हरियाणा के एक गांव में समाया पूरा हिंदुस्तान

राष्टीय एकता सह सद्भावना शिविर का आयोजन

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पुस्तकः विश्व की प्राचीनतम सभ्यता लेखकः पं. अनूप कुमार वाजपेयी,कई पुरस्कारों से पुरस्कृत समीक्षा प्रकाशन, दिल्ली, मुजफ्फरपुर, मूल्य-2000 रुपये लेखक ने राजमहल पहाड़ियों और चट्टानों पर संसार के प्राचीनतम आदिमानव के पदचिन्ह ढूंढ निकाले। पता-वाजपेयी निलयम, नया पारा, दुमका झारखंड

पुस्तकः विश्व की प्राचीनतम सभ्यता लेखकः पं. अनूप कुमार वाजपेयी,कई पुरस्कारों से पुरस्कृत समीक्षा प्रकाशन, दिल्ली, मुजफ्फरपुर, मूल्य-2000 रुपये लेखक ने राजमहल पहाड़ियों और चट्टानों पर संसार के प्राचीनतम आदिमानव के पदचिन्ह ढूंढ निकाले। पता-वाजपेयी निलयम, नया पारा, दुमका झारखंड

देवेंद्र गौतम

हरियाणा के पलवल जिले का एक छोटा सा गांव पृथला। 2 फरवरी से 8 फरवरी तक जीटी रोड से गुजरने वालों की निगाह बरबस सड़क से 100 मीटर की दूरी पर युवा गांधीवादी नेता राकेश तंवर के फार्महाउस में बने खूबसूरत पांडाल और उसके अंदर से उभरते राष्ट्रीय एकता से संबंधित गीतों की ओर आकृष्ट हो जाता था। रह-रहकर जोड़ो-जोड़ो, भारत जोड़ो के गगनभेदी नारे दूर-दूर तक गूंजने लगते थे। दूर से ही फार्महाउस के बीच में बनी कोठी पर टंगे बैनर पर निगाह चली जाती थी जिसमें प्रसिद्ध गांधीवादी नेता सुब्बाराव जी की भव्य तस्वीर नज़र आती थी। उसके पास ही राकेश तंवर जी का फ्लेक्स दिखाई देते थे। उस अवधि में राष्ट्रीय युवा योजना के तहत राष्ट्रीय एकता सह शांति एवं सद्भावना शिविर चल रहा था। देश के 25 राज्यों के 350 प्रतिभागी आए हुए थे। उनके ठहरने और खाने-पीने की व्यवस्था फार्म हाउस के अंदर की गई थी। हर राज्य की टीम का एक प्रभारी था जो शिविर के निर्धारित कार्यक्रमों के अनुरूप उनकी भागीदारी को सुनिश्चित करता था। उनकी सुविधाओं का ध्यान रखने के लिए राकेश तंवर जी के 100 से अधिक समर्थक दिन-रात लगे हुए थे। उनके भोजन की व्यवस्था फार्म हाउस में ही की गई थी।  प्रतिभागी अलग-अलग संस्कृतियों का प्रतिनिधित्व करते थे। अलग-अलग भाषाएं बोलते थे लेकिन एक दूसरे से इस कदर घुल-मिल गए थे कि उनके बीच फर्क कर पाना कठिन था।

2 फरवरी की दोपहर से प्रतिभागियों का पृथला आगमन शुरू हो गया। 3 फरवरी की दोपहर तक उनके निबंधन का कार्य किया गया और शाम को शिविर के विधिवत उद्घाटन के साथ सर्वधर्म प्रार्थना का आयोजन किया गया। पूरे छह दिनों तक विश्व के 11 प्रमुख धर्मों पर केंद्रित यह प्रार्थना प्रतिदिन की जाती थी। शिविर के दौरान पूरे दिन का कार्यक्रम तय किया गया है। इसके मुताबिक सारे प्रतिभागी सुबह 5.25 बजे उठकर प्रेरणा गीत गाते थे। 6 बजे से उनके लिए योग और व्यायाम की क्लास लगती थी। प्रतिदिन 7.30 बजे से 8 बजे तक झंडोतोलन का कार्यक्रम होता था। उस समय राष्ट्रीय गीत के साथ राष्ट्रीय एकता से संबंधित गीत गाए जाते थे। राष्ट्रीय झंडा फहराने के बाद राज्यवार कतारबद्ध प्रतिभागियों को इसकी महत्ता से अवगत कराया जाता था।  8.30 बजे से 10.30 बजे के बीच का समय श्रमदान का होगा। इसके तहत प्रतिभागियों ने दो दिनों तक भगोला और एक दिन पृथला के श्मशान की सफाई का कार्य किया।

