बेरमो विधानसभा क्षेत्रः राजेंद्र प्रसाद सिंह और योगेश्वर महतो के बीच शह और मात का संघर्ष

0 120

देवेंद्र गौतम

पुस्तकः विश्व की प्राचीनतम सभ्यता लेखकः पं. अनूप कुमार वाजपेयी,कई पुरस्कारों से पुरस्कृत समीक्षा प्रकाशन, दिल्ली, मुजफ्फरपुर, मूल्य-2000 रुपये लेखक ने राजमहल पहाड़ियों और चट्टानों पर संसार के प्राचीनतम आदिमानव के पदचिन्ह ढूंढ निकाले। पता-वाजपेयी निलयम, नया पारा, दुमका झारखंड

पुस्तकः विश्व की प्राचीनतम सभ्यता लेखकः पं. अनूप कुमार वाजपेयी,कई पुरस्कारों से पुरस्कृत समीक्षा प्रकाशन, दिल्ली, मुजफ्फरपुर, मूल्य-2000 रुपये लेखक ने राजमहल पहाड़ियों और चट्टानों पर संसार के प्राचीनतम आदिमानव के पदचिन्ह ढूंढ निकाले। पता-वाजपेयी निलयम, नया पारा, दुमका झारखंड

रांची। झारखंड के बेरमो विधानसभा क्षेत्र में विभिन्न दलों और निर्दलियों को मिलाकर 16 उम्मीदवार मैदान में ताल ठोक रहे हैं। लेकिन एकबार फिर कांग्रेस प्रत्याशी इंटक महासचिव एवं पूर्व मंत्री राजेंद्र प्रसाद सिंह और भाजपा के योगेश्वर महतो बाटुल के बीच कांटे की टक्कर के आसार हैं। भाकपा के आफताब लम इनके बीच तीसरा कोण बनाएंगे। इस सीट पर तीसरे चरण के तहत 12 दिसंबर को मतदान होगा। 2014 के चुनाव में इस सीट पर भाजपा के योगेश्वर महतो ने कांग्रेस के राजेन्द्र प्रसाद सिंह को को 12613 वोटों के अंतर से हराया था। योगेश्वर महतो को 80489 और राजेन्द्र प्रसाद सिंह को 67876 वोट मिले थे। पिछले विधानसभा चुनाव  में यहां 65.40 प्रतिशत मतदान हुआ था। यहां पुरुष 102103 और महिला मतदाता 85001 है। कुल मतदाताओं की संख्या 187104 है।

इसबार झामुमो उलगुलान की ओर से सलीमुद्दीन अंसारी. बैजनाथ गोरैन शिवसेना से, गंगाधर प्रजापति निर्दलीय ,उमेश रवानी लोक जन शक्ति पार्टी से, सबीता देवी झारखंड पार्टी (सेकुलर) से, राम किंकर पांडेय जोहार पार्टी से, समीर कुमार दास बसपा  से, कालेश्वर रविदास आरपीआई (ए) से, राजेश कुमार निर्दलीय, सुबोध महतो निर्दलीय, खिरोधर किस्कू निर्दलीय, काशी नाथ सिंह आजसू से, चंदन कुमार पीपुल्स पार्टी ऑफ इंडिया (डेमोक्रेटिक) की ओर से मैदान में हैं।

 गिरिडीह लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र के अंतर्गत आने वाली यह सीट किसी जमाने में कांग्रेस का गढ़ हुआ करती थी। झारखंड राज्य अलग होने के बाद वर्ष 2005 के चुनाव में यहां से भाजपा के योगेश्‍वर महतो बाटुल ने जीत हासिल की थी। 2009 के चुनाव में कांग्रेस के राजेंद्र प्रसाद सिंह ने जीत हासिल की। 2014 के चुनाव में फिर से भाजपा के योगेश्‍वर महतो विधायक चुने गए।

इसबार राजेंद्र प्रसाद सिंह विपक्षी महागठबंधन के साझा उम्मीदवार हैं। संयुक्त बिहार के समय से राजेंद्र प्रसाद सिंह इस सीट से आठवीं बार चुनाव मैदान में उतरे हैं। वे झारखंड बनने से पूर्व 1985, 1990, 1995 तथा 2000 में लगातार चार बार इस क्षेत्र से विधायक रह चुके हैं। झारखंड बनने के बाद  2009 के विस चुनाव में पुन: राजेंद्र सिंह ने भाजपा प्रत्याशी योगेश्वर महतो बाटुल को पराजित कर इस क्षेत्र से पांचवीं बार विधायक बने। वहीं योगेश्‍वर महतो बाटुल चौथी बार बीजेपी के टिकट पर चुनावी मैदान में हैं। उन्होंने दो चुनावों में राजेंद्र सिंह को पराजित किया और एक चुनाव में उनसे पराजित हुए हैं। पिछली बार विपक्षी गठबंधन नहीं था। इसबार झामुमो का समर्थन राजेंद्र प्रसाद सिंह के मतों में और इजाफा करेगा जबकि आजसू के अलग होने और खासतौर पर महाराष्ट्र के सियासी नाटक के कारण योगेश्वर महतो बाटुल को नुकसान उठाना पड़ेगा। हरियाणा और महाराष्ट्र में मोदी मैजिक और अमित शाह की रणनीति के कारगर नहीं हो पाने का सीधा अर्थ है कि अब जनता भाजपा की जुमलेबाजी से प्रभावित नहीं हो रही है। हिंदुत्व के एजेंडा पर अर्थ व्यवस्था के मोर्चे पर विफलता का प्रभाव हावी हो रहा है।

महाराष्ट्र की फजीहत के बाद हालांकि भाजपा बेहद सतर्क हो चुकी है और झारखंड में अपनी पूरी ताकत झोंकने की तैयारी में है। उसे पता है कि यदि झारखंड में प्रदर्शन अच्छा नहीं रहा तो आगामी बिहार, प. बंगाल और दिल्ली के चुनावों में भी मुंह की खानी पड़ जाएगी और 2024 में केंद्र क सत्ता से भी हाथ धोना पड़ जाएगा। इसीलिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह ने झारखंड के हर चरण के चुनाव में अपना कार्यक्रम रखा है। राज्य के 81 सीटों पर क्या होगा कहना कठिन है लेकिन बेरमो में भाजपा को पूरी ताकत झोंक देनी होगी। यह सीट इसलिए भी महत्वपूर्ण है कि इसका बड़ा हिस्सा कोयलांचल के अंतर्गत आता है और यह बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री तथा इंटक के संस्थापकों में एक बिंदेश्वरी दुबे का चुनाव क्षेत्र रह चुका है। यहां से अधिकांशतः मजदूर नेता ही जीत दर्ज करते रहे हैं। बाटुल जी स्वयं मजदूर नेता नहीं रहे। उन्हें भारतीय मजदूर संघ के समर्थन के आधार पर कोयलांचल में वोट मिलेंगे जबकि राजेंद्र प्रसाद सिंह को ग्रामीण क्षेत्रों में अपने कार्यकाल में किए कार्यों और झामुमो के समर्थन के योग के आधार पर समर्थन मिलेगा। संघर्ष कांटे का है। किसके सर पर ताज जाएगा कहना कठिन है।

 

 

 

Leave A Reply

Your email address will not be published.

%d bloggers like this: