हरियाणा पुलिस की शर्मनाक हरकत

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-देवेंद्र गौतम

पुस्तकः विश्व की प्राचीनतम सभ्यता लेखकः पं. अनूप कुमार वाजपेयी,कई पुरस्कारों से पुरस्कृत समीक्षा प्रकाशन, दिल्ली, मुजफ्फरपुर, मूल्य-2000 रुपये लेखक ने राजमहल पहाड़ियों और चट्टानों पर संसार के प्राचीनतम आदिमानव के पदचिन्ह ढूंढ निकाले। पता-वाजपेयी निलयम, नया पारा, दुमका झारखंड

पुस्तकः विश्व की प्राचीनतम सभ्यता लेखकः पं. अनूप कुमार वाजपेयी,कई पुरस्कारों से पुरस्कृत समीक्षा प्रकाशन, दिल्ली, मुजफ्फरपुर, मूल्य-2000 रुपये लेखक ने राजमहल पहाड़ियों और चट्टानों पर संसार के प्राचीनतम आदिमानव के पदचिन्ह ढूंढ निकाले। पता-वाजपेयी निलयम, नया पारा, दुमका झारखंड

भाजपा सरकार अपनी आलोचना कत्तई बर्दाश्त नहीं करती। जो कोई भी उसे आईना दिखाने की कोशिश करता है उसे सबक सिखाने की कोशिश में लग जाती है। उसके शासन वाले राज्यों में पुलिस पूरी तरह गुंडों के गिरोह में तब्दील हो चुकी है। हरियाणा पुलिस भी बर्बरता की हदें पार कर रही हैं। हरियाणा के पलवल जिले में एक गांव है पृथला। यहां कांग्रेस के एक लोकप्रिय नेता राकेश तंवर रहते हैं। वे सोशल मीडिया पर काफी सक्रिय हैं। फेसबुक, यू-ट्यूब जैसे प्लेटफार्मों पर वे वीडियो के जरिए मोदी सरकार की धज्जियां उड़ाते रहते हैं। उनके अधिकांश वीडियो वायरल होकर लाखों दर्शकों तक पहुंच जाते हैं। हजारों लोग उन्हें साझा करते हैं। वे हमेशा ठोस तथ्यों के आधार पर अपनी बात रखते हैं इसलिए उनके वीडियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की कोई जगह नहीं बचती। इससे खार खाकर हरियाणा सरकार ने दूसरा रास्ता अपनाया।

अभी तीन दिन पहले की बात है। सुबह-सुबह राकेश तंवर के घर पर अचानक बिना किसी सूचना, बिना किसी शिकायत के डीएसपी सुरेश कुमार, थाना प्रभारी जंगशेर सिंह दर्जनों गाड़ियों पर करीब डेढ़ सौ जवानों के साथ जेसीबी मशीन लेकर पहुंचे और उनके घर की तरफ जानेवाली सड़क को बंद करने का प्रयास करने लगे। उनमें से काफी पुलिस अधिकारियों ने मास्क भी नहीं लगाया था। सोशल डिस्टेंसिंग की भी उन्होंने धज्जियां उड़ा रखी थीं। पुलिस के पास न किसी न्यायालय का आदेश था न कोई लिखित शिकायत। पुलिस के मुताबिक उसे शिकायत मिली थी कि सड़क का पांच फुट हिस्सा विवादित है। यह एक प्रायोजित मामला था। भूमि विवाद के मामलों में न्यायालय का आदेश होने पर पटवारी अथवा तहसीलदार को बुलाकर ज़मीन की मापी कराई जाती है और इसके बाद कोर्ट को रिपोर्ट की जाती है। सीधे जेसीबी लाकर धौंस और गुंडागर्दी के जरिए कब्जा करना अंडरवर्ल्ड के अपराधियों का काम होता है, पुलिस का नहीं। लेकिन जब केंद्र में अमित शाह गृहमंत्री हों, नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री हों और राज्य में खट्टर सरकार हो और किसी को सबक सिखाना हो तो पुलिस और अपराधी गिरोह में फर्क नहीं रह जाता। पुलिस न्यायपालिका का काम भी अपने हाथ में ले सकती है और भाड़े के गुंडों की भूमिका में भी आ सकती है। ऊपर का आदेश हो तो कानून व्यवस्था का कोई मायने नहीं रह जाता।

स्थानीय ग्रामीणों के मुताबिक यह सरकारी ज़मीन पर बनी 40 साल पुरानी पक्की सड़क है। आम रास्ता है। इसका इस्तेमाल आसपास की कई कंपनियों के कर्मचारी करते हैं। पुलिस कानून को हाथ में लेकर इसे बंद करने के इरादे से आई थी लेकिन ग्रामीणों के विरोध के कारण पुलिस अपनी मनमानी नहीं कर पाई तो खीजकर बिना किसी वारंट के राकेश तंवर, उनकी पत्नी रेणु चौधरी और दो मासूम बच्चों के अलावा जसपाल सोरोट , जय सिंह और गांव के कुछ अन्य युवकों को पकड़ ले गई। थाने में उनके साथ मारपीट की। बच्चों के साथ भी मारपीट दुर्व्यवहार और गाली-गलौच किया।

इस हमले के पीछे मुख्य मकसद सरकार के खिलाफ बोलने वाले विपक्षी नेता को डरा-धमकाकर सरकार की आलोचना करने से रोकना था। लेकिन श्री तवंर के समर्थकों की इतनी बड़ी तादाद है कि उनसे पंगा लेना सरकार के लिए महंगा सौदा हो सकता है। वहीं राकेश तँवर के अनुसार सरकार की दमनकारी मानसिकता के खिलाफ उनकी आवाज न धीमी होगी न ही सच बोलने के उनके तेवर बदलेंगे।

 

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