प्रतिदिन 11.30 ले 12.30 के बीच भाषा विनिमय का कार्यक्रम होता था। इसके तहत दक्षिण भारत के युवकों को उत्तर भारत और उत्तर भारत के युवकों को दक्षिण भारत की भाषाओं की जानकारी दी जाती थी। अस्पताल में इलाजरत होने के कारण सुब्बाराव जी शिविर में शामिल नहीं हो पाए लेकिन उनका लाइव संदेश आ जाता था जिसे पांडाल के अंदर प्रसारित किया जाता था। उनके संदेश से पूर्व और इसके उपरांत स्थानीय लोग भी अपने विचार रखते थे। शाम 4.30 से 5.15 बजे तक प्रतिभा विनिमय का कार्यक्रम होता था जिसमें एक दूसरे को अपनी प्रतिभा से अवगत कराते और प्रशिक्षण देते थे। प्रतिदिन शाम 5.15 ले 6 बजे तक पारंपरिक खेलों का आयोजन होता था। 7.30 बजे शाम को पुनः सर्वधर्म प्रार्थना का कार्यक्रम होता था। इसके बाद रात 9.30 बजे रात तक सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन होता था। रोज सोने के पहले डायरी लेखन का अभ्यास किया जाता था। यह कार्यक्रम 6 फरवरी तक चला। पूरे दिन समयबद्ध कार्यक्रम और अनुशासन के तहत प्रतिभागी राष्ट्रीय एकता और सर्वधर्म समन्वय का प्रशिक्षण लेते थे।

3 फरवरी को राकेश तंवर जी के फार्म हाउस में छह दिवसीय राष्ट्रीय एकता सह शांति एवं सद्भावना युवा शिविर का विघिवत उद्घाटन का कार्यक्रम भी यादगार रहा। उद्घाटन युवा गांधीवादी और शांतिकर्मी राकेश तंवर और रण सिंह परमार, सचिव एकता परिषद और राष्ट्रीय योजना के हाथों संयुक्त रूप से दीप प्रज्ज्वलित कर तथा महात्मा गांधी की प्रतिमा पर पुष्पार्पण के जरिए किया गया। इस अवसर पर 25 राज्यों के 322 प्रतिभागी मौजूद थे। उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए श्री रण सिंह परमार ने कहा कि आज देश में गांधी के विचारों की सबसे ज्यादा जरूरत है। युवाओं को राष्ट्र के नवनिर्माण में समर्पित होना होगा। गांधी के सपनों का देश बनाने के लिए उनका शिक्षण और प्रशिक्षण इन शिविरों को द्वारा ही होता है। श्रद्धेय सुब्बाराव जी ने अपना पूरा जीवन युवाओं के निर्माण में समर्पित कर दिया और वे युवा देश के नवनिर्माण में लगे हुए हैं। युवा भारत को संबोधित करते हुए युवा गांधावादी व शांतिकर्मा राकेश तंवर ने कहा कि आज देश को इन शिविरों की आवश्यकता है जिनसे ऐसा नौजवान तैयार हो रहा होगा जो सद्भाव और भाईचारे के लिए स्वयं को आहुत कर देगा। उन्होंने बताया कि कैसे भाई जी की प्रेरणा से वो देश के नवनिर्माण और शांति के प्रयासों में लगे हुए हैं। इसीलिए इस शिविर के आयोजन का सपना देखा। उन्होंने कहा कि भविष्य में भी इस तरह के शिविरों का आयोजन करते रहेंगा। यह शिविर प्रखर गांधीवादी सुब्बाराव जी की देखरेख में चल रहा है। उन्हें लिविंग गांधी कहा जाता है। स्वतंत्रता सेनानी सुब्बाराव जी 11 वर्ष की आयु से देश की सेवा में लगे रहे हैं। उन्होंने चंबल के 654 डाकुओं का आत्मसमर्पण कराया। उन्होंने मुख्य रूप से युवा वर्ग को एक नई दिशा देने के लिए नेशनल यूथ प्रोजेक्ट का गठन किया है।

6 फरवरी की सुबह झंडोत्तोलन और सर्व धर्म प्रार्थना के बाद राकेश तवंर जी के गांव पृथला के शिव मंदिर की सफाई की गई और शाम को शांति और सद्भाव एकता रैली के रूप में सभी प्रतिभागी रैली की शक्ल में पृथला शिव मंदिर पहुंचे और सांस्कृतिक संध्या का आयोजन किया। इसे देखने के लिए आसपास के गावों के लोग उमड़ पड़े।

7 फरवरी को सुब्बाराव जी का जन्मदिन और महात्मा गांधी का 150 वां जयंती समारोह एक साथ मनाया गया। इस मौके पर सुबह के समय झंडोत्तोलन और सर्वधर्म प्रार्थना के बाद सद्भावना मैच और रक्तदान शिविर का आयोजन किया गया। दिन के 2 बजे मुख्य कार्यक्रम में महात्मा गांधी, कस्तूरबा गांधी की प्रतिमाओं और सुब्बाराव जी की तस्वीर पर माल्यार्पण किया गया। इस मौके पर स्वागत भाषण देते हुए राकेश तंवर जी ने कहा कि यह हरियाणा के लिए गौरव का अवसर है। उन्होंने कहा कि भाई जी (सुब्बाराव जी) से वे 2007 से परिचित हैं और हमेशा उनकी सेवा में उपस्थित रहे हैं। उन्होंने कहा कि पृथला में देशभर के 350 युवा एकत्र हुए और तीन दिनों तक साफ-सफाई की, सांस्कृतिक कार्यक्रम पेश किए और राष्ट्रीय एकता का संदेश दिया। एक छोटे से प्रांगण में पूरा देश समा गया। यह बड़ी बात है।

इस मौके पर मैग्सेसे पुरस्कार से सम्मानित जल पुरुष के रूप में विख्यात राजेंद्र प्रसाद सिंह मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित थे। उन्होंने अपने अध्यक्षीय भाषण में कहा कि दुनिया को एक जोड़ने वाली शक्ति की जरूरत है। सुब्बाराव जी वही शक्ति हैं। वे पंच महाभूत को अपना ईश्वर मानते हैं। उसी की आराधना करते हैं। सुब्बाराव जी के वरिष्ठ सहयोगी वी आर कामराज ने अंग्रेजी शब्द ग्रेड के एक एक अक्षर की व्याख्या करते हुए युवाओं को प्रेरक संदेश दिया।

राकेश तंवर की धर्मपत्नी रेणु तंवर ने नारी शक्ति पर अपने विचार रखते हुए कहा कि जिस देश में नारी शक्ति का सम्मान होता है वही देश तरक्की करता है। मुंबई से आई ललिता जी ने सुब्बाराव पर केंद्रित अपनी 1340 पंक्तियों की कविता के एक अंश का पाठ किया जिसे काफी सराहा गया।

इस मौके पर हरिजन सेवक संघ के सचिव रजनीश जी ने कहा कि गांधी जी ने कहा था कि मरने के बाद बोलेंगे। वास्तव में आज उनके अनुयायी भाई जी ने कितने ही गांधी तैयार कर दिए। गांधी विचार के रूप में हमेशा जीवित रहेंगे।

इसी बीच भाई जी अर्थात सुब्बाराव जी का संदेश आ गया। उन्होंने उम्मीद जताई कि युवा योजना के तहत छोटे-छोटे झगड़ों को समाप्त कर देश को एकसूत्र में बांधा जाएगा। उन्होंने अपने संदेश में कहा कि चीन को अरूणाचल पर भारत का अधिकार स्वीकार नहीं है। हमें अरूणाचल के लोगों के बीच शिविर लगाना चाहिए।

हरिजन सेवक संघ के अध्यक्ष शंकर कुमार सान्याल ने कहा कि भाई जी का कोई विकल्प नहीं है। उनकी प्रतिभा उगते सूर्य के समान चारो तरफ प्रकाश फैला रही है।

इस बीच गुजरात के पंकज झाला ने सुब्बाराव के जन्मदिन पर विशेष रूप से प्रकाशित कैलेंडर और बैच को लांच कराया। इस कैलेंडर की खासियत यह है कि यह फरवरी से शुरू होकर जनवरी में समाप्त होता है। पंकज झाला हर वर्ष सुब्बाराव जी की जयंती पर इस कैलेंडर का प्रकाशन करते हैं। इस बार उन्होंने 10 हजार कैलेंडर छपवाए हैं।

मुबई से आए अनिल जी ने सुब्बाराव जी पर केंद्रित तीन एपिसोड की फिल्म बनाई है। उन्होंने सुब्बाराव जी के साथ पूर्वोत्तर के अनुभवों को साझा किया। हिमाचल प्रदेश से आए कपूर साहब ने राकेश तंवर जी को हिमाचल की टोपी पहनाकर सम्मानित किया और उनके पूरे परिवार को बधाई दी।

कार्यक्रम के बीच-बीच में मधुभाई के गीत पूरे इलाके में गूंजने लगते थे। उनका गीत जय जगत-जय जगत-जय जगत पुकारे जा…शिविर में लोगों की ज़ुबान पर चढ़ गया था। राकेश तंवर जी के पुत्र कुशल तंवर और वंश तवर ने भी सांस्कृतिक कार्यक्रम में अपना सिक्का जमाया। कार्यक्रम को स्वामी जी, अशोक भारत, जितेंद्र चंदेलिया के अलावा प्रतिभागी युवाओं में से यश जैन, प्रीति शर्मा, गणेश, अशोक और विनोद ने भी संबोधित किया।

8 फरवरी की सुबह शिविर का समापन हुआ। समापन समारोह को संबोधित करने के दौरान राकेश तंवर काफी भावुक हो उठे। 9 फरवरी तक प्रतिभागियों का प्रस्थान होता रहा।

राष्ट्रीय युवा योजना की शुरुआत प्रसिद्ध गांधीवादी नेता एमएन सुब्बाराव जी ने 60 के दशक में की थी।

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