाने की कोशिश नज़र आ रही है। इससे योगी आदित्यनाथ का एक व्यक्तिगत जनाधार तो खड़ा हो सकता है लेकिन भाजपा को भारी नुकसान उठाना पड़ेगा। इसका असर सिर्फ उत्तर प्रदेश पर नहीं बल्कि पूरे देश पर पड़ेगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ऐसे अवसरों पर पूरी तरह चुप्पी साध लेते हैं। इसबार भी चुप हैं। उन्होंने योगी आदित्यनाथ को तत्काल कार्रवाई का निर्देश दिया था। इसपर योगी जी ने एसआइटी का गठन कर दिया लेकिन यह सब डैमेज कंट्रोल का हिस्सा है। योगी जी के तानाशाही रवैये में कोई फर्क नहीं आया है।

हाथरस के बाद उत्तर प्रदेश में रेप और हत्या की कई घटनाएं घटित हो गईं। अन्य घटनाओं के आरोपी न सीधे तौर पर भाजपा के हैं और योगी जी की जाति के। उनपर कार्रवाई कर हाथरस के मामले को दबाने की कोशिश हो सकती है।

फिलहाल हाथरस कांड को लेकर देशभर के सामाजिक और राजनीतिक संगठन मैदान में उतर चुके हैं। राहुल गांधी और प्रियंका गांधी के साथ धक्कामुक्की और उनके काफिले पर लाठी चार्ज हो चुका है। इससे भाजपा की भद पिटी है। मोदी के अंधभक्त इस घटना को लेकर राहुल प्रियंका को ट्रोल करते रहे लेकिन सोशल मीडिया पर उन्हें कड़ी प्रतिक्रिया झेलनी पड़ी। इससे भाजपा की भद पिटी है और कांग्रेस के प्रति लोगों का झुकाव बढ़ा है। भाजपा के थिंकटैंक हाथरस के मामले को लेकर योगी की मनमानी पर अंकुश लगाने की सलाह देते हैं अथवा भाजपा की छवि दांव पर लगा देने का परामर्श देते हैं, यही देखना है।

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