बाढ़ और कोरोना के प्रकोप के बीच राममंदिर शिलान्यास

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-देवेंद्र गौतम

पुस्तकः विश्व की प्राचीनतम सभ्यता लेखकः पं. अनूप कुमार वाजपेयी,कई पुरस्कारों से पुरस्कृत समीक्षा प्रकाशन, दिल्ली, मुजफ्फरपुर, मूल्य-2000 रुपये लेखक ने राजमहल पहाड़ियों और चट्टानों पर संसार के प्राचीनतम आदिमानव के पदचिन्ह ढूंढ निकाले। पता-वाजपेयी निलयम, नया पारा, दुमका झारखंड

पुस्तकः विश्व की प्राचीनतम सभ्यता लेखकः पं. अनूप कुमार वाजपेयी,कई पुरस्कारों से पुरस्कृत समीक्षा प्रकाशन, दिल्ली, मुजफ्फरपुर, मूल्य-2000 रुपये लेखक ने राजमहल पहाड़ियों और चट्टानों पर संसार के प्राचीनतम आदिमानव के पदचिन्ह ढूंढ निकाले। पता-वाजपेयी निलयम, नया पारा, दुमका झारखंड

भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एक बार जो ठान लेते हैं उससे पीछे नहीं हटते। उन्होंने ठान लिया कि लॉक़डाउन के बीच राम मंदिर के निर्माण के लिए भूमि के समतलीकरण का काम होगा, तो हुआ। कोई नियम उसके आड़े नहीं आया। कोरोना का संक्रमण बढ़ता रहा, प्रवासी मजदूर पैदल घरों की ओर लौटते रहे। पूरे देश की आर्थिक गतिविधिया बंद रहीं। लेकिन अयोध्या में भूमि के समतलीकरण का काम चलता रहा। अब जब कोरोना के कारण प्रतिदिन 5 सौ से एक हजार के बीच मौतें हो रही हैं। 50 हजार से ज्यादा लोग संक्रमित हो रहे हैं। देश के कई राज्यों में बाढ़ की तांडव लीला चल रही है। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह कोरोना पाजिटिव होकर अस्पताल में प़ड़े हैं। कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद, पेट्रोलियम मंत्री धर्मेंद्र प्रधान, पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह, तमिल नाडू के राज्यपाल क्वारंटाइन में हैं तो 5 अगस्त को अयोध्या में पीएम मोदी के हाथों राममंदिर के निर्माण के लिए भूमि पूजन का कार्यक्रम होना है जो तमाम बाधाओं के बाद भी होकर रहेगा। इसके लिए अयोध्या को स्वर्ण नगरी की तरह सजाया गया है। मानो दीवाली का त्योहार हो। जहां तक बाढ़ का सवाल है उसका प्रकोप अयोध्या समेत आस-पास के जिलों में है। हजारों लोगों के घर डूब गए हैं उन्हें सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है। लेकिन आयोजन तो आयोजन है वह भी सरकारी तो उसे लोगों की परेशानियों से क्या लेना-देना। ज्योतिषीय आधार पर भी शिलान्यास कार्यक्रम के मुहूरत को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं। लेकिन लोगों को याद होगा कि पिछले साल 5 अगस्त को ही जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाया गया था। उसी तारीख को शिलान्यास करने का मोदी जी ने निर्णय लिया तो लिया। मंदिर का शिलान्यास होगा और पूरे धूमधाम से होगा। श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने भारत से प्रमुख 36 संत परंपराओं के 135 संत-महात्माओं समेत 150 लोगों को इस कार्यक्रम में आमंत्रित किया है।

भाजपा के कई शीर्ष नेताओं समेत दर्जनों सांसद-विधायक भी कोरोना संक्रमण की चपेट में आ गए हैं। उत्तर प्रदेश में भी तेजी से संक्रमण फैल रहा है लेकिन अयोध्या में इसकी हल्की सी चिंता भी नहीं देखी जा रही है। पूरा शहर राममय हो चुका है। मंदिरों का रंग-रोगन हो रहा है। केसरिया पताके लहरा रहे हैं और जगह-जगह बंदनवार और तोरण द्वारों की सजावट की गई है। इसके साथ ही सोमवार से ही भूमिपूजन का तीन दिवसीय अनुष्ठान शुरू हो गया है जो 5 अगस्त तक चलेगा।

