भव्य झांकियों और रंगारंग कार्यक्रमों के साथ मना एचईसी का 61 वां स्थापना दिवस

देश के आर्थिक विकास में एचईसी की भूमिका अहम : डॉ.नलिन सिंघल

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रांची। आजाद भारत में उद्योगों की जननी कहे जाने वाले हेवी इंजीनियरिंग कॉरपोरेशन का 61 वां स्थापना दिवस 15 नवंबर को धूमधाम से मनाया गया। इस अवसर पर विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए गए। एचईसी के नवनियुक्त अध्यक्ष सह प्रबंध निदेशक डॉ.नलिन सिंघल ने मार्च न टुवर्ड्स नेशन ब्युल्डिंग को झंडी दिखाकर रवाना किया। इस वर्ष एचईसी के इतिहास में प्रथम बार निगम के तीनों प्लांट एफएफपी, एचएमबीपी और एचएमटीपी के कर्मियों द्वारा बनाए गए उपकरणों की झांकी भी प्रस्तुत की गई। इस अवसर पर नेहरू पार्क में एचईसी कर्मियों को संबोधित करते हुए निगम के सीएमडी ने कहा कि राष्ट्रहित में एचईसी ने कई उपकरण बनाकर अपनी उपयोगिता साबित की है। निगम ने स्टील, कोयला, रक्षा मंत्रालय, ऊर्जा सेक्टर व इसरो के लिए कई महत्वपूर्ण उपकरणों का निर्माण किया है। यही वजह है कि एचईसी द्वारा बनाए गए उपकरणों की मांग वैश्विक बाजार में भी अधिक है। उन्होंने एचईसी कर्मियों से निगम में औद्योगिक शांति बरकरार रखते हुए उत्पादन बढ़ाने की अपील की। मौके पर निगम के निदेशक, कार्मिक एमके सक्सेना ने कहा कि कंपनी अब बुरे दौर से निकल रही है। विभिन्न क्षेत्रों से कार्यादेश प्राप्त हो रहे हैं। यहां देश के महत्वपूर्ण क्षेत्रों के लिए उपकरण बनाए जा रहे हैं। गुणवत्तापूर्ण कार्य करना एचईसी की विशेषता रही है। एचईसी के निदेशक, उत्पादन और विपणन राणा शुभाशीष चक्रवर्ती ने कहा कि देश के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू की पहल पर एचईसी की स्थापना की गई। यहां राष्ट्र के नव निर्माण से संबंधित विभिन्न क्षेत्रों के लिए महत्वपूर्ण उपकरण बनाए जाते रहे हैं। एचईसी बदहाली के दिनों से उबरकर बाहर आ रही है। यह कंपनी देश के स्टील सेक्टर, रक्षा क्षेत्र, कोल, नेवी, स्पेस रिसर्च आदि के लिए भी उपकरण बना रही है।  रांची के विकास में भी एचईसी की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। स्थापना दिवस के अवसर पर विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रमों का भी आयोजन किया गया। इस अवसर पर एचईसी कर्मियों का उत्साहवर्द्धन किया गया। उत्कृष्ट कर्मियों को सम्मानित किया गया। मौके पर काफी संख्या में एचईसी के अधिकारी व कर्मचारी गण शामिल हुए।

पुस्तकः विश्व की प्राचीनतम सभ्यता लेखकः पं. अनूप कुमार वाजपेयी,कई पुरस्कारों से पुरस्कृत समीक्षा प्रकाशन, दिल्ली, मुजफ्फरपुर, मूल्य-2000 रुपये लेखक ने राजमहल पहाड़ियों और चट्टानों पर संसार के प्राचीनतम आदिमानव के पदचिन्ह ढूंढ निकाले। पता-वाजपेयी निलयम, नया पारा, दुमका झारखंड

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1 Comment
  1. Alejandrina says

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