लद्दाख के रेजांग ला में भारतीय जवानों ने चीनी सैनिकों को खदेड़ा

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नई दिल्ली। किसी दार्शनिक ने कहा था कि दुनिया का अंतिम युद्ध पारंपरिक हथियारों से लड़ा जाएगा। भारत और चीन के बीच यह बात  सत्य प्रतीत होती है। युद्ध अंतिम हो या न हो लेकिन पारंपरिक हथियारों का प्रयोग हो रहा है। गलवान घाटी में चीनी सेना ने  पारंपरिक हथियारों से हमला किया था जिसमें निहत्थे भारतीय सैनिकों ने उनके छक्के छुड़ा दिए थे। अब 7 सितंबर को पूर्वी लद्दाख के रेजांग ला के उत्तर में मुखपारी चोटी पर धारदार हथियारों से लैस 40-50 की संख्या में चीन के सैनिकों ने  भारतीय इलाके में चोटी पर कब्जा करने की कोशिश की लेकिन हमारे जवानों ने उन्हें खदेड़ दिया। इस मुद्दे पर चीन ने झूठी कहानी गढ़ते हुए कहा है कि उसके सैनिक सिर्फ बातचीत के लिए गए थे और भारत की तरफ से ही उकसावे की कार्रवाई हुई। बाद में कुछ ऐसी तस्वीरें सामने आई हैं जो जिन्होंने चीन के झूठ का पर्दाफाश कर दिया।

पुस्तकः विश्व की प्राचीनतम सभ्यता लेखकः पं. अनूप कुमार वाजपेयी,कई पुरस्कारों से पुरस्कृत समीक्षा प्रकाशन, दिल्ली, मुजफ्फरपुर, मूल्य-2000 रुपये लेखक ने राजमहल पहाड़ियों और चट्टानों पर संसार के प्राचीनतम आदिमानव के पदचिन्ह ढूंढ निकाले। पता-वाजपेयी निलयम, नया पारा, दुमका झारखंड

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तस्वीरों में 40-50 की तादाद में चीन के सैनिक हथियारों से लैस होकर रेजांग ला के पास चोटियों की तरफ आने की कोशिश करते दिख रहे हैं। वह चोटियां भारतीय इलाके में हैं और वहां भारतीय सैनिक तैनात हैं। तस्वीरों में चीनी सैनिकों के पास धारदार हथियार दिखी दे रहे हैं। वे भारतीय सैनिकों से महज 200 मीटर की दूरी पर हैं। जून के महीने में गलवान घाटी में जिस तरह उन्होंने धोखे से भारतीय जवानों पर धारदार हथियारों और कील लगे डंडों से हमला किया था, वैसे ही धोखे को दोहराने के लिए वे पूरी तैयारी के साथ आए थे। चीनी सैनिक रणनीतिक तौर पर अहम भारतीय चोटियों पर कब्जे की फिराक में थे। इतना ही नहीं, उन्होंने 10-15 राउंड फायरिंग भी की लेकिन भारतीय जवानों ने उन्हें खदेड़ दिया। एलएसी पर 45 साल बाद गोली चली थी।

तस्वीरों में चीनी सैनिकों के पास जो हथियार दिख रहे हैं, उन्हें गुआंडाओ कहा जाता है। उनका इस्तेमाल चीनी मार्शल आर्ट में किया जाता है। इसमें एक 5-6 फीट लंबे पोल के ऊपर ब्लेड लगी होती है। यह ब्लेड एक तरफ पीछे की तरफ भी मुड़ी होती है। यह कुछ-कुछ भारतीय हथियार बर्छी से मिलता जुलता है। इसे बर्छी और भाले का संयुक्त रूप कहा जा सकता है।

यह सोमवार 7 सितंबर की घटना है। उस दिन शाम 6 बजे के करीब चीनी सैनिक आक्रामक ढंग से मुखपारी चोटी के नजदीक भारतीय चौकी की तरफ बढ़ रहे थे। इसकी तसवीरें मंगलवार 8 सितंबर को सामने आईं। चीनी सैनिकों ने लद्दाख के रेकिन ला इलाके में रणनीतिक तौर पर अहम मुखपारी चोटी से भारतीय सैनिकों को हटाने की कोशिश की थी। वे रॉड, भाले और धारदार हथियारों से लैस होकर भारतीय चौकी की तरफ बढ़ रहे थे। चीनी सैनिकों को जब इंडियन आर्मी ने रोका तब उन्होंने हमारे सैनिकों को डराने के लिए 10-15 राउंड फायरिंग भी की।

पैंगोंग झील के दक्षिण किनारे पिछले तीन दिनों से चीनी सैनिक इस तरह टुकड़ी में भारत की फॉरवर्ड पोजिशन के नजदीक आने की कोशिश कर रहे हैं। अभी भी रेजांग ला के पास की चोटियों के करीब भारत और चीन के सैनिक आमने-सामने हैं। मौके पर तनाव चरम पर है। भारतीय सैनिक पीएलए की किसी भी हिमाकत का जवाब देने के लिए पूरी तरह तैयार है।

इससे पहले सोमवार देर रात चीन ने उल्टा आरोप लगाया कि पैंगोंग झील के दक्षिण किनारे एलएसी पर भारतीय सेना ने फायरिंग की। चीन के वेस्टर्न थिएटर कमांड के कमांडर की तरफ से जारी बयान में कहा गया कि यह घटना 7 सितंबर यानी सोमवार को हुई। चीन के मुताबिक भारतीय सेना ने बातचीत की कोशिश कर रहे चीन बॉर्डर गार्ड के लोगों पर वॉर्निंग शॉट फायर किए और फिर चीन बॉर्डर गार्ड के जवानों ने हालात काबू करने के लिए जरूरी कदम उठाए। चीन ने आरोप लगाया कि भारतीय सेना ने शेनपाओ की पहाड़ी पर एलएसी क्रॉस की और आरोप लगाया कि भारत ने द्विपक्षीय समझौतों का उल्लंघन किया है। इससे क्षेत्र में तनाव और गलतफहमी बढ़ेगी। चीनी सेना के वेस्टर्न थिएटर कमांड के कमांडर की तरफ से कहा गया कि हम भारतीय पक्ष से मांग करते हैं कि वह खतरनाक कदमों को रोके और फायरिंग करने वाले शख्स को सजा दे और सुनिश्चित करें कि ऐसी घटना फिर से ना हो।

भारत और चीन के बीच 1996 में हुए समझौते के मुताबिक चीन और भारत में से कोई भी एलएसी के 2 किलोमीटर के दायरे में न फायरिंग कर सकता है न ही कोई ब्लास्ट कर सकता है। एलएसी पर शांति बनी रहे इसके लिए 1993, 1996 और 2013 में समझौते हुए। इसमें प्रोटोकॉल तय किए गए कि हालात खराब होने पर किस तरह बातचीत के जरिए इसे सुलझाया जाएगा। लेकिन 15 जून को गलवान में भारत और चीन के सैनिकों के बीच हुई हिंसक झड़प के बाद भारत की तरफ से साफ कर दिया गया था कि लोकल कमांडर को पूरी छूट दी गई है और वह स्थिति के हिसाब से फैसला ले सकते हैं। गलवान में भारत के 20 सैनिक शहीद हुए जिसके बाद यह सवाल उठने लगा था कि सैनिकों को फायरिंग की इजाजत क्यों नहीं दी गई। जिसके बाद देश की टॉप लीडरशिप की तरफ से और आर्मी की तरफ से भी साफ किया गया कि चीन से निपटने के लिए लोकल कमांडर हालात के हिसाब से फैसला ले सकते हैं।

अब निर्णायक युद्ध अथवा निर्णायक वार्ता की आवश्यकता है। जबतक  सीमा विवाद नहीं सुलझ जाता तबतक भारत और के बीच यह चूहे बिल्ली का खेल चलता ही रहेगा।

 

2 Comments
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