एक लाख आंखों को रौशनी दे चुके हैं डा. संजीव तिरिया

मानव सेवा को बना चुके हैं जीवन का लक्ष्य

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कोल्हान प्रमंडल के नेत्र चिकित्सक डा. संजीव तिरिया समय के महत्व को समझते हैं और मानव जीवन के महत्व को भी। वे अपनी दक्षता का उपयोग मानव सेवा के निमित्त करना अपने जीवन का लक्ष्य बना चुके हैं। उनका मानना है कि समय का सदुपयोग जीवन का सदुपयोग है और समय का दुरुपयोग जीवन को नष्ट करना है। समय अपनी गति से चलता रहता है और वर्तमान के अतीत बनाता जाता है।  डाॅ. तिरिया पीड़ित मानवता के सेवार्थ नेक काम में अपने समय का सदुपयोग करते हैं। मूल रूप से पश्चिम सिंहभूम जिला के मझगांव के इचापी गांव के निवासी डॉ. तिरिया की प्रारंभिक शिक्षा गांव में ही हुई। टाटा कॉलेज, चाईबासा से इन्होंने इंटरमीडिएट की परीक्षा पास की। तत्पश्चात पटना से एमबीबीएस की डिग्री हासिल की। वर्ष 2003 में उन्होंने एम्स से एमडी की डिग्री प्राप्त की और नेत्र चिकित्सा के क्षेत्र में वर्ष 2003 से जुड़ गए। डॉ. तिरिया ने वर्ष 2003 से वर्ष 2006 तक नेपाल में नेत्र चिकित्सा के क्षेत्र में अपनी सेवाएं दी। वर्ष 2007 से वे कोल्हान प्रमंडल के मुख्यालय चाईबासा में नेत्र रोग की चिकित्सा कर रहे हैं। अब तक उन्होंने लगभग एक लाख नेत्र रोगियों के आंखों का ऑपरेशन करने में सफलता पाई है। उनका नाम देश के प्रख्यात नेत्र चिकित्सकों में शुमार है। डॉ. तिरिया नेत्र चिकित्सा के क्षेत्र में कोल्हान प्रमंडल सहित आसपास के इलाकों में काफी लोकप्रिय हैं। नेत्र चिकित्सा के अलावा वह सामाजिक कार्यों में भी बढ़ चढ़कर हिस्सा लेते हैं। वे कहते हैं कि समय बड़ा मूल्यवान है। समय की महत्ता को समझते हुए अपने समय का सदुपयोग करें। आलस्य समय का सबसे बड़ा शत्रु है। इसलिए आलस्य से दूर रहें। वह कहते हैं कि सफल एवं सार्थक जीवन के लिए पुरुषार्थ एवं कर्मशीलता जरूरी है। शांति के समान कोई तप नहीं, संतोष से बढ़कर कोई धर्म नहीं। जिसे संतोष करना आता है, परमसुख उसी को मिलता है। सभी इच्छाओं का त्याग करके अपनी स्थिति पर संतोष करना इस सुख को प्राप्त कर लेना है। डॉ. तिरिया कहते हैं कि मन, वाणी और कर्म से शुद्ध व्यक्तित्व ही सच्चे सुख की रसधार में सदैव स्नान करता है। नेत्र चिकित्सा के क्षेत्र में परचम लहराने वाले डॉ. तिरिया सामाजिक समरसता की भी मिसाल पेश करते रहे हैं। वह सर्व धर्म, समभाव के आदर्शों को आत्मसात कर अपने जीवन पथ पर अग्रसर हैं। अपने कर्तव्यों और दायित्वों के प्रति सजग व गंभीर रहते हुए सामाजिक कार्यों में भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लेना उनकी दिनचर्या में शुमार है। डॉ.तिरिया की नेत्र चिकित्सा के क्षेत्र में उत्कृष्ट उपलब्धि के लिए झारखंड सरकार के स्वास्थ्य सचिव डॉ. नितिन मदन कुलकर्णी ने भी सराहा है। इसके अलावा विभिन्न सामाजिक संगठनों की ओर से भी डॉ. तिरिया के सकारात्मक कार्यों की सराहना की जाती रही है। वह कहते हैं कि आंख मानव शरीर का एक अनमोल अंग है। आंखों की सुरक्षा सर्वोपरि है। आंख में किसी प्रकार की तकलीफ होने पर तुरंत चिकित्सक के पास जाएं। समाज के प्रति अपने संदेश में डॉ तिरिया कहते हैं कि मनुष्य को सामाजिक नव निर्माण की दिशा में भी अपने दिनचर्या में से समय निकालकर कुछ कार्य करते रहने की आवश्यकता है। इससे हमारा देश व समाज सशक्त और समृद्ध होगा।
प्रस्तुति : विनय मिश्रा

पुस्तकः विश्व की प्राचीनतम सभ्यता लेखकः पं. अनूप कुमार वाजपेयी,कई पुरस्कारों से पुरस्कृत समीक्षा प्रकाशन, दिल्ली, मुजफ्फरपुर, मूल्य-2000 रुपये लेखक ने राजमहल पहाड़ियों और चट्टानों पर संसार के प्राचीनतम आदिमानव के पदचिन्ह ढूंढ निकाले। पता-वाजपेयी निलयम, नया पारा, दुमका झारखंड

पुस्तकः विश्व की प्राचीनतम सभ्यता लेखकः पं. अनूप कुमार वाजपेयी,कई पुरस्कारों से पुरस्कृत समीक्षा प्रकाशन, दिल्ली, मुजफ्फरपुर, मूल्य-2000 रुपये लेखक ने राजमहल पहाड़ियों और चट्टानों पर संसार के प्राचीनतम आदिमानव के पदचिन्ह ढूंढ निकाले। पता-वाजपेयी निलयम, नया पारा, दुमका झारखंड

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