तबलीगी जमात के जलसे से बढ़ा कोरोना का खतरा

एशिया के16 देशों और भारत के 19 राज्यों की सरकारें हाई अलर्ट पर

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देवेंद्र गौतम

पुस्तकः विश्व की प्राचीनतम सभ्यता लेखकः पं. अनूप कुमार वाजपेयी,कई पुरस्कारों से पुरस्कृत समीक्षा प्रकाशन, दिल्ली, मुजफ्फरपुर, मूल्य-2000 रुपये लेखक ने राजमहल पहाड़ियों और चट्टानों पर संसार के प्राचीनतम आदिमानव के पदचिन्ह ढूंढ निकाले। पता-वाजपेयी निलयम, नया पारा, दुमका झारखंड

पुस्तकः विश्व की प्राचीनतम सभ्यता लेखकः पं. अनूप कुमार वाजपेयी,कई पुरस्कारों से पुरस्कृत समीक्षा प्रकाशन, दिल्ली, मुजफ्फरपुर, मूल्य-2000 रुपये लेखक ने राजमहल पहाड़ियों और चट्टानों पर संसार के प्राचीनतम आदिमानव के पदचिन्ह ढूंढ निकाले। पता-वाजपेयी निलयम, नया पारा, दुमका झारखंड

आज पूरे दिन निजामुद्दीन में तबलीगी जमात का जलसा चर्चा का विषय बना रहा। यह इस्लामी शिक्षा और मजहबी प्रचार का सबसे बड़ा संगठन है जिसका आतंकवादी गतिविधियों से भी संबंध रहा है। 1926 में इसकी इस्लाम के प्रचार के लिए स्थापना हुई थी। 1 मार्च से 15 मार्च तक जलसा का आयोजन किया था जिसमें 16 देशों और भारत के 19 राज्यों के करीब 5 हजार लोग शरीक हुए थे। उसमें बाकी लोग तो वापस लौट गए लेकिन करीब 18 सौ लोग जनता कर्फ्यू और लॉकडाउन के कारण निकल नहीं सके।

सोशल जिस्टेंसिंग का पालन नहीं होने के कारण इस जलसे में कई लोग कोरोना संक्रमित हो गए। जो लोग निकल नहीं सके उनमें 24 लोगों के संक्रमित होने की पुष्टि हो चुकी है। शेष लोग आइसोलेशन में रखे गए हैं। उनकी जांच चल रही है। उनमें 10 लोगों की मौत हो चुकी है। उनमें एक दिल्ली में, छह तेलंगाना में, एक कश्मीर में हुई है। इस जलसे से रांची पहुंची एक मलेशियाई महिला संक्रमित पाई गई। उसे क्वारंटाइन में डाला गया है। वह किन-किन लोगों से मिली इसका पता लगाया जा रहा है। डर इस बात का है कि जलसे से वापस लौटे लोग जिस-जिस राज्य में गए हैं वहां पता नहीं कितना संक्रमण फैला चुके होंगे। 16 देशों और 19 राज्यों के लिए वे खतरा बन सकते हैं। भारत सरकार ने सभी संबंधित राज्यों को जलसे में शामिल लोगों की शिनाख्त कर क्वारंटाइन करने का निर्देश दिया है। डर इस बात का भी है कि उनके कारण कहीं भारत कोरोना संक्रमण के तीसरे चरण में न चला जाए। स्थिति को जल्द से जल्द नियंत्रित करने की कोशिश की जा रही है। फिलहाल जलसे का आयोजन करने वाले मौलाना के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर जांच की जा रही है। मौलाना से जलसे में शामिल लोगों की लिस्ट मांगी गई है।

पूरी दुनिया अभी कोरोना को लेकर हाई अलर्ट पर है। अधिकांश देशों में लॉकडाउन चल रहा है। मार्च महीने में जब जलसा शुरू हुआ तो दिल्ली में धारा-144 लागू था। भीड़ जुटाने पर प्रतिबंध था। सभी तरह के कार्यक्रम स्थगित अथवा रद्द कर दिए गए थे। लेकिन तबलीगी जमात के लोगों ने सारे नियमों को ताक़ पर रखकर जलसे का आयोजन किया। प्रशासन को इसकी सूचना तक नहीं दी। देश विदेश से लोग आते रहे और स्थानीय प्रशासन को इसकी भनक तक नहीं मिली। दुनिया के 199 देशों में हाहाकार मचा हुआ है और तबलीगी जमात मजहबी शिक्षा के लिए बेचैन है। जैसे वे धरती के नहीं किसी और ग्रह के वासी हों। जैसे वे मौत को गले लगाने को आतुर हों और किसी के जीने-मरने से कोई फर्क नहीं पड़ता हो। उन्हें कोरोना की कोई परवाह ही नहीं थी। संयुक्त अरब अमीरात ने कोरोना के कारण मक्का-मदीना तक को बंद कर दिया। जामा मस्जिद बंद है। सारे धर्मों के उपासना स्थल बंद हैं लेकिन जमात के लोग अपना जलसा बंद करने को तैयार नहीं थे। वे किसी को भनक लगे बिना कोरोना वायरस को फैलाते लेकिन उनमें से एक व्यक्ति की हालत खराब होने पर अस्पताल में भर्ती करना पड़ा। इसके बाद जलसे और निजामुद्दीन में 18 सौ लोगों की मौजूदगी की जानकारी मिली। इस घटना का पता चलते ही दिल्ली समेत पूरे देश में कोहराम मच गया।

भारत में अभी तक कोरोना नियंत्रण में है। पिछले तीन सप्ताह से हम इसके दूसरे चरण में हैं। संक्रमण को तीसरे चरण तक पहुंचने से रोकने के लिए 21 दिनों का लॉकडाउन किया गया है। देश का बड़ा हिस्सा इसका सख्ती से पालन कर रहा है। लेकिन इस बीच दो घटनाएं ऐसी हुईं जिनके कारण लॉकडाउन पर सवालिया निशान खड़ा हो गया। इसमें पहली घटना प्रवासी मजदूरों का पलायन थी। लाखों की संख्या में मजदूर पैदल अपने गांवों के लिए निकल पड़े थे। इस स्थिति को काबू करने में तीन दिन लग गए। इससे निपटने के तुंरंत बाद तबलीगी जमात की आपराधिक लापरवाही सामने आई। अब जबतक जलसे में शामिल तमाम लोगों का क्वारंटाइन नहीं किया जाता, वायरस के फैलने का खतरा बना रहेगा। स्थिति की नज़ाकच को देखते हुए अभी पूजा, प्रार्थना और नमाज घर में ही किए जाने की हिदायत दी जा रही है। कोई धर्म कोई मजहब पूरी मानव जाति को संकट में डालने की सीख नहीं देता। कुछ रोज जलसा नहीं किए जाने से ऊपरवाला नाराज़ नहीं हो जाएगा लेकिन लेकिन अगर चंद लोगों के कारण पूरा देश, पूरा मानव समाज खतरे में पड़ जाए तो ऊपरवाला इसके लिए कभी माफ नहीं करेगा।

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