गीत-संगीत के क्षेत्र में अपनी प्रतिभा प्रदर्शित कर रहे दिलबाग सिंह

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रांची। राजधानी के तुपुदाना क्षेत्र अंतर्गत आरके मिशन रोड निवासी नौसेना के पूर्व अधिकारी दिलबाग सिंह बहुमुखी प्रतिभा के धनी व्यक्ति हैं। अपने कर्तव्य पथ पर सफलतापूर्वक अग्रसर होते हुए उन्होंने अब गीत- संगीत की दुनिया में कदम रखा है। वह अपनी गायन प्रतिभा के बलबूते एक मुकाम हासिल करने के प्रति संकल्पित हैं। फिलहाल यूट्यूब पर उनके गाने काफी लोकप्रिय हो रहे हैं। दिलबाग सिंह की मखमली आवाज का जादू श्रोताओं के सिर चढ़कर बोलने लगा है। वह गाना स्वयं कंपोज करते हैं। अपने लिखी गीतों को सुरमयी आवाज देकर संगीत भी वह स्वयं देते हैं। वह रांची में ही पले बढ़े। उनके पिता स्व.हरभजन सिंह एचईसी में कार्यरत थे। उनकी प्रारंभिक शिक्षा सेक्रेड हार्ट स्कूल में हुई। डीएवी श्यामली से उन्होंने प्लस टू किया। इसके बाद बिहार इंजीनियरिंग परीक्षा के माध्यम से सिंदरी में दाखिला लिया। वहां से धातुकर्म इंजीनियरिंग की डिग्री प्राप्त की। एक वर्ष के लिए एक निजी फर्म में काम किया। तत्पश्चात मेरीन इंजीनियर के रूप में भारतीय नौसेना में शामिल हो गए। इंडियन नेवी में 21 साल सेवारत रहे और इसके बाद अपने समृद्ध कैरियर को अलविदा कह वापस अपने गृहनगर रांची आ गए।
इस दौरान उन्होंने विदेश दौरा किया। लंदन के कुछ व्यावसायिक प्रतिष्ठानों से प्रेरित होकर उन्होंने अपने आवासीय परिसर में “सामग्री” नामक पूर्ण वातानुकूलित मल्टी स्टोर खोला। फिर उन्होंने द लाइटहाउस कैफे एंड किचन रेस्टोरेंट की स्थापना की। शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्ट सेवा के उद्देश्य से अपने आवासीय परिसर में स्थापित हैप्पी चिल्ड्रेन स्कूल के संचालन की जिम्मेदारी भी उन्होंने संभाल रखा है। दिलबाग एक शौकीन संगीतकार है। वह हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में गाने गाते हैं। संगीत के लिए उनका अपना खुद का बैंड होराइजन है। वह अब तक छह गाने बना चुके हैं। सभी गाने यू ट्यूब पर श्रोताओं की पसंदीदा हैं। वह खेलप्रेमी भी हैं।स्कूल-काॅलेज में अध्ययन काल के दौरान दिलबाग क्रिकेट और टेबल टेनिस के बेहतरीन खिलाड़ी रह चुके हैं। कॉलेज में उन्होंने एक क्रिकेटर के रूप में काफी ख्याति अर्जित की। एथलेटिक्स में भाला फेंक (जेवलिन थ्रो) खिलाड़ी के रूप में उन्होंने उत्कृष्ट प्रदर्शन किया। इस बीच गिटार बजाने में उनकी रुचि जगने लगी। उन्होंने अपने सीनियर से सीखना शुरू किया। उनसे प्रेरित होकर बीआईटी सिंदरी के संगीत क्लब में शामिल हो गए। उनके सहयोगी पंकज श्रीवास्तव उसी बैच के लेखक थे। जल्द ही दोनों ने गीत की रचना शुरू कर दी।नौसेना में शामिल होने के बाद उनके गिटार बजाने के कौशल में आशातीत सफलता मिली। सर्वप्रथम उन्होंने इंग्लिश रॉक के साथ शुरुआत की। वह नोएडा में अपना खुद का म्यूजिक स्टूडियो स्थापित करने के लिए आगे बढ़े। उनके दोस्त चंद्रा ने संगीत बनाना शुरू कर दिया और पंकज द्वारा लिखे गए गीतों को स्वर दिया। उनका पहला गाना वर्ष 2017 में तैयार हुआ था। मुश्किल दौर में भी आखिरकार गाना रिकॉर्ड किया गया और रिलीज किया गया। उनके गाए टाइटल गीत “मुझसे जुड़ी” ने पहले ही बार 1.15 मिलियन दृश्य पार कर लिया है। दूसरे गाने को भी लगभग 0.5 मिलियन दर्शकों ने काफी सराहा। उनका तीसरा गाना एक पंजाबी गीत है, जिसे उनके एक वरिष्ठ सहयोगी ने लिखा और दिलबाग ने खुद संगीतबद्ध किया। चौथा उन्होंने एक हिंदी रॉक गीत की रचना की और वह भी 0.47 मिलियन बार देखा गया। गीत संगीत की दुनिया में कदम बढ़ाते हुए दिलबाग एक बेहतर मंच के लिए प्रतीक्षारत हैं।