भाजपा को महंगी पड़ सकती है सरयू राय की उपेक्षा

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रांची। झारखंड के खाद्य आपूर्ति मंत्री सरयू राय का तेवर केंद्र के सुब्रमण्यम स्वामी से मेल खाता है। वे भ्रष्टाचार और अनियमितताओं के खिलाफ आवाज़ उठाते रहे हैं और जनांदोलनों से भी जुड़े रहे हैं। इसीलिए वे जनता को प्रिय हैं लेकिन सत्ताधारियों की आंख में खटकते रहे हैं। इस मामले में वे अपनी पार्टी को भी नहीं बख्शते। इसीलिए भाजपा के शीर्ष नेता उनके बगावती तेवर से खफा रहते हैं।

पुस्तकः विश्व की प्राचीनतम सभ्यता लेखकः पं. अनूप कुमार वाजपेयी,कई पुरस्कारों से पुरस्कृत समीक्षा प्रकाशन, दिल्ली, मुजफ्फरपुर, मूल्य-2000 रुपये लेखक ने राजमहल पहाड़ियों और चट्टानों पर संसार के प्राचीनतम आदिमानव के पदचिन्ह ढूंढ निकाले। पता-वाजपेयी निलयम, नया पारा, दुमका झारखंड

पुस्तकः विश्व की प्राचीनतम सभ्यता लेखकः पं. अनूप कुमार वाजपेयी,कई पुरस्कारों से पुरस्कृत समीक्षा प्रकाशन, दिल्ली, मुजफ्फरपुर, मूल्य-2000 रुपये लेखक ने राजमहल पहाड़ियों और चट्टानों पर संसार के प्राचीनतम आदिमानव के पदचिन्ह ढूंढ निकाले। पता-वाजपेयी निलयम, नया पारा, दुमका झारखंड

विधानसभा चुनाव में भाजपा ने उनके चुनाव क्षेत्र पश्चिमी जमशेदपुर विधानसभा को विचाराधीन रखा है। न सरयू राय को टिकट दिया है न किसी दूसरे प्रत्याशी की घोषणा की है। निश्चित रूप से यह सरयू राय को सबक सिखाने का प्रयास है। लेकिन यदि भाजपा सरयू राय को टिकट देने से वंचित रखती है तो यह उसके लिए आत्मघाती कदम साबित हो सकता है। जो लोग सरयू राय के मिजाज को जानते हैं उन्हें पता है कि वे पार्टी आलाकमान के समक्ष गिड़गिड़ाने या माफी मांगने वाले व्यक्ति नहीं हैं। वे एक मंझे हुए स्वाभिमानी नेता हैं। विपक्ष के लोग भी उनका सम्मान करते हैं। उन्होंने जमशेदपुर पूर्वी और पश्चिमी दोनों के नामांकन पत्र ले रखे हैं।

पूर्वी जमशेदपुर झारखंड के मुख्यमंत्री रघुवर दास का चुनाव क्षेत्र है। टिकट काटे जाने पर उनकी रणनीति क्या होगी उन्होंने अभी स्पष्ट नहीं किया है, हालांकि भाजपा के शीर्ष नेताओं को वे अपने अगले कदम का संकेत दे चुके हैं। राजनीतिक हल्कों की मानें तो उन्हे पहले से ही भाजपा के इस व्यवहार की आशंका थी। इसीलिए उन्होंने दो चुनाव क्षेत्रों का नामांकन पत्र ले रखा है। विपरीत स्थिति में वे सीधे मुख्यमंत्री रघुवर दास को चुनौती देने के लिए पूर्वी जमशेदपुर का रुख कर सकते हैं। भाजपा के व्यवहार को लेकर उन्हें जनता की सहानुभूति मिल सकती है।

वैसे भी सरयू का राजनीतिक कद बड़ा है। यदि वे निर्दलीय या किसी पार्टी के प्रत्याशी के रूप में पूर्वी जमशेदपुर से खड़े हो गए तो सीएम रघुवर दास के लिए भारी मुश्किलें खड़ी कर सकते हैं। भाजपा को उनके मामले में अहंकार से परे हटकर विचार करना चाहिए। झारखंड की जनता के बीच सरयू राय का टिकट काटे जाने पर अच्छा संदेश नहीं जाएगा।

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