क्या रमजान में संयम दिखाएगा मुसलिम समाज!

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-देवेंद्र गौतम

पुस्तकः विश्व की प्राचीनतम सभ्यता लेखकः पं. अनूप कुमार वाजपेयी,कई पुरस्कारों से पुरस्कृत समीक्षा प्रकाशन, दिल्ली, मुजफ्फरपुर, मूल्य-2000 रुपये लेखक ने राजमहल पहाड़ियों और चट्टानों पर संसार के प्राचीनतम आदिमानव के पदचिन्ह ढूंढ निकाले। पता-वाजपेयी निलयम, नया पारा, दुमका झारखंड

पुस्तकः विश्व की प्राचीनतम सभ्यता लेखकः पं. अनूप कुमार वाजपेयी,कई पुरस्कारों से पुरस्कृत समीक्षा प्रकाशन, दिल्ली, मुजफ्फरपुर, मूल्य-2000 रुपये लेखक ने राजमहल पहाड़ियों और चट्टानों पर संसार के प्राचीनतम आदिमानव के पदचिन्ह ढूंढ निकाले। पता-वाजपेयी निलयम, नया पारा, दुमका झारखंड

वैश्विक महामारी कोरोना के प्रकोप के बीच 24 अप्रैल से रमजान का पवित्र महीना शुरू होने जा रहा है। इस अवधि में मुसलिम समाज के लोग दिन के समय निर्जला उपवास करते हैं और सूर्यास्त के समय इफ्तार में शामिल होकर सामूहिक रूप से रोजा खोलते हैं। मस्जिदों में एक साथ नमाज भी पढ़ने की भी परंपरा है। यदि परंपरा का निर्वाह किया जाए तो सामाजिक दूरी और लॉकडाउन का पालन संभव नहीं है और लॉकडाउन का पालन नहीं किया गया तो कोरोना पर नियंत्रण पाने में कठिनाई आएगी। सऊदी अरब और सुलझे हुए इस्लामी देशों के मुसलमान तो समय की नज़ाकत को समझते हुए निर्देशों का पालन करेंगे। चीन भी उइगर मुसलमानों को जबरन पालन करवा देगा लेकिन भारत और पाकिस्तान की सरकारों के लिए यह कठिन होगा। यहां वे अपनी कट्टरता और जेहालत का प्रदर्शन करने से बाज नहीं आएंगे। भारत और पाकिस्तान के मुसलमान जिस तरह मस्जिदों में सामूहिक नमाज पढ़ने के लिए मरने-मारने पर उतारू हैं। कोरोना की जांच और इलाज से बचने के लिए पथराव और हिंसा पर उतर जा रहे हैं उसे देखते हुए उनसे जिम्मेवार नागरिक के आचरण की उम्मीद नहीं की जा सकती। इसके लिए सख्ती की जरूरत पड़ेगी और सख्ती करने पर इसे मुसलमानों के उत्पीड़न का मामला बनाया जाएगा।  

रमजान में सावधानी के लिए विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने कोरोना के मद्देनजर रमजान के दौरान मुस्लिम समाज के लिए कुछ दिशा-निर्देश जारी किए हैं।

संगठन ने कहा है कि जहां तक संभव हो धार्मिक आयोजन और समूह में एकत्र होने से बचें। इसकी जगह आयोजनों के लिए इलेक्टॉनिक माध्यमों का इस्तेमाल किया जाए। यदि आयोजन किया भी जाता है तो इनमें शामिल होने वालों की संख्या बेहद कम हो और सामाजिक दूरी तथा स्वच्छता के नियमों का पालन करें।

दिशा-निर्देशों में कहा गया है कि हर हाल में लोगों के बीच कम से कम एक मीटर की आपसी दूरी रखी जानी चाहिए। साथ ही इफ्तार के दौरान पहले से पैक खाने के अलग-अलग पैकेट देने की व्यवस्था करनी चाहिए। वजू के लिए पानी और साबुन की पर्याप्त व्यवस्था रखी जाए। डब्लूएचओ ने सलाह दी है कि मस्जिदों में नमाज पढ़ते समय बैठने के लिए हर व्यक्ति को अपनी-अपनी चटाई लाने की कोशिश करनी चाहिए। डब्ल्यूएचओ ने कहा है कि लोगों को अपना स्वास्थ्य बनाये रखना चाहिए।

विश्व स्वास्थ्य संगठन के कुछ दिशा-निर्देशों का पालन करने में मुस्लिम समुदाय को आपत्ति नहीं होगी लेकिन सामाजिक दूरी बनाए रखना और मस्जिदों में कम संख्या में नमाज पढञने के लिए भारत और पाकिस्तान के सुन्नी मुसलमानों का राजी करना पैदल मंगल ग्रह पर जाने के समान होगा। इनमें पढ़े लिखे और समझदार लोगों की संख्या कम है। लकीर के फकीर ज्यादा हैं। अपनी जिद और मूर्खता के कारण अभी तक वे विश्व समुदाय की चिंता में शामिल नहीं हो सके हैं। बल्कि चिंता बढ़ाने में भूमिका अदा कर रहे हैं। उन्हें न मरने का डर है न मारने में कोई हिचक। ऐसे में भारत और पाकिस्तान जैसे देशों के लिए यह बेहद चुनौती और तनाव का महीना होगा।

 

 

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