कोरोनाः बच्चे जागरुक, बड़े बेपरवाह

0 127

यह रांची के एक स्कूल में एमएस धौनी का जन्मदिन मनााए जाने के कार्यक्रम का दृश्य है। इसमें छोटे-छोटे बच्चों ने मास्क पहन रखा है लेकिन मेहमान अथवा संरक्षक के तौर पर उपस्थित किसी शख्स ने मास्क पहनना जरूरी नहीं समझा है। इनकी अगुवाई करने वाले शख्स का नाम जितेंद्र सिंह है। पेशे से बिल्डर हैं। स्वयं को समाजसेवी कहते हैं। कई संस्थाओं के संरक्षक बने हुए हैं। लेकिन संभवतः उन्हें पता नहीं कि देस और दुनिया में कोरोना नामक महामारी तेज़ी से फैल रही है। स्वयं झारखंड सरकार का स्वास्थ्य महकमा इससे निपटने में लगा हुआ है। विश्व स्वास्थ्य संगठन बार-बार अलर्ट जारी कर रहा है। केंद्र सरकार निर्देश जारी कर रही है। भारत कोरोना संक्रमितों की संख्या के मामले में दुनिया का तीसरे नंबर का देश बन चुका है। संक्रमितों की संख्या साढ़े सात लाख का आंकड़ा छू रही है। 20 हजार से अधिक लोग जान गंवा चुके हैं। बार-बार मास्क पहनने का निर्देश दिया जा रहा है। बिना मास्क सार्वजनिक स्थल पर पाए जाने पर आर्थिक और शारीरिक दंड का प्रावधान है।

पुस्तकः विश्व की प्राचीनतम सभ्यता लेखकः पं. अनूप कुमार वाजपेयी,कई पुरस्कारों से पुरस्कृत समीक्षा प्रकाशन, दिल्ली, मुजफ्फरपुर, मूल्य-2000 रुपये लेखक ने राजमहल पहाड़ियों और चट्टानों पर संसार के प्राचीनतम आदिमानव के पदचिन्ह ढूंढ निकाले। पता-वाजपेयी निलयम, नया पारा, दुमका झारखंड

पुस्तकः विश्व की प्राचीनतम सभ्यता लेखकः पं. अनूप कुमार वाजपेयी,कई पुरस्कारों से पुरस्कृत समीक्षा प्रकाशन, दिल्ली, मुजफ्फरपुर, मूल्य-2000 रुपये लेखक ने राजमहल पहाड़ियों और चट्टानों पर संसार के प्राचीनतम आदिमानव के पदचिन्ह ढूंढ निकाले। पता-वाजपेयी निलयम, नया पारा, दुमका झारखंड

आश्चर्य है कि इस मामले में बच्चे सचेत हैं, जागरुक हैं। लेकिन समाजसेवी का तमगा लगाकर घूमने वालों को इसकी कोई परवाह नहीं है। मास्क पहनना वे अपनी शान के खिलाफ समझते हैं।

Leave A Reply

Your email address will not be published.

%d bloggers like this: