हैदराबाद कांड बनाम महिला सशक्तिकरण

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-पम्मी कुमारी (शोध छात्रा)

पुस्तकः विश्व की प्राचीनतम सभ्यता लेखकः पं. अनूप कुमार वाजपेयी,कई पुरस्कारों से पुरस्कृत समीक्षा प्रकाशन, दिल्ली, मुजफ्फरपुर, मूल्य-2000 रुपये लेखक ने राजमहल पहाड़ियों और चट्टानों पर संसार के प्राचीनतम आदिमानव के पदचिन्ह ढूंढ निकाले। पता-वाजपेयी निलयम, नया पारा, दुमका झारखंड

पुस्तकः विश्व की प्राचीनतम सभ्यता लेखकः पं. अनूप कुमार वाजपेयी,कई पुरस्कारों से पुरस्कृत समीक्षा प्रकाशन, दिल्ली, मुजफ्फरपुर, मूल्य-2000 रुपये लेखक ने राजमहल पहाड़ियों और चट्टानों पर संसार के प्राचीनतम आदिमानव के पदचिन्ह ढूंढ निकाले। पता-वाजपेयी निलयम, नया पारा, दुमका झारखंड

हैदराबाद कांड के चारो आरोपी पुलिस एनकाउंटर में मारे गए। उन्हें अपने किए की माकूल सज़ा मिल गई। संसद से लेकर सड़क तक इस घटना को लेकर बहस छिड़ी। कानून की दृष्टि से देखें तो हैदराबाद सामूहिक बलात्कार और नृशंस हत्याकांड के चार आरोपियों के एनकाउंटर पर सवाल उठाए जा सकते हैं। पुलिस का कहना है कि घटना स्थल पर ले जाए जाने के बाद उनमें से दो ने पुलिस का पिस्टल छीनकर गोली चलाई और कुहासे का लाभ उठाकर भागने की कोशिश की। पुलिस ने आत्मसमर्पण के लिए कहा तो वे नहीं माने। इसके बाद उन्हें गोली मारनी पड़ी। इस मुठभेड़ में दो पुलिसकर्मी घायल हो गए। मानवाधिकार आयोग ने पुलिस के बयान पर संदेह व्यक्त करते हुए नोटिस दी है। मामले की च्चस्तरीय जांच के आदेश हुए हैं। यदि यह फर्जी एनकाउंटर है तो कानूनन गलत है। लेकिन सामाजिक और मानवीय दृष्टि से देखे तो ऐसे दरिंदों से निपटने का यही सबसे सटीक तरीका हो सकता है। एक जमाने में मुंबई अंडरवर्ल्ड से निपटने के लिए महाराष्ट्र पुलिस ने एनकाउंटर का ही रास्ता अपनाया था। इसके बाद ही अंडरवर्ल्ड का आतंकराज नियंत्रण में आया। कानूनी रास्ते से उनका खात्मा संभव नहीं था। वे जेल में रहकर अपना गिरोह चलाते रहते। जब एनकाउंटर होने लगा तो बड़े-बड़े डॉन मुंबई से जान बचाकर विदेशों में भागे। अंडरवर्ल्ड के गिरोह संगठित अपराधी होते हैं। दुष्कर्मियों का कोई संगठन नहीं होता। उनके मन में मौत का डर समा जाए तो वे इस तरह का दुःसाहस करने से पहले सौ बार सोचेंगे। कानून पर देशवासियों को भरोसा जरूर है लेकिन जब यह ध्यान आता है कि दिल्ली के निर्भया कांड के अपराधियों को अदालती कार्यवाही के चक्कर में 7 साल बाद भी सज़ा नहीं मिली तो भरोसा कहीं न कहीं दरकने लगता है। फांसी की सज़ा सुनाए जाने के बाद भी फाइलों की दौड़ चलती रही। उन्हें अभी तक सूली पर नहीं चढ़ाया गया तो लोगों का भरोसा कैसे कायम रहे। सच यही है कि इस लचर सरकारी तंत्र के कारण दुष्कर्मियों के अंदर कानून का भय व्याप्त नहीं हो सका। उस समय जो कड़ा कानून बना उसका नतीजा यह हुआ कि सामूहिक बलात्कार के बाद साक्ष्य मिटाने के लिए पीड़िताओं की हत्या की जाने लगी। हैदराबाद की घटना में एक साजिश के तहत 27 वर्षीय महिला पशु चिकित्सक की स्कूटी के टायर से हवा निकाल दी गई और मदद के बहाने दूसरी जगह ले जाकर हैवानियत की गई। 28 नवंबर को जब वह अपनी स्कूटी पंक्चर होने के बाद सड़क पर मदद का इंतजार कर रही थी तभी यह कांड हुआ। पुलिस के मुताबिक यह महिला रोज की तरह अपने क्लीनिक से लौट रही थी कि हैदराबाद के बाहरी इलाके में स्थित एक टोल प्लॉजा के पास उसकी स्कूटी पंक्चर कर दी गई। उसने अपनी बहन को फोन किया तो बहन ने उसे सुझाव दिया कि वह स्कूटी टोल प्लाजा पर ही खड़ी कर दे और घर के लिए कैब ले ले। इसी दौरान दो लोगों ने महिला से कहा कि वे स्कूटी अपने साथ ले जाएंगे और पंक्चर ठीक कराके वापस ले आएंगे।