उनके गाए गीत यूट्यूब पर युवाओं को झूमने पर विवश कर देते हैं। वह एक गायक के रूप में अपना आदर्श किशोर कुमार को मानते हैं। वहीं, संगीत की दुनिया में आरडी बर्मन को वह अपना आदर्श मानते हैं। उन्हें अंग्रेजी बैंड अच्छा लगता है। उनके बहुआयामी व्यक्तित्व को देखकर ऐसा प्रतीत होता है कि उन्होंने समानांतर रूप से विभिन्न क्षेत्रों में विशेषज्ञता हासिल की है। वह एक स्कूल, एक मल्टी स्टोर, एक रेस्तरां का सफल संचालन करते हुए एक गायक और संगीतकार के रूप में भी अपनी पहचान स्थापित करना चाहते हैं। उन्होंने पांच साल के लिए गोल्ड जिम में भी प्रशिक्षण प्राप्त किया और शारीरिक प्रशिक्षण का कौशल सीखा। उनका मंत्र फिट रहने का है। वह अपने परिवार और कर्मचारियों में प्रति भी अपने कर्तव्यों का बखूबी निर्वहन कर रहे हैं। गायन कौशल को निखारने और गिटार वादन कला को बेहतर बनाने के लिए वह एक साल के लिए नोएडा स्कूल ऑफ रॉक में भी शामिल हुए, लेकिन उन्हें अपने व्यवसाय की देखभाल करने के लिए वहां छोड़ना पड़ा। दिलबाग सिंह की पत्नी शबनम स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया (सेल), नई दिल्ली में डीजीएम के पद पर कार्यरत हैं। उनकी बड़ी बेटी सान्या दिल्ली में अध्ययनरत हैं। वह भी एक गिटारवादक है। दिलबाग सिंह की छोटी बेटी अलीशा 8 वीं कक्षा में है। वह राज्यस्तरीय बास्केटबाल खिलाड़ी अंडर-14, राज्य चैंपियनशिप में गौतमबुद्धनगर का प्रतिनिधित्व करती है।
वर्तमान में गहराए वैश्विक संकट कोविद-19 से बचाव के मद्देनजर किए गए देशव्यापी लाॅकडाउन के दौरान दिलबाग सिंह ने अपने आवासीय परिसर में लगातार लंगर चलाया। आस-पास के सैकड़ों गरीब परिवारों के बीच राशन सामग्री का वितरण किया। वही लॉकडाउन की अवधि के दौरान हजारों ग्रामीणों को नियमित रूप से रोज भोजन कराते रहे। पीड़ित मानवता के प्रति उनकी सेवा की चहुंओर सराहना की जा रही है।
बहरहाल, बहुमुखी प्रतिभा के धनी दिलबाग सिंह एक गीतकार, गायक और संगीतज्ञ के रूप में लोगों के बीच अपनी पहचान बनाने की दिशा में जुटे हैं। इसके लिए वह अपने सीनियर्स के अनुभवों से सीखने और इस क्षेत्र में अपनी कला को निखारने के लिए प्रयासरत हैं। इसमें जरा भी संदेह नहीं कि गीत-संगीत के क्षेत्र में उन्हें बेहतर मंच मिला, तो अपनी प्रतिभा प्रदर्शित कर झारखंड का नाम रौशन करेंगे। दिलबाग सिंह के गाने को यूट्यूब के चैनल https://www.youtube.com/channel/UCpYusxhObKVa-2DQM_tBYXw पर सुना जा सकता है।

पुस्तकः विश्व की प्राचीनतम सभ्यता लेखकः पं. अनूप कुमार वाजपेयी,कई पुरस्कारों से पुरस्कृत समीक्षा प्रकाशन, दिल्ली, मुजफ्फरपुर, मूल्य-2000 रुपये लेखक ने राजमहल पहाड़ियों और चट्टानों पर संसार के प्राचीनतम आदिमानव के पदचिन्ह ढूंढ निकाले। पता-वाजपेयी निलयम, नया पारा, दुमका झारखंड

पुस्तकः विश्व की प्राचीनतम सभ्यता लेखकः पं. अनूप कुमार वाजपेयी,कई पुरस्कारों से पुरस्कृत समीक्षा प्रकाशन, दिल्ली, मुजफ्फरपुर, मूल्य-2000 रुपये लेखक ने राजमहल पहाड़ियों और चट्टानों पर संसार के प्राचीनतम आदिमानव के पदचिन्ह ढूंढ निकाले। पता-वाजपेयी निलयम, नया पारा, दुमका झारखंड

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