शिव शिष्य हरीन्द्रानंद फाउंडेशन के तत्वावधान में कटिहार जिले की शिवशिष्यों की मासिक बैठक सम्पन्न ।

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शिव शिष्य हरीन्द्रानंद फाउंडेशन के तत्वावधान में कटिहार के जगरनाथपुरी बरमसिया के जगन्नाथ मंदिर के प्रांगण में जिले के शिवशिष्यों की मासिक आहूत की गई । जिसमें कटिहार जिले लगभग 500 शिव शिष्य एवम शिष्याओ ने भाग लिया।बैठक की सुरुआत भजन के साथ किया गया।

पुस्तकः विश्व की प्राचीनतम सभ्यता लेखकः पं. अनूप कुमार वाजपेयी,कई पुरस्कारों से पुरस्कृत समीक्षा प्रकाशन, दिल्ली, मुजफ्फरपुर, मूल्य-2000 रुपये लेखक ने राजमहल पहाड़ियों और चट्टानों पर संसार के प्राचीनतम आदिमानव के पदचिन्ह ढूंढ निकाले। पता-वाजपेयी निलयम, नया पारा, दुमका झारखंड

पुस्तकः विश्व की प्राचीनतम सभ्यता लेखकः पं. अनूप कुमार वाजपेयी,कई पुरस्कारों से पुरस्कृत समीक्षा प्रकाशन, दिल्ली, मुजफ्फरपुर, मूल्य-2000 रुपये लेखक ने राजमहल पहाड़ियों और चट्टानों पर संसार के प्राचीनतम आदिमानव के पदचिन्ह ढूंढ निकाले। पता-वाजपेयी निलयम, नया पारा, दुमका झारखंड

बैठक में पूर्णिया से आये अशेष कुमार आशीष ने साहब श्रीहरीन्द्रानंद जी के निर्देश पर बात करते हुए बताया कि हमे लोगों को शिव शिष्य बनाने की दिशा में प्रयास करना चाहिए । उन्होंने बताया कि हमें कोशिश करना चाहिए अपने मन को शिव के परिधि में ज्यादा से ज्यादा देर रखा जाय।

हमे खुद में यह आकलन करना होगा कि हमारा मन शिव की परिधि में कितनी देर तक ठहरता है ।हमे यह प्रयास करना होगा कि 24 घंटे के इस दिवा रात्रि में कम से 4 घंटा तो हमारा मन शिव के परिधि में रहे ।ऐसा होता है तभी हम कह सकते हैं कि हम शिवशिष्य होने की दिशा में अग्रसर हैं ।

कटिहार के अजय अग्रवाल ने शिव को गुरु बनाने के लिए दिए गए तीन सूत्रों को विस्तार से समझाया ।उन्होंने ने आगे कहा कि आज के समय मे मनुष्य के जीवन मे शिव को गुरु बनाने के अलावा कोई विकल्प नही रह गया है।नए जगहों पर साप्ताहिक चर्चा केंद्र खोलने तथा बन्द पड़े सप्ताहिक चर्चा केंद्रों को दुबारा चालू करने तथा सबको साथ लेकर चलने पर बल दिया । तथा टोली बनाकर फटाफट शिव गुरु कार्य करने का भी अनुरोध किया गया ।

बैठक में उपस्थित अन्य भाई बहनों ने भी अपने विचार रखे ।

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