महिला आइएएस के इस्तीफे से बवाल

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-देवेंद्र गौतम

पुस्तकः विश्व की प्राचीनतम सभ्यता लेखकः पं. अनूप कुमार वाजपेयी,कई पुरस्कारों से पुरस्कृत समीक्षा प्रकाशन, दिल्ली, मुजफ्फरपुर, मूल्य-2000 रुपये लेखक ने राजमहल पहाड़ियों और चट्टानों पर संसार के प्राचीनतम आदिमानव के पदचिन्ह ढूंढ निकाले। पता-वाजपेयी निलयम, नया पारा, दुमका झारखंड

पुस्तकः विश्व की प्राचीनतम सभ्यता लेखकः पं. अनूप कुमार वाजपेयी,कई पुरस्कारों से पुरस्कृत समीक्षा प्रकाशन, दिल्ली, मुजफ्फरपुर, मूल्य-2000 रुपये लेखक ने राजमहल पहाड़ियों और चट्टानों पर संसार के प्राचीनतम आदिमानव के पदचिन्ह ढूंढ निकाले। पता-वाजपेयी निलयम, नया पारा, दुमका झारखंड

हरियाणा कैडर की महिला आइएएस अधिकारी रानी नागर ने वरीय नौकरशाहों के उत्पीड़न से तंग आकर इस्तीफा दे दिया। हालांकि मुख्यमंत्री ने उनका इस्तीफा स्वीकार नहीं किया है। उन्हें दूसरे कैडर में भेजने का प्रस्ताव है। इसे वे स्वीकार करेंगी या नहीं कहना कठिन है। संभवतः यह डैमेज कंट्रोल का प्रयास हो सकता है। वे चंडीगढ़ में सामाजिक न्याय एवं आधिकारिता विभाग में एडिशनल सेक्रेट्री थी। उनकी जान को खतरा था। उन्हें तरह-तरह से परेशान किया जा रहा था। वरिष्ठ नौकरशाहों की उनपर बुरी नज़र थी। एक आइएस अधिकारी होने के बावजूद उन्हें सरकारी क्वार्टर नहीं दिया गया था। एक गेस्ट हाउस के कमरे में अपनी बहन के साथ रह रही थीं। उन्होंने सरकार को अपने उत्पीड़न और समस्याओं के संबंध में कई पत्र लिखे थे। लेकिन कोई कार्रवाई तो दूर किसी पत्र का जवाब तक नहीं दिया गया। लॉकडाउन के दौरान उन्होंने घोषणा कर दी थी कि कर्फ्यू खत्म होने के बाद इस्तीफा दे देंगी। उन्होंने इस्तीफा दे भी दिया। लेकिन संवेदनहीन ठक्कर सरकार को इससे कोई फर्क नहीं पड़ा। मोदी सरकार की भी संवेदना नहीं जागी। नौकरशाही गृह मंत्रालय के अंतर्गत आता है। लेकिन केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के लिए यह उनकी प्राथमिकता का विषय नहीं था।  रानी नागर के मुताबिक ओपी सिंह नामक एक कमिश्नर स्तर के आइपीएस अधिकारी 2018 से उनके पीछे पड़े हुए थे। अंबाला में मुख्यमंत्री के कार्यक्रम के दौरान उन्हें गंदे इशारे किए थे और बात न मानने पर उनके पीछे असामाजिक तत्वों को लगा दिया था जो तरह-तरह से उन्हें परेशान कर रहे थे। उनके वर्तमान विभागीय प्रमुख सुनील कुमार गुलाटी की भी उनपर बुरी नज़र थी। वे भी परेशान करने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे थे।

मोदी सरकार ने 2014 में सत्ता में आने के बाद बेटी पढ़ाओ, बेटी बचाओ का नारा दिया था। इत्तेफाक की बात है रानी नागर 2014 में ही यूपीएससी की प्रतियोगिता निकाल कर आइएएस बनी थीं। मोदी सरकार के नारे से उम्मीद बंधी थी कि इस सरकार के कार्यकाल में महिला उत्पीड़न की घटनाओं में कमी आएगी। महिला सशक्तीकरण की गति तेज़ होगी। लेकिन हुआ ठीक इसके उल्टा। अब एक महिला आइएएस जब स्वयं को असुरक्षित महसूस कर सकती है। अधिकारियों के दुर्व्यवहार और सरकार की उदासीनता से तंग आकर इस्तीफा देने को विवश हो सकती है तो इस सरकार में आम महिलाएं कितनी सुरक्षित होंगी, अंदाजा लगाया जा सकता है। दूसरे, तीसरे और चौथे दर्जे के पदों पर काम करने वाली महिलाओं को क्या कुछ झेलना पड़ता होगा, समझा जा सकता है। भाजपा सरकार की नज़र में महिलाओं की क्या कद्र है, कुलदीप सेंगर और चिन्मयानंद के मामले में स्पष्ट हो चुका है। सरकार की प्राथमिकता अपनी पार्टी के दुष्कर्मियों को बचाना है। यह बात पहले ही उजागर हो चुकी है। इस देश की महिलाएं इतनी असुरक्षित पहले कभी नहीं थीं जितनी मौजूदा सरकार के कार्यकाल में हैं। पहले कम से कम बलात्कारियों के खिलाफ कार्रवाई होती थी। अब तो पूरा सरकारी तंत्र उनके बचाव में खड़ा हो जाता है।

रानी नागर को ओपी सिंह नामक आइपीएस और सुनील कुमार गुलाटी नामक आइएएस अधिकारी ने इतना परेशान किया कि उसे अपने पद से इस्तीफा देने का निर्णय लेना पड़ा। हरियाणा सरकार को फिर भी शर्म नहीं आई। इस्तीफा देने के बाद भी गाजियाबाद स्थित उनके घर जाने के लिए ऐसी कार दी गई जो रास्ते में ही खराब हो गई। अब रानी नागर के इस्तीफे का मामला तूल पकड़ रहा है। बसपा प्रमुख मायावती ने ठक्कर सरकार की इस मामले को लेकर तीखी आलोचना की है। गुर्जर समाज का गुस्सा सातवें आसमान पर है। दलित नेता चंद्रशेखर आजाद रावण ने उत्पीड़न करने वाले अधिकारियों के होश ठिकाने लाने की चेतावनी दे दी है। जब सरकारी तंत्र अपनी जिम्मेदारी से किनारा करता है तो सामाजिक शक्तियां न्याय की आवाज़ बुलंद करती हैं। अभी लॉकडाउन में प्रतिक्रियाएं सिर्फ मीडिया पर आ रही हैं लेकिन स्थिति सामान्य होने के बाद हरियाणा सरकार को एक बड़े जन आंदोलन से निपटने की तैयारी कर लेनी होगी। यह मामला तूल पकड़ेगा और इसमें मोदी सरकार की फजीहत होगी और हरियाणा सरकार की भी।

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