सादगी के साथ मनाया गया झारखंड विधानसभा सचिवालय का स्थापना दिवस

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रांची। झारखंड विधानसभा की 19 वीं वर्षगांठ पर 22 नवंबर को सचिवालय कर्मियों ने आचार संहिता का ध्यान रखते हुए सादगी के साथ स्थापना दिवस समारोह का आयोजन किया। कार्यक्रम में विधानसभा सचिव महेंद्र प्रसाद, अपर सचिव विनय कुमार सिंह, अपर सचिव जावेद हैदर मंच पर उपस्थित थे। कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्जवलित कर की गई। मंच का संचालन संयुक्त सचिव मिथलेश कुमार मिश्र ने किया।

पुस्तकः विश्व की प्राचीनतम सभ्यता लेखकः पं. अनूप कुमार वाजपेयी,कई पुरस्कारों से पुरस्कृत समीक्षा प्रकाशन, दिल्ली, मुजफ्फरपुर, मूल्य-2000 रुपये लेखक ने राजमहल पहाड़ियों और चट्टानों पर संसार के प्राचीनतम आदिमानव के पदचिन्ह ढूंढ निकाले। पता-वाजपेयी निलयम, नया पारा, दुमका झारखंड

पुस्तकः विश्व की प्राचीनतम सभ्यता लेखकः पं. अनूप कुमार वाजपेयी,कई पुरस्कारों से पुरस्कृत समीक्षा प्रकाशन, दिल्ली, मुजफ्फरपुर, मूल्य-2000 रुपये लेखक ने राजमहल पहाड़ियों और चट्टानों पर संसार के प्राचीनतम आदिमानव के पदचिन्ह ढूंढ निकाले। पता-वाजपेयी निलयम, नया पारा, दुमका झारखंड

मंच संचालन के क्रम में श्री मिश्र ने झारखंड की लोक संस्कृति और सांस्कृतिक विरासत तथा लोकभाषा को जोड़ते हुए कहा कि जिस राज्य या राष्ट्र की सांस्कृतिक विरासत अक्षुण्ण रहेगी वह कभी पतन की ओर नहीं बढ़ सकता। संपूर्ण भारत में झारखंड एकमात्र प्रदेश है जहां 16 भाषाओं को द्वितीय राजभाषा का दर्जा प्राप्त है। यह अनेकता में एकता का परिचायक है। उन्होंने लोकसभा के प्रथम अध्यक्ष स्व. जीवी मालवेंकर का जिक्र करते हुए बताया कि संसद में एक पृथक लोकसभा सचिवालय होना चाहिए जो कार्यपालिका के नियंत्रण से मुक्त हो ताकि उसके कर्मी को अनावश्यक दबाव से मुक्त रखा जा सके, विधायिका में कार्य करने वाले कर्मी सामान्य कर्मियों से भिन्न होते हैं जो जन प्रतिनिधियों को पूर्ण सम्मान देते हुए विधायिका के समस्त कार्यों का निष्पादन करने में दक्ष होने चाहिए।

स्वागत भाषण के क्रम में संयुक्त सचिव मधुकर भारद्वाज ने कहा कि झारखंड विधानसभा के प्रथम अध्यक्ष के रूप में 22 नवंबर 2000 को आसन ग्रहण कर कार्यभार संभाला था। उसी समय से आज के दिन झारखंड विधानसभा स्थापना दिवस के रूप में मनाया जाता है। उन्होंने झारखंड विधानसभा की विभिन्न विशिष्ट विधायी कार्य प्रणालियों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि अनागत प्रश्नों से संबंधित समिति का गठन, शून्यकाल समिति का गठन, राज्यकीय आश्वासन पर कृत कार्रवाइयों पर प्रतिवेदन, मुख्यमंत्री प्रश्नकाल तथा वर्तमान में ऑनलाइन प्रश्नोत्तर प्रणाली पर सभा सचिवालय के कर्मियों द्वारा तत्परता से कार्य किए गए थे। जो प्रशंसनीय है।

सभा सचिवालय के वरिष्ठ पदाधिकारी सैय्यद जावेद हैदर ने कहा कि स्थापना दिवस एक नए संकल्प का समय होता है और हम जिस संस्थान में अपने जीवन का महत्वपूर्ण समय देते हैं उसके प्रति हर कर्मी को प्रतिबद्धता प्रकट करनी चाहिए।

विधानसभा के वरिष्ठ पदाधिकारी अपर सचिव विनय कुमार सिंह ने अपने वक्तव्य में कहा कि संसदीय लोकतंत्र के प्रावधानों के तहत गठित झारखंड विधानसभा सचिवालय के समस्त पदाधिकारी और कर्मी यहां उपस्थित हैं। इस यादगार क्षण की महत्ता को तरो-ताज़ा करने के लिए कि आज के ही दिन झारखंड विधान सचिवालय की स्थापना हा था। सचिवालय क कर्म होने के नाते हम अपने अहर्निश सेवा से विधायिका एवं कार्यपालिका के बीच एक सेतु के रूप में कार्य करते हैं।

स्थापना दिवस के उद्घाटनकर्ता सचिव महेंद्र प्रसाद ने सचिवालय कर्मियों को आह्वान करते हुए अपने वक्तव्य में कहा कि वे न्यायिक सेवा के पदाधिकारी के रूप में यहां पदस्थापित हुए। लेकिन यहां के कर्मियों के सहयोग से बहुत ही कम समय में विधानसभा की कार्यशैली एवं कार्यप्रणाली को समझने का अवसर प्राप्त हुआ। विधानसभा एक ऐसी जगह है जहां जनता की विभिन्न समस्याएं रखी जाती हैं और उनका समुचित निदान हो पाता है। प्रशासनिक दायित्व के संबंद में उन्होंने स्पष्ट किया कि वे किसी कर्मी को दंडित करने की मंशा नहीं रखते। परंतु कर्तव्य निर्वहन में असफलता के कारण किसी को दंड दिया जाता है तो यह प्रशासनिक विवशता है।

कार्यक्रम के अंत में संयुक्त सचिव धनेश्वर राणा ने धन्यवाद ज्ञापन किया।

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