 रविवार को राज्य सरकार में कैबिनेट मंत्री कमला रानी वरुण की संक्रमण के चलते हुई मौत ने संक्रमण की आशंकाओं और उससे उपजे भय को और भी गहरा कर दिया है। अयोध्या शहर में भी कोरोना संक्रमण की रफ्तार राज्य के अन्य हिस्सों जैसी ही तेजी से बढ़ती जा रही है। अयोध्या में राम जन्मभूमि के पांच पुजारियों में से दो पुजारी भी कोरोना संक्रमित हो चुके हैं जबकि मुख्य पुजारी सतेंद्र दास की कोरोना रिपोर्ट निगेटिव आने के बावजूद उन्हें अभी रामलला की पूजा से दूर रखा गया है। इसके अलावा रामलला की सेवा में तैनात कई पुलिसकर्मियों को भी कोरोना संक्रमण हो चुका है और सभी को क्वारंटाइन किया गया है।

दूसरी ओर, आरएसएस, विश्व हिन्दू परिषद और बीजेपी के इस बहुप्रतीक्षित कार्यक्रम में आमंत्रित आगंतुकों की सूची को लेकर भी कई तरह के विवाद सामने आ रहे हैं। राम मंदिर आंदोलन से जुड़े तमाम वरिष्ठ लोगों को कार्यक्रम में आमंत्रित नहीं किया गया है। लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी, कल्याण सिंह, उमा भारती जैसे राममंदिर आंदोलन के कर्ता-धर्ता रहे तमाम लोगों को कार्यक्रम में नहीं बुलाया गया है। हालांकि कुछ लोगों के लिए इसकी वजह उनकी अधिक उम्र को बताया गया है लेकिन उमा भारती न बुलाए जाने की आशंकाओं के बीच बीजेपी पर बरस पड़ी हैं। उन्होंने एक कार्यक्रम में सीधे तौर पर कह दिया है कि भगवान राम बीजेपी की बपौती नहीं हैं।

इस बीच, पिछले कुछ दिनों से जगह-जगह हो रही बारिश और नेपाल बैराज से छोड़े गए लाखों क्यूसेक पानी की वजह से सरयू नदी का जलस्तर खतरे के निशान से 108 सेंटीमीटर ऊपर पहुंच गया है। बाढ़ से अयोध्या, गोंडा, बाराबंकी, बहराइच समेत पूर्वांचल के 15 जिलों के करीब 350 गांवों में लाखों लोग प्रभावित हुए हैं। बाढ़ प्रभावित इलाकों में प्रशासन लगातार लोगों को खाने-पीने की चीजें मुहैया करा रहा है। राहत आयुक्त संजय गोयल के मुताबिक इन जिलों के सभी वरिष्ठ अधिकारी बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का दौरा कर रहे हैं और बाढ़ से प्रभावित जिलों में 24 घंटे सातों दिन कंट्रोल रूम का संचालन किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राहत कार्यों को प्रभावी ढंग से संचालित करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने जिलाधिकारियों को फसल क्षति का आकलन कर प्रभावित किसानों को तत्काल राहत पहुंचाने के निर्देश दिए हैं। उत्तर प्रदेश का मुख्यमंत्री होने के नाते योगी आदित्यनाथ की राज्य के तमाम मुद्दों पर जवाबदेही तो बनती है लेकिन अयोध्या के इवेंट के संपन्न होने तक वे कुछ कर नहीं सकते। उनके लिए सिर्फ राम मंदिर का शिलान्यास एकमात्र जिम्मेदारी नहीं है। इसके बाद अगर महामारी का विस्फोट हुआ तो से नियंत्रित करना भी उन्हीं का काम होगा। प्रधानमंत्री मोदी को इन सब बातों से कुछ भी लेना देना नहीं है। उनका एकमात्र लक्ष्य मंदिर में अपने नाम की पट्टिका लगावा देना है ताकि आने वाला पीढ़ियां यही समझें कि राम मंदिर की लड़ाई लड़ने से लेकर इसके निर्माण तक का काम मोदी जी ने किया है। आंदोलन चाहे जिन्होंने किया हो लेकिन मोदी जी को श्रेय लूटने से कौन रोक सकता है।

 

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