अमर शहीद बिरसा मुंडा को भारत रत्न देने की मांग को ले हस्ताक्षर अभियान चलाने का निर्णय

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रांची। शहर के लोकप्रिय समाजसेवी और राज्य उपभोक्ता संरक्षण परिषद के सदस्य राकेश कुमार सिंह ने महान स्वतंत्रता सेनानी अमर शहीद बिरसा मुंडा को मरणोपरांत देश का सर्वोच्च सम्मान भारत रत्न की उपाधि से विभूषित करने की मांग को लेकर हस्ताक्षर अभियान चलाने का निर्णय लिया है। इस उद्देश्य को लेकर जल्द ही भगवान बिरसा मुंडा युवा मंच का गठन किया जाएगा। उन्होंने कहा कि इस संस्था के बैनर तले ग्राम पंचायत स्तर पर मुखिया, विधानसभा क्षेत्र में विधायकों और संसदीय क्षेत्रों में सांसदों से सहमति लेते हुए उनसे इस आशय की अनुशंसा पत्र पर हस्ताक्षर करा कर राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और गृह मंत्री को पत्र प्रेषित किया जाएगा। श्री सिंह ने कहा कि देश के स्वाधीनता संग्राम में भगवान बिरसा मुंडा ने अदम्य साहस का परिचय देते हुए अंग्रेजों के दांत खट्टे कर दिए थे। स्वतंत्रता संग्राम में उन्होंने अहम भूमिका निभाई। अंग्रेजी हुकूमत से लोहा लेते हुए उन्होंने अंग्रेजों के नाकों चने चबा दिए। उनकी वीरगाथाएं इतिहास के पन्नों में स्वर्णाक्षरों में लिखी हुई है। राष्ट्र के प्रति उनके समर्पण और बलिदान की कहानियां आज भी बिहार, झारखंड, ओडिशा, छत्तीसगढ़, बंगाल के विशेषकर आदिवासी बहुल इलाकों में चर्चित है। आदिवासी समुदाय के भगवान बिरसा मुंडा जाति, धर्म व संप्रदाय से ऊपर उठकर राष्ट्र और राष्ट्रीयता को सर्वोपरि मानते थे। श्री सिंह ने कहा कि देश की कई नामचीन हस्तियों को विभिन्न क्षेत्रों में राष्ट्र के प्रति उनके समर्पण और उत्कृष्ट योगदान के लिए मरणोपरांत भारत रत्न की उपाधि दी गई है। ऐसे में भगवान बिरसा मुंडा को भी उनके बलिदान के लिए भारत रत्न दिया जाना उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी। उन्होंने कहा कि भगवान बिरसा मुंडा युवा मंच का गठन कर इस उद्देश्य के लिए समाज के प्रबुद्ध वर्ग के लोगों व प्रगतिशील युवाओं को संगठन से जोड़ा जाएगा। आगे चलकर भगवान बिरसा मुंडा के सम्मान में यह संगठन सामाजिक नव निर्माण की दिशा में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

पुस्तकः विश्व की प्राचीनतम सभ्यता लेखकः पं. अनूप कुमार वाजपेयी,कई पुरस्कारों से पुरस्कृत समीक्षा प्रकाशन, दिल्ली, मुजफ्फरपुर, मूल्य-2000 रुपये लेखक ने राजमहल पहाड़ियों और चट्टानों पर संसार के प्राचीनतम आदिमानव के पदचिन्ह ढूंढ निकाले। पता-वाजपेयी निलयम, नया पारा, दुमका झारखंड

पुस्तकः विश्व की प्राचीनतम सभ्यता लेखकः पं. अनूप कुमार वाजपेयी,कई पुरस्कारों से पुरस्कृत समीक्षा प्रकाशन, दिल्ली, मुजफ्फरपुर, मूल्य-2000 रुपये लेखक ने राजमहल पहाड़ियों और चट्टानों पर संसार के प्राचीनतम आदिमानव के पदचिन्ह ढूंढ निकाले। पता-वाजपेयी निलयम, नया पारा, दुमका झारखंड

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