केजरीवाल ने कन्हैया को धीरे से दिया जोर का झटका

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-देवेंद्र गौतम

पुस्तकः विश्व की प्राचीनतम सभ्यता लेखकः पं. अनूप कुमार वाजपेयी,कई पुरस्कारों से पुरस्कृत समीक्षा प्रकाशन, दिल्ली, मुजफ्फरपुर, मूल्य-2000 रुपये लेखक ने राजमहल पहाड़ियों और चट्टानों पर संसार के प्राचीनतम आदिमानव के पदचिन्ह ढूंढ निकाले। पता-वाजपेयी निलयम, नया पारा, दुमका झारखंड

पुस्तकः विश्व की प्राचीनतम सभ्यता लेखकः पं. अनूप कुमार वाजपेयी,कई पुरस्कारों से पुरस्कृत समीक्षा प्रकाशन, दिल्ली, मुजफ्फरपुर, मूल्य-2000 रुपये लेखक ने राजमहल पहाड़ियों और चट्टानों पर संसार के प्राचीनतम आदिमानव के पदचिन्ह ढूंढ निकाले। पता-वाजपेयी निलयम, नया पारा, दुमका झारखंड

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कन्हैया सहित जेएनयू के 10 पूर्व छात्रों के खिलाफ देशद्रोह के मुकदमे की अनुमति दे दी है। यह फाइल एक साल में दिल्ली सरकार के पास विचाराधीन थी। उसमें कन्हैया, उमर खालिद और अनिर्बान सहित 10 लोग आरोपी हैं। उल्लेख्य है कि 9 फरवरी 2016 को जेएनयू में अफजल गुरु और मकबूल बट की फांसी के खिलाफ एक कार्यक्रम आयोजित किया गया था जिसमें देशविरोधी नारे के साथ जुलूस निकाला गया था। कन्हैया उस समय जेएनयू छात्रसंघ के अध्यक्ष थे। अफजल गुरु संसद पर हमले के दोषी थे। इस मामले में कन्हैया, उमर खालिद और अनिर्बान भट्टाचार्य के खिलाफ मामला दर्ज किया गया था। लेकिन कोर्ट ने उन्हें जमानत दे दी थी। दिल्ली पुलिस ने 14 जनवरी को इस मामले की चार्जशीट कोर्ट में दाखिल कर दी थी। लेकिन दिल्ली सरकार की अनुमति के अभाव में आगे की कार्रवाई रुकी हुई थी। दिल्ली की एक अदालत ने इस मामले में दिल्ली सरकार को 3 अप्रैल तक स्टेटस दाखिल करने का आदेश दिया था। इसी के मद्देनज़र केजरीवाल सरकार ने अपनी अनुमति दे दी।

अब इस मामले की अदालती कार्यवाही शुरू होगी। आरोपियों की जमानत बरकरार रहेगी या उनकी गिरफ्तारी होगी, कहना कठिन है। कानूनी प्रक्रिया लंबे समय तक चलेगी। पुलिस दोष साबित करने के लिए अपने साक्ष्य प्रस्तुत करेगी और आरोपी अपने बचाव में अपने सबूत और तर्क पेश करेंगे। एक अदालत का निर्णय आएगा। उसे अगली अदालत मे चुनौती दी जाएगी। अंतिम निर्णय आने के कई वर्ष निकल जाएगें। इस बीच हर  सार्वजनिक सभा में इस मुकदमे का जिक्र होगा। कन्हैया के राजनीतिक भविष्य पर इससे एक बड़ा झटका लगेगा। भाजपा के बयानवीरों के लिए एक नया मुद्दा मिल गया। इससे दिल्ली हिंसा से लोगों का ध्यान हटाने में मदद मिलेगी। बिहार चुनाव का समीकरण भी बदल सकता है। कन्हैया बिहार में संविधान बचाओ, नागरिकता बचाओ रैलियां कर रहे थे। उनमें काफी भीड़ भी जुट रही थी। प्रशांत किशोर उनकी बढ़ती लोकप्रियता को देखते हुए उन्हें बड़ी भूमिका में लाना चाहते थे। इस मामले के राजनीतीकरण से कन्हैया की राजनीतिक गति बरकरार रह सकती है। जानकार लोगों का मानना है कि उनका यह काम भाजपा के प्रवक्ता ही कर देंगे। उनकी बातों से कुछ लोग उत्साहित होते हैं तो कुछ लोग मजाक में भी लेते हैं। वे बोलेंगे तो समाज के एक हिस्से का समर्थन मिल जाएगा।

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