कोरोना का सबसे खतरनाक रूप सामने आया

0 194

कोलकाता।कोरोना वायरस के कारण मौतों के आंकड़े में फर्क सरकारों की सतर्कता या लापरवाही से नहीं उसके विभिन्न रूपों की मारक क्षमता के कारण होता है। भारत के नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ बायोमेडिकल जिनोमिक्स ने कोरोना वायरस पर एक बड़ा शोध कर उसके सबसे खतरनाक रूप का पता लगाया है। कोलकाता से 50 किलोमीटर दूर कल्याणी स्थित इस इंस्टीट्यूट में कोरोना वायरस पर हुए रिसर्च में ये पता चला है कि खुद में लगातार बदलाव कर कोरोना वायरस 11 अलग-अलग टाइप में बदल चुका है।  इसी में इसका एक रूप है A2a. शोध से पता चला है कि यह A2a टाइप कोरोना वायरस का सबसे खतरनाक रूप है। अभी कोरोना का यही रूप पूरी दुनिया में सबसे ज्यादा संक्रमण फैला रहा है।

पुस्तकः विश्व की प्राचीनतम सभ्यता लेखकः पं. अनूप कुमार वाजपेयी,कई पुरस्कारों से पुरस्कृत समीक्षा प्रकाशन, दिल्ली, मुजफ्फरपुर, मूल्य-2000 रुपये लेखक ने राजमहल पहाड़ियों और चट्टानों पर संसार के प्राचीनतम आदिमानव के पदचिन्ह ढूंढ निकाले। पता-वाजपेयी निलयम, नया पारा, दुमका झारखंड

पुस्तकः विश्व की प्राचीनतम सभ्यता लेखकः पं. अनूप कुमार वाजपेयी,कई पुरस्कारों से पुरस्कृत समीक्षा प्रकाशन, दिल्ली, मुजफ्फरपुर, मूल्य-2000 रुपये लेखक ने राजमहल पहाड़ियों और चट्टानों पर संसार के प्राचीनतम आदिमानव के पदचिन्ह ढूंढ निकाले। पता-वाजपेयी निलयम, नया पारा, दुमका झारखंड

नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ बायोमेडिकल जिनोमिक्स की रिसर्च में ये भी पता चला है कि कोरोना के बाकी वायरस के मुकाबले A2a वायरस का तेजी से ट्रांसमिशन होता है। इसी के चलते ये पूरी दुनिया में तेजी से फैल गया है।

A2a वायरस इंसान के फेफड़े में बड़े पैमाने पर घुसपैठ की क्षमता रखता है। पिछला सार्स वायरस, जिसने दस साल पहले 800 लोगों की जान ली थी और 8 हजार से ज्यादा लोगों को संक्रमित किया था, उसने भी इंसानों के फेफड़े में घुसने की क्षमता विकसित कर ली थी। हालांकि उसकी ये क्षमता A2a वायरस के मुकाबले काफी कम थी।

रिसर्च के मुताबिक पिछले 4 महीने में कोविड-19 वायरस के 10 प्रकार अपने पुराने ‘O’ टाइप के थे। मार्च के आखिरी सप्ताह से A2a ने पुराने वायरस की जगह लेनी शुरू की और इसके बाद ही यह पूरी दुनिया में तेजी से फैला। इसने दूसरे प्रकार के वायरस की जगह ले ली और अपने समू का सबसे ताकतवर प्रकार बन कर सामने आया।

इंस्टिट्यूट के शोधकर्ताओं ने आरएनए सीक्वेंस डेटा का इस्तेमाल किया। इस डेटा को कोविड-19 पर शोध कर रहे पूरी दुनिया के रिसर्चरों ने जारी किया था। 55 देशों से दिसंबर 2019 से 6 अप्रैल तक संकलित 3,600 कोरोना वायरस पर आरएनए सीक्वेंस का प्रयोग किया गया था। रिसर्च में ये बात भी सामने आई कि कोरोना वायरस को O, A2, A2a, A3, B, B1 और दूसरे टाइप में बांटा जा सकता है। अभी इस वायरस के 11 टाइप हैं। इसी में O टाइप भी है जो इसका पुराना प्रकार है और ये वुहान में पैदा हुआ था। संभवतः इसी कारण चीन और विश्व स्वास्थ्य संगठन इसके भावी स्वरूप और मारक क्षमता का अंदाज़ा नहीं लगा सके थे।

जाहिर है कोरोना के सबसे खतरनाक रूप का खुलासा हो चुका है। ऐसे में अब माना जा रहा है कि इसके बाद कोरोना के लिए वैक्सीन बनाने मे जुटे वैज्ञानिकों को बड़ी मदद मिल सकेगी।

 

Leave A Reply

Your email address will not be published.

%d bloggers like this: