वित्तमंत्री का प्याज संबंधी बयान बेतूका, अमर्यादितः सुबोधकांत

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रांची। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पूर्व केंद्रीय मंत्री सुबोधकांत सहाय ने केंद्रीय वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण के प्याज संबंधी बयान को अपरिपक्वता, अगंभीरता और मानसिक दीवालियापन का परिचायक बताया है। उन्होंने कहा कि वे क्या खाती हैं, क्या पीती हैं, इससे सदन का और देशवासियों का क्या लेना-देना। उनसे किसी ने यह पूछा तो नहीं था।

भाजपा के एक और वरिष्ठ नेता अश्वनी चौबे ने भी लगे हाथ बयान दिया है कि उन्होंने कभी प्याज चखा ही नहीं। धीरे-धीरे भाजपा के सारे वैष्णव प्याज विरोधी बयान देंगे। इन बयानों के जरिए मोदी सरकार के जिम्मेवार मंत्री क्या संदेश देना चाहते है। वे नहीं खाते तो किसी को प्याज नहीं खाना चाहिए, यही कहना चाहते हैं क्या। इनलोगों ने संसद को और देश को मजाक बना रखा है। एक मसखरों की टीम जमा हो गई है जो जनता को भरमाकर सरकार चला रही है।

पूर्व केंद्रीय मंत्री ने कहा कि मोदी और शाह के दिमाग में सिर्फ विध्वंस की योजनाएं भरी पड़ी हैं। नोटबंदी और जीएसटी के बाद अब एनआरसी का शगूफा छेड़ा है। अपनी नाकामियों से जनता का ध्यान हटाने के लिए ये लोगों को परेशान करने पर तुले हैं। आम आदमी अपनी रोजी-रोटी और परिवार के लालन-पालन के साथ एक सुरक्षित और शांतिपूर्ण जीवन चाहता है। लेकिन सत्ता में बैठे लोग उसे अपनी सांप्रदायिक साजिशों में शामिल करना चाहते हैं।

श्री सहाय ने कहा कि सरकार चलाने के लिए बड़े संयम और विवेक की दरकार पड़ती है। देश कॉमेडी और साज़िश से नहीं चलता। अनर्गल बयानों से नाकामियां नहीं छुपतीं। सरकार में एक भी गंभीर आदमी होता तो जनता के दुःख दर्द को समझता। दो-तीन पूंजीपति घरानों के पास देश को गिरवी रख देने वाली सरकार स्वयं को राष्ट्रभक्त कहे तो इससे बड़ा मजाक क्या हो सकता है। सवाल प्याज का ही नहीं, सारी सब्जियों और खाद्यान्नों की कीमतें आसमान छू रही हैं और सरकार बाजार को नियंत्रित करने की जगह हिंदू-मुसलिम कर रही है। इसे देश का दुर्भाग्य ही कहा जा सकता है।

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