न्यायिक जांच के घेरे में पैगासस जासूसी कांड

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-देवेंद्र गौतम

पुस्तकः विश्व की प्राचीनतम सभ्यता लेखकः पं. अनूप कुमार वाजपेयी,कई पुरस्कारों से पुरस्कृत समीक्षा प्रकाशन, दिल्ली, मुजफ्फरपुर, मूल्य-2000 रुपये लेखक ने राजमहल पहाड़ियों और चट्टानों पर संसार के प्राचीनतम आदिमानव के पदचिन्ह ढूंढ निकाले। पता-वाजपेयी निलयम, नया पारा, दुमका झारखंड

पुस्तकः विश्व की प्राचीनतम सभ्यता लेखकः पं. अनूप कुमार वाजपेयी,कई पुरस्कारों से पुरस्कृत समीक्षा प्रकाशन, दिल्ली, मुजफ्फरपुर, मूल्य-2000 रुपये लेखक ने राजमहल पहाड़ियों और चट्टानों पर संसार के प्राचीनतम आदिमानव के पदचिन्ह ढूंढ निकाले। पता-वाजपेयी निलयम, नया पारा, दुमका झारखंड

सुप्रीम कोर्ट ने पेगासस जासूसी कांड की न्यायिक जांच का आदेश दे दिया है। इसके लिए कमेटी भी गठित हो चुकी है। इस मामले पर सरकार के तर्क और विस्तृत हलफनामा देने से इनकार करना कोर्ट को मंजूर नहीं हुआ। कोर्ट का कहना है कि राष्ट्रीय सुरक्षा के नाम पर कुछ भी करने की इजाजत नहीं दी जा सकती। इजरायल के राजदूत ने इसे भारत का आंतरिक मामला करार दिया है और अपनी सरकार का बचाव किया है।  केंद्र की मोदी सरकार ने अभी तक यह साफ नहीं किया कि उसने जासूसी का साफ्टवेयर खरीदा था या नहीं। उसका इस्तेमाल किया था या नहीं। यह साफ्टवेयर सिर्फ सरकारों को बेची जाती है। इजरायल सरकार को पास एनएसओ ग्रूप से साफ्टवेयर खरीदने वाले देशों की कोई सूची है या नहीं अभी इस संबंध में कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। इस खुलासे से कई देशों के हुक्मरानों ने नाराजगी व्यक्त की थी। कई देशों ने मामले की जांच के आदेश दिए थे। लेकिन भारत सरकार मौन है। कोर्ट में मामला चल रहा है लेकिन सरकारी स्तर पर कोई जांच नहीं हो रही है। मोदी सरकार इसे अपनी सरकार को बदनाम करने की अंतर्राष्ट्रीय साजिश करार दे रही है। यदि मोदी सरकार भी फ्रांस और इजरायल की तरह इस मामले की जांच का आदेश दे देती संभवतः इतना हंगामा नहीं मचता। लेकिन उसके बैकफुट पर आकर सुरक्षात्मक होने के कारण आमजन को भी लग रहा है कि दाल में कुछ न कुछ काला है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह जब गुजरात के मुख्यमंत्री और गृहमंत्री थे तो उनपर कई मामलों में जासूसी के आरोप लगे थे। अब पैगासस प्रकरण के बाद जासूसी को उनकी उनकी कार्यशैली का हिस्सा माना जाने लगा है।