स्कूटी ले जाए जाने के बाद महिला टोल प्लाजा पर ही इंतजार कर रही थी कि आरोपियों ने उस पर घात लगाकर हमला किया और उसे झाड़ियों में खींच लिया। उसके साथ बलात्कार के बाद उसकी हत्या कर दी गई और बाद में शव एक फ्लाइओवर के पास फेंककर उसे जलाने की कोशिश भी की गई। उधर, देर रात तब जब महिला घर नहीं लौटी तो घरवालों ने पुलिस में रिपोर्ट लिखवाई। सुबह पुलिस ने उसी फ्लाईओवर के नीचे से महिला का अधजला शव बरामद किया।

दुःसाहस का आलम यह कि दुष्कर्मी एक दो घंटे बाद यह देखने के लिए शव के पास पुनः वापस लौटे कि वह पूरी तरह जली है या नहीं। वह तो हैदराबाद की पुलिस थी कि कुछ ही घंटों मे सभी आरोपियों को धर दबोचा और अपराध कुबूल करवाकर अदालत में पेश कर दिया। इस कांड को लेकर जो देशव्यापी आक्रोश की लहर उठी थी वह उनकी गिरफ्तारी के बाद फांसी की सज़ा की मांग में बदल गई। सांसद एवं फिल्म अभिनेत्री जया भादुड़ी ने गुस्से में यहां तक कह दिया कि ऐसे दुष्कर्मियों की मॉब लिंचिंग कर देनी चाहिए। हैदराबाद कांड के तुरंत बाद उन्नाव में एक युवती को अपहृत कर सामूहिक बलात्कार के बाद जला दिया गया। वह 90 प्रतिशत जल चुकी है और दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में इलाजरत है। इस आलेख को लिखे जाने के समय उसकी सांसें तो चल रही थीं लेकिन वह जीवन और मौत के बीच संघर्ष कर रही थी। इस तरह की और भी घटनाएं देश के विभिन्न इलाकों से सुर्खियों में आई।

स्पष्ट है कि इस तरह के हैवानों से निपटने में हमारी न्याय व्यवस्था अपनी जटिलताओं के कारण कहीं न कहीं विवश नज़र आ रही है। हैदराबाद के हैवानों ने यही सोचा होगा कि अव्वल तो वे साक्ष्य के अभाव में बच जाएंगे पकड़े भी गए तो एक अदालत के फैसले को दूसरी अदालत में चुनौती देते हुए सज़ा पाने से बचते रहेंगे। उनका कुछ बिगड़ेगा नहीं। उन्हें अंदाजा नहीं रहा होगा कि उनके पाप की सज़ा सप्ताह भर के अंदर मिल जाएगी। देशवासी उनके लिए मौत की सज़ा की मांग कर रहे थे। इसीलिए देश के विभिन्न इलाकों में इस पुलिस एनकाउंटर को जायज़ ठहराया जा रहा है। भुक्तभोगी परिवार के कलेजे को भी ठंढक मिली है। समाज में रह रहे विकृत मानसिकता के दरिंदों के बीच भी यह संदेश गया कि अदालत के फैसले के पहले भी उन्हें सज़ा मिल सकती है। उनके अंदर इस एनकाउंटर के बाद भय व्याप्त होगा। दरिंदों के मां-बाप तो पहले ही कह चुके थे कि उनके बेटों ने जितना घृणित अपराध किया है इसके लिए उन्हें फांसी पर चढ़ाया जाए या जिस तरह की सज़ा दी जाए उन्हें मंजूर होगा। उन्नाव कांड के दरिंदों के साथ यूपी पुलिस कुछ इसी तरह का इंसाफ करती है या उन्हें निर्भया कांड के अपराधियों की तरह जेल और अदालतों का चक्कर लगवाती है यह देखना है।

लेकिन इसमें संदेह नहीं कि देश में बलात्कार और हत्या की बढ़ती घटनाओं को देखते हुए महिलाओं को आत्मरक्षा के उपाय भी ढूंढने होंगे। हैदराबाद की एक महिला पुलिसकर्मी ने महिलाओं को आत्मरक्षा के लिए कई सुझाव दिए हैं। पर्स मे हमेशा मिर्च पाउडर, चाकू रखना और किसी तरह की विषम परिस्थिति होने पर तत्काल हेल्पलाइन में फोन करना आदि। आत्मरक्षा का हर किसी को अधिकार है। महिलाएं तभी सशक्त होंगी जब हर तरह की स्थिति से निपटने के लिए स्वयं को तैयार कर लेंगी। जब दुष्कर्मियों का तुरंत हिसाब होने लगेगा तो वे इस तरह के कांड करने से डरेंगे। इसपर व्यापक चर्चा की जरूरत है।

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