बहुमुखी प्रतिभा प्रदर्शित कर रही अन्वी सिंह

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कम उम्र में भी प्रतिभावान बच्चे अपनी प्रतिभा प्रदर्शित कर यह साबित कर दिखाते हैं कि प्रतिभा उम्र की मोहताज नहीं होती। ऐसी ही एक प्रतिभावान छात्रा है 9 वर्षीय अन्वी सिंह। अन्वी अपने माता-पिता संग रांची-पुरुलिया मार्ग पर टाटीसिलवे थानांतर्गत सीधा टोली (महिलौंग) में रहती हैं। वह सरला बिरला पब्लिक स्कूल में कक्षा दो की छात्रा है। बचपन से ही पढ़ने-लिखने में अव्वल अन्वी का हस्तशिल्प की ओर विशेष लगाव है। वह अपने होमवर्क और क्लास वर्क पूरा करने के बाद खाली समय का सदुपयोग अपने हाथों से बेहतरीन पेंटिंग (चित्रकारी) कर ग्रीटिंग कार्ड्स, बच्चों के खिलौने आदि बनाने में करती है। वह खेलकूद पर भी पूरा ध्यान देती है। प्रातः काल जल्दी उठना, स्कूल जाने की तैयारी करना, स्कूल का होमवर्क पूरा करना, स्कूल से आने के बाद थोड़ा खेल-कूद, अपनी बड़ी बहन व आसपास की सहेलियों संग खेलना-कूदना, स्कूल का टास्क पूरा करना, शाम में अपने माता-पिता से महापुरुषों की जीवनी के प्रेरक प्रसंग सुनना, तत्पश्चात सुस्वादु भोजन ग्रहण करना और बिस्तर पर लेट जाना उनकी दिनचर्या है।

पुस्तकः विश्व की प्राचीनतम सभ्यता लेखकः पं. अनूप कुमार वाजपेयी,कई पुरस्कारों से पुरस्कृत समीक्षा प्रकाशन, दिल्ली, मुजफ्फरपुर, मूल्य-2000 रुपये लेखक ने राजमहल पहाड़ियों और चट्टानों पर संसार के प्राचीनतम आदिमानव के पदचिन्ह ढूंढ निकाले। पता-वाजपेयी निलयम, नया पारा, दुमका झारखंड

पुस्तकः विश्व की प्राचीनतम सभ्यता लेखकः पं. अनूप कुमार वाजपेयी,कई पुरस्कारों से पुरस्कृत समीक्षा प्रकाशन, दिल्ली, मुजफ्फरपुर, मूल्य-2000 रुपये लेखक ने राजमहल पहाड़ियों और चट्टानों पर संसार के प्राचीनतम आदिमानव के पदचिन्ह ढूंढ निकाले। पता-वाजपेयी निलयम, नया पारा, दुमका झारखंड

वह अपनी कक्षा में सभी सहपाठियों के साथ समान व्यवहार करती है। इसीलिए अन्वी अपने सहपाठियों की प्रिय है। स्कूल में आयोजित विभिन्न प्रतियोगिताओं में शामिल होना और उसमे सफलता प्राप्त करना अन्वी का शौक है। राष्ट्रीय स्तर पर आयोजित होने वाले ओलंपियाड प्रतियोगिता में भी अन्वी ने तृतीय स्थान प्राप्त किया है। वह स्कूल में आयोजित होने वाले सांस्कृतिक कार्यक्रमों में भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लेती हैं। अन्वी का रुझान विशेष रूप से विज्ञान विषय की ओर अधिक है। वह आगे चलकर एक सफल वैज्ञानिक बनकर देश व समाज की सेवा करना चाहती है। इस दिशा की ओर वह अग्रसर भी है।

अन्वी के माता-पिता हर कदम पर उसका मार्गदर्शन करते हैं। अन्वी के पिता अमित सिंह पत्रकारिता पेशे से जुड़े हैं। वहीं, उनकी माता अभिलाषा सिंह एक कुशल गृहणी के साथ-साथ समाजसेवी भी हैं। अन्वी की बड़ी बहन रिषिका सिंह भी सरला बिरला पब्लिक स्कूल में कक्षा छह की छात्रा हैं। अन्वी समय-समय पर अपनी बहन से भी मार्गदर्शन प्राप्त करती रहती हैं। उनकी प्रतिभा तराशने में स्कूल के शिक्षकों का भी अहम योगदान है। अन्वी कहती है कि लक्ष्य निर्धारित कर मंजिल की ओर ईमानदारी, लगन और परिश्रम से बढ़ते रहें, तो सफलता हासिल होगी ही।
प्रस्तुति : विनीत कुमार

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