पैगासस एक जासूसी का साफ्टवेयर है जिसे इजरायली कंपनी एनएसओ ग्रूप ने विकसित किया है। इसे मेल, अथवा मैसेज के जरिए किसी भी मोबाइल में प्रत्यारोपित किया जा सकता है। यह मोबाइल के स्पीकर और कैमरे को हैक कर लेता है। इसके बाद मोबाइल में संग्रहित सारी सूचनाएं और उसके जरिए होने वाला सारी बातें रिकार्ड की जा सकती हैं। एनएसओ ग्रूप का कहना है कि उसने इसे आतंकवादी और आपराधिक गिरोहों पर निगरानी के लिए बनाया गया है और इसका सौदा सिर्फ सरकारों के साथ किया जाता है। यह काफी खर्चीला सॉफ्टवेयर है। इसका लायसेंस लेने में 10 करोड़ के करीब खर्च होते हैं और प्रति व्यक्ति जासूसी पर करीब एक करोड़ रुपये प्रतिमाह खर्च होते हैं। दावा किया जा रहा है कि 2017 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इजरायल यात्रा के दौरान भारत ने इसकी लायसेंस लिया था और इसके जरिए भारत के 300 लोगों की निगरानी की जा रही थी। उनमें 40 पत्रकार, विपक्षी दलों के नेता, सामाजिक कार्यकर्ता और यहां तक कि सत्तारूढ़ दल के कुछ मंत्रियों की भी जासूसी की जा रही थी। अभी तक जो नाम सामने आए हैं उसमें कोई आतंकवादी या अपराधी सरगना शामिल नहीं है।

जासूसी के खुलासे के बाद यह प्रश्न स्वाभाविक रूप से उठ रहा है कि वित्तीय संकट का रोना रोने वाली मोदी सरकार जासूसी के लिए करोड़ों-करोड़ का भुगतान कहां से कर रही थी। उसके पास सरकारी कर्मचारियों को उनके देय लाभों के लिए पैसा नहीं है तो पैगासस जासूसी के लिए कौन सा कारू का खजाना खुला हुआ था जिससे 300 लोगों की जासूसी पर 300 करोड़ रुपये प्रतिमाह खर्च किए जा रहे थे। इससे राष्ट्र का कौन सा हित साधा जा रहा था। दूसरी बात यह कि यदि आरोप सही है तो सवाल है कि राष्ट्रवाद का प्रमाणपत्र बांटने वाली सरकार ने अपने देश के महत्वपूर्ण लोगों की निजता का सौदा एक विदेशी कंपनी से क्यों किया?

एमनेस्टी इंटरनेशनल और अंतर्राष्ट्रीय पत्रकारों के एक खोजी दल ने खुलासा किया था कि इजराइली जासूसी सॉफ्टवेयर पेगासस के जरिए भारत के दो मंत्रियों, 40 से अधिक पत्रकारों, विपक्ष के तीन नेताओं सहित बड़ी संख्या में कारोबारियों और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं के 300 से अधिक मोबाइल नंबर हैक किए गए। हालांकि सरकार ने अपने स्तर से विशेष लोगों की निगरानी संबंधी आरोपों को खारिज करती रही है।

इस रिपोर्ट को भारत के न्यूज पोर्टल ‘द वायर’ के साथ-साथ वाशिंगटन पोस्ट, द गार्डियन और ले मोंडे सहित 16 अन्य अंतर्राष्ट्रीय प्रकाशनों ने पेरिस के मीडिया गैर-लाभकारी संगठन फॉरबिडन स्टोरीज और एमनेस्टी इंटरनेशनल द्वारा की गई एक जांच के लिए मीडिया पार्टनर के रूप में प्रकाशित किया था। यह जांच विश्व भर से 50,000 से ज्यादा फोन नंबरों की लीक हुई सूची पर आधारित है। माना जाता है कि इजरायली निगरानी कंपनी एनएसओ ग्रुप के पेगासस सॉफ्टवेयर के माध्यम से इनकी हैकिंग की गई है। हालांकि सरकार ने मीडिया रिपोर्टों को खारिज करते हुए कहा है कि भारत एक लचीला लोकतंत्र है और वह अपने सभी नागरिकों के निजता के अधिकार को मौलिक अधिकार के तौर पर सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है। साथ ही सरकार ने जांचकर्ता, अभियोजक और ज्यूरी की भूमिका निभाने की कोशिश संबंधी मीडिया रिपोर्ट को खारिज कर दिया था। देखना है सुप्रीम कोर्ट की जांच कमेटी किस निष्कर्ष पर पहुंचती है।

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