बड़कागांव के किसानों-विस्थापितों की समस्याओं का स्थायी समाधान करे सरकार : सुबोधकांत सहाय

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रांची। पूर्व केंद्रीय मंत्री सुबोधकांत सहाय ने कहा है हजारीबाग जिलांतर्गत बड़कागांव के किसानों- विस्थापितों की समस्याओं का स्थाई समाधान किया जाना जरूरी है। अपनी मांगों को लेकर बड़कागांव के किसान, मजदूर और बेरोजगार व्यापक अधिकार सत्याग्रह कार्यक्रम के तहत आंदोलनरत हैं। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार के पदाधिकारी महज खानापूरी के लिए निर्गुण बैठक न करें। विगत दिनों त्रिपक्षीय वार्ता की गई, लेकिन बेनतीजा रही। बड़कागांव के किसानों, मजदूरों और बेरोजगारों की पिछले कई सालों से चली आ रही समस्याओं का ठोस और स्थाई हल निकालें। श्री सहाय ने रविवार को एक बयान जारी कर कहा है कि भाजपा के शासनकाल में बड़कागांव के किसानों व मजदूरों पर किए गए अत्याचार की कहानी का पटाक्षेप होना चाहिए। बड़कागांव के किसान अपने अधिकारों के लिए विगत कई वर्षों से संघर्षरत हैं। एनटीपीसी परियोजना और उसकी सहायक त्रिवेणी कंपनी की हठधर्मिता के विरोध में पिछले दस दिनों से स्थानीय किसानों, मजदूरों और बेरोजगारों का व्यापक अधिकार सत्याग्रह कार्यक्रम चल रहा है, लेकिन एनटीपीसी और त्रिवेणी कंपनी प्रबंधन के कानों पर जूं तक नहीं रेंग रहा है। एनटीपीसी परियोजना के अधिकारियों की ओर से इस दिशा में कोई सार्थक पहल नहीं की जा रही है। उन्होंने कहा कि बड़कागांव के किसानों की उर्वर जमीन, जिससे किसान एक साल में चार फसल निकालने में सफल होते हैं, वैसे जमीनों के मुआवजा के लिए अभी तक कंपनी की ओर से कोई ठोस पहल नहीं की गई है। श्री सहाय ने इस दिशा में झारखंड सरकार को भी सलाह देते हुए कहा है कि बड़कागांव के किसानों की समस्याओं पर गंभीरता से विचार कर इसका स्थाई समाधान जल्द से जल्द निकालें। उन्होंने कहा कि तत्कालीन रघुवर सरकार के शासनकाल में बड़कागांव के किसानों पर हुए अत्याचार, गोलीकांड के विरोध में पूरे विपक्ष को एकजुट किया गया था। इस आंदोलन की चिंगारी झारखंड के कोने-कोने में पहुंची थी। किसानों के हक के लिए शुरू किए गए इस आंदोलन से प्रेरित होकर गोला, खूंटी, गोड्डा में भी किसानों-विस्थापितों ने व्यापक आंदोलन किया था। लेकिन तत्कालीन रघुवर सरकार ने किसानों की एक नहीं सुनी और उनपर गोलियां चलवाई। भाजपा सरकार के शासनकाल में हुए अत्याचार के खिलाफ किसानों का यह आंदोलन परिवर्तित होकर व्यापक जनांदोलन का रूप ले लिया, नतीजतन भाजपा को सत्ता से बेदखल होना पड़ा। श्री सहाय ने राज्य सरकार भी समस्या का हल ढूंढने की दिशा में सकारात्मक पहल करें। एनटीपीसी और उसकी सहयोगी कंपनी त्रिवेणी के साथ-साथ राज्य सरकार के पदाधिकारी भी इस दिशा में किसानों के हितों का ध्यान रखते हुए स्थाई निदान निकालें। किसानों, मजदूरों, विस्थापितों की मांगों के संदर्भ में अविलंब कार्रवाई कर आंदोलन समाप्त कराएं, ताकि पिछले तकरीबन एक दशक से भाजपा शासनकाल के अत्याचार की कहानी का अंत हो सके।

पुस्तकः विश्व की प्राचीनतम सभ्यता लेखकः पं. अनूप कुमार वाजपेयी,कई पुरस्कारों से पुरस्कृत समीक्षा प्रकाशन, दिल्ली, मुजफ्फरपुर, मूल्य-2000 रुपये लेखक ने राजमहल पहाड़ियों और चट्टानों पर संसार के प्राचीनतम आदिमानव के पदचिन्ह ढूंढ निकाले। पता-वाजपेयी निलयम, नया पारा, दुमका झारखंड

पुस्तकः विश्व की प्राचीनतम सभ्यता लेखकः पं. अनूप कुमार वाजपेयी,कई पुरस्कारों से पुरस्कृत समीक्षा प्रकाशन, दिल्ली, मुजफ्फरपुर, मूल्य-2000 रुपये लेखक ने राजमहल पहाड़ियों और चट्टानों पर संसार के प्राचीनतम आदिमानव के पदचिन्ह ढूंढ निकाले। पता-वाजपेयी निलयम, नया पारा, दुमका झारखंड

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