अब डिग्री घोटाले में फंसे भाजपा सांसद निशिकांत दुबे

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-देवेंद्र गौतम

पुस्तकः विश्व की प्राचीनतम सभ्यता लेखकः पं. अनूप कुमार वाजपेयी,कई पुरस्कारों से पुरस्कृत समीक्षा प्रकाशन, दिल्ली, मुजफ्फरपुर, मूल्य-2000 रुपये लेखक ने राजमहल पहाड़ियों और चट्टानों पर संसार के प्राचीनतम आदिमानव के पदचिन्ह ढूंढ निकाले। पता-वाजपेयी निलयम, नया पारा, दुमका झारखंड

पुस्तकः विश्व की प्राचीनतम सभ्यता लेखकः पं. अनूप कुमार वाजपेयी,कई पुरस्कारों से पुरस्कृत समीक्षा प्रकाशन, दिल्ली, मुजफ्फरपुर, मूल्य-2000 रुपये लेखक ने राजमहल पहाड़ियों और चट्टानों पर संसार के प्राचीनतम आदिमानव के पदचिन्ह ढूंढ निकाले। पता-वाजपेयी निलयम, नया पारा, दुमका झारखंड

झारखंड के गोड्डा संसदीय क्षेत्र के सांसद कुछ ही दिनों पूर्व ज़मीन घोटाले के एक मामले को लेकर आरोपों के घेरे में आए थे। उनके खिलाफ मामला दर्ज हुआ था। अब उनकी डिग्री को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। यह आरोप स्वतः प्रमाणित है। झारखंड के वरीय पत्रकार कृष्ण बिहारी मिश्र ने विष्णुकांत झा नामक समाजसेवी की प्राथमिकी का हवाला देते हुए एक रिपोर्ट में लिखा है कि श्री झा ने देवघर थाना में शिकायत दर्ज कराते हुए आरोप लगाया है कि गोड्डा के भाजपा सांसद निशिकांत दूबे ने जाली प्रमाण पत्र के आधार पर झूठा शपथ पत्र दाखिल कर लोकसभा का चुनाव जीता है, इसलिए इनके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर, कानूनी कार्रवाई की जाय। इसके साथ ही झारखंड मुक्ति मोर्चा ने भी रांची में संवाददाता सम्मलेन कर भारत निर्वाचन आयोग व लोक सभाध्यक्ष से इस मामले में संज्ञान लेकर उचित कदम उठाने का अनुरोध किया है।

देवघर थाने में दी गई शिकायत में लिखा गया है कि निशिकांत दूबे ने लोकसभा चुनाव 2009 में अपने शपथ पत्र में दिनांक 28 मार्च 2009 को अपनी अंतिम शैक्षणिक योग्यता के कॉलम में दिल्ली विश्वविद्यालय से एमबीए लिखा था। 2014 के आम चुनाव में भी उम्मीदवार के रुप में अपने शपथ पत्र में इसी शैक्षणिक योग्यता का हवाला दिया था। लेकिन 26 अप्रैल 2019 के चुनाव में उन्होंने अपनी अंतिम योग्यता पीएचडी दर्ज कराया। सर्वविदित है कि स्नातकोत्तर किए बिना पीएचडी नहीं किया जा सकता। सांसद रहते हुए उन्होंने कब स्नातकोत्तर कर लिया इसका जिक्र नहीं किया।

विष्णुकांत झा ने अपनी शिकायत में प्रमाण के साथ कहा है कि दिल्ली विश्वविद्यालय से जब इस संबंध में जानकारी हासिल की गई, तब स्पष्ट जवाब मिला कि निशिकांत दुबे नाम के किसी भी व्यक्ति ने वर्ष 1993 में न तो दाखिला लिया और न ही यहां से पास आउट हुआ है। इसका सीधा मतलब है कि निशिकांत दुबे फर्जी प्रमाण पत्र का इस्तेमाल कर, फर्जी शपथ पत्र के आधार पर 2019 के लोकसभा चुनाव में उम्मीदवार बने और उसी आधार पर सांसद बन गए। बताया जाता है कि निशिकांत दुबे से संबंधित जानकारी सूचना के अधिकार के तहत गोरखपुर के रहनेवाले विजयेन्द्र कुमार पांडे ने मांगी थी, जिसे दिल्ली विश्वविद्यालय ने उपलब्ध कराया, जिसमें इस बात का जिक्र है कि निशिकांत दुबे नाम का कोई भी व्यक्ति उस काल में न तो दाखिला लिया और न ही पास आउट हुआ।

इधर झारखंड मुक्ति मोर्चा के वरिष्ठ नेता सुप्रियो भट्टाचार्य ने रांची में संवाददाता सम्मेलन कर, इस मामले को उठाया। उन्होंने कहा कि भाजपा में फर्जी डिग्रीधारक नेताओं की भरमार है। कई केंद्रीय मंत्री व फायरब्रांड नेता इस प्रकार का फर्जीवाड़ा कर कर चुके हैं। उन्होंने यह भी कहा कि निशिकांत दुबे यहीं नहीं एक पवित्र स्थान की जमीन, जिसकी कीमत करीब 20 करोड़ थी, उसे तीन करोड़ में ही लेकर मामले को अपनी ओर कर लिया। सुप्रियो भट्टाचार्य ने इस मामले को भारत निर्वाचन आयोग व लोकसभाध्यक्ष के समक्ष भी रखने की बात कही है, उनका कहना था कि इस मामले पर दोनों को संज्ञान लेना चाहिए और निशिकांत दुबे के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करनी चाहिए।

लेकिन निशिकांत दुबे जिस पार्टी के सांसद हैं वह केंद्र की सत्ता में है और उसमें अपनी पार्टी के लोगों के जघन्य से जघन्य अपराध को ढकने और अंतिम समय तक उसका बचाव करने की परंपरा है। कुलदीप सेंगर और चिन्मयानंद इसके उदाहरण हैं। इसके शीर्ष नेताओं की डिग्रियों पर भी सवाल उठते रहे हैं जिनका कभी कोई जवाब देने की जरूरत नहीं समझी गई। सारी संस्थाएं उसके कब्जे में हैं। ऐसे में निशिकांत दुबे के खिलाफ क्या कार्रवाई होगी, कहना कठिन है